जौनपुर में साँप के प्रकार और उनका सृष्टि में महत्व

जौनपुर

 02-02-2018 11:15 AM
रेंगने वाले जीव

जौनपुर में पहले बहुत ज्यादा संख्या में साँप मौजूद थे। सन 1908 के जौनपुर गज़ेटियर में यह टिपण्णी की गयी है कि चावल के खेत और नालों में बड़ी मात्रा में साँप मिलते थे तथा उनके काटने की वजह से मृत्यु-दर बहुत बढ़ गया था। यह घटनाएँ इतनी ज्यादा मात्रा में होने लगी थी की सन 1906 में जौनपुर नगर पालिका ने साँप पकड़ने और मारने के लिए इनाम जारी किये थे। दुनिया में तक़रीबन 2000 से भी ज्यादा साँप की प्रजातियाँ हैं जिन्मेसे कुछ 200 के करीब प्रजातियाँ पुरे भारत में पायी जाती हैं। ये विविध प्रजातियाँ हिमालय से लेकर रेगिस्तान तक मौजूद हैं। जौनपुर में आमतौर पर पायी जाने वाली सर्पों की प्रजातियाँ कुछ इस प्रकार हैं: काला नाग जिसे कोबरा के नाम से ज्यादा जाना जाता है तथा करइत, अजगर, गेहुअन, धामिन और पंडोल। इन सर्पों में से ज्यादातर सर्प की प्रजातियाँ खेतों और जंगलों के आस-पास पायी जाती हैं। आज शहरीकरण की वजहसे सर्पों की संख्या कम हो गयी है तथा उनके रहने का क्षेत्र और खाद्य पाने के उपलब्ध विकल्पों में भी कमतरता आयी है। सपेरें उनको पकडके खेल के लिए इस्तेमाल करते हैं तथा भारत में होने वाले नागपंचमी के दिन सर्पों की अनगनित हत्या भी होती है। इन सब चीजों पे रोक लगाना जरुरी है क्योंकि सर्पों का हमारे पारिस्थितिक तंत्र और खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान है। साँप पारिस्थितिक तंत्र में मध्य स्तर पर है और पर्यावरण का समतोल बनाए रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। प्रस्तुत चित्र सर्पराज काले नाग का पृष्ठीय और उदरीय रेखाचित्र है। 1. जौनपुर ए गज़ेटियर, बीइंग वॉल्यूम xxviii 1908 https://archive.org/stream/in.ernet.dli.2015.12881/2015.12881.Jaunpur-A-Gazetteer-Being-Volume-Xxviii_djvu.txt 2. रेपटाइल रिसर्च एंड कांसेर्वेशन ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया http://reptiletrust.blogspot.in/2011/12/30-species-of-indian-non-poisonous.html 3.https://www.ehp.qld.gov.au/wildlife/livingwith/snakes/importance.html 4. अर्बन वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट, तीसरा एडिशन: क्लार्क एडम 5. द थानातोफीडीया ऑफ़ इंडिया: जे.फेयरेर 6.फ़ॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट, उत्तर प्रदेश सरकार http://upforest.gov.in/StaticPages/reptiles_dudhwa3.aspx



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