जौनपुर में बिरहा का महत्व

जौनपुर

 25-01-2018 06:50 AM
ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

लोकगीत किसी भी स्थान के इतिहास को जानने के लिये रामबाण साबित होते हैं। यदि देखा जाये तो सम्पूर्ण भारत में विभिन्न प्रकार के लोकगीत मौजूद हैं जैसे की आल्हा-ऊदल, बिरहा, रामलीला, बिहुला आदि प्रत्येक उल्लिखित गीतों का एक स्थान व जाति या सम्प्रदाय से जोड़ होता है जो किसी शौर्य, विरह या उल्लास का सूचक होता है। अवधी भाषा में वैसे तो कई लोकगीत उपरस्थित हैं उन्ही गीतों में से एक है बिरहा। अवधी गीत साधारणतया किसी ना किसी जाति के अन्तर्गत बंधे होते हैं जैसे की कुम्हारों का अलग लोकगीत, अहिरों का अलग, गड़रियों का अलग। बिरहा यदुवंशी, यादव या अहिरों का मुख्य गान माना गया है। वैसे बिरहा आजकल अनेक जातियों द्वारा गाया जाने लगा है। अहीर एक महत्वपूर्ण जाति है जो अपनी वीरता, पराक्रम तथा शौर्य के लिए प्रसिद्ध है। बिरहा शब्द की व्युत्पति विरह से मानी जाती है। ऐसा अनुमान है कि प्रारम्भ में विरह में वियोग श्रृंगार के ही गीत गाये जाते थे, परन्तु आजकल इनमें सभी प्रकार के विषयों का समावेश हो गया है। लोकगीत के अनुसार ना बिरहा कर खेती भइया, ना बिरहा फरे डार। बिरहा बसे हिरदय में रामा, जब उमगे तब गाव। अवधी क्षेत्र में बिरहा के दो प्रकार पाये जाते हैं – 1. चार कड़ी वाला बिरहा 2. रामायण, महाभारत इत्यादि कथाओं वाला बिरहा। बिरहा का मुख्य विषय है लोक जीवन की अनुभूति। अवध में बिरहा गायन (बिरहा के दंगल) की परम्परा बहुव्याप्त है। गायक कहता है- हुकुम तोरा पाई तो बिरहा बनाई। बिरहा बनाय दंगल मा सुनाई। एक बिरहा की कुछ पंक्तियां दृष्टव्य है जिनमें हनुमान जी द्वारा सीता जी के पता लगाने का वर्णन है – न खबरि लेय सीता के चले हनुमान। पल मा फाँदि गये सात समन्दर। पहुँचे जाय लंका के अन्दर। सिया मात जहाँ बिलखे महान। खबरि दइके मुंदरी सीस क नावा। रघुबर के सन्देस सुनावा। जौनपुर में बिरहा गान अत्यन्त मशहूर है तथा यह विभिन्न अवसरों पर गया जाता है। बिरहा गीतों के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि किस प्रकार से समाज में बदलाव आया, मछलीशहर काण्ड व अन्य कई बिरहा खण्ड हैं जो जौनपुर में बिरहा प्रसार को प्रदर्शित करते हैं। 1. राजभाषा पत्रिका, जातीय कोष्ठकों में बन्द अवधी लोकगीतों के रंग, अशोक (अज्ञानी), रामपुर



RECENT POST

  • मांसाहारियों को आवश्‍यकता है एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति जागरूक होने की
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-02-2019 10:50 AM


  • वेलेंटाइन डे का इतिहास
    धर्म का उदयः 600 ईसापूर्व से 300 ईस्वी तक

     14-02-2019 12:45 PM


  • जौनपुर में एक ऐसा कदम रसूल है, जो अन्य कदम रसूलों से अलग है
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-02-2019 02:38 PM


  • विलुप्त होता स्वदेशी खेल –गिल्ली डंडा
    हथियार व खिलौने

     12-02-2019 05:50 PM


  • संगीत जगत में जौनपुर के सुल्तान की देन- राग जौनपुरी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     11-02-2019 04:36 PM


  • बसंत पंचमी पर बसंत ऋतु के कुछ मनमोहक दृश्य देखें
    जलवायु व ऋतु

     10-02-2019 12:55 PM


  • गंगा से भी ज्‍यादा प्रदूषित हो रही है गोमती
    नदियाँ

     09-02-2019 10:30 AM


  • महिलाओं के लिए कुछ बुनियादी आत्मरक्षा की तकनीक
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     08-02-2019 09:41 PM


  • भारतीय समाज में अफ्रीकियों का इतिहास एवं वर्तमान स्थिति
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     07-02-2019 01:22 PM


  • शर्कीकाल के दौरान जौनपुर था दुनिया के शीर्ष मदरसों का केंद्र
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     06-02-2019 02:26 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.