1556 में गोवा में स्थापित किया गया था भारत का सर्वप्रथम प्रिंटिंग प्रेस, कौन सी थीं पहली प्रकाशित पुस्तकें?

जौनपुर

 04-05-2022 08:09 AM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

भारत के इतिहास में प्रिंटिंग प्रेस ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रिंटिंग प्रेस व्यवस्थित मुद्रित विषयों के बड़े पैमाने पर वितरण के लिए एक उचित उपकरण है, यह विश्वभर में विभिन्न हिस्सों में विभिन्न समुदायों के बीच विचारों के आदान-प्रदान में मदद करने का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।भारत का पहला प्रिंटिंग प्रेस 1556 में सेंट पॉल कॉलेज (St. Paul’s College), गोवा में स्थापित किया गया था। 30 अप्रैल 1556 को लोयोला (Loyola) के सेंट इग्नाटियस को लिखे एक पत्र में, फादर गैस्पर कैलेजा ने एबिसिनिया (Abyssinia) में मिशनरी कार्य को बढ़ावा देने के लिए पुर्तगाल (Portugal) से एबिसिनिया (वर्तमान इथियोपिया, Ethopia) के लिए एक प्रिंटिंग प्रेस (Printing Press) ले जाने वाले जहाज की बात कही।हालांकि कुछ परिस्थितियों के कारण, इस प्रिंटिंग प्रेस को भारत से बाहर जाने से रोक दिया गया था। परिणामस्वरूप, गोवा में जोआओ डी बुस्टामांटे (Joao De Bustamante) के माध्यम से 1556 में छपाई का काम शुरू हुआ। एक पेशेवर प्रिंटर को भारतीय सहायक के साथ प्रिंटिंग प्रेस को स्थापित करने और उसे चलाने के लिए भेजा गया। वहीं भारत में, पहली मुद्रित कृतियाँ पुस्तकें नहीं थीं, बल्कि कॉन्क्लूसो (Conclusoes) नामक थीसिस थीं। और पहली मुद्रित भारतीय भाषा तमिल थी, रोमनकृत तमिल लिपि में पहली तमिल पुस्तक लिस्बन में 1554 में छपी थी। जेसुइट फादर ने 20 अक्टूबर, 1578 को केरल में पहली भारतीय भाषा की किताब छापी। कोंकणी पत्र लैटिन (Latin) शैली में लिखे गए, और यह रूप आज भी गोवा में उपयोग किया जा रहा है। अन्य भाषाई क्षेत्रों में उपयोग की जाने वाली कोंकणी इसी तरह की लिपियों में लिखी गई थीं। जिससे यह प्रतीत होता है कि पुर्तगालियों (Portuguese)द्वारा गोवा में रोमन लिपि (Roman Script) को अपने राजनैतिक नियमन और अपने उपनिवेशों की निगरानी के लिए अधिक अनुकूल माना गया था।
1579 में, इंग्लैंड के जेसुइट थॉमस स्टीफन (Jesuit Thomas Stephen) गोवा पहुंचे, तथा उन्हें कोंकणी साहित्य के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।उनका मुख्य काम मराठी भाषा में पुराण क्रिस्टा (Christa Puraan) जिसे मराठी में एक उत्कृष्ट कार्य माना जाता है), जिसे उन्होंने रामायण के हिंदू महाकाव्य के बाद तैयार किया गया था।यह राचोल सेमिनरी प्रेस, 1616 में छपी पहली पुस्तक थी। वहीं 1658-1659 से गोवा में छपा एक प्रमुख कोंकणी कार्य मिगुएल डे अल्मेडा (Miguel de Almaida) का जार्डिम डे पास्टोरेस(Jardim de Pastores) था। 17वीं शताब्दी के दौरान गोवा में धार्मिक विषयों पर लगभग 40 पुस्तकें प्रकाशित हुईं।प्रेस से पहले तमिल प्रकाशन को 1713 में विस्तृत रूप से अभिलिखित किया गया था, जिसे ज़ेगेनबाल्ग की मांग पर 1714 में न्यू टेस्टामेंट (New Testament) द्वारा समर्थित किया गया था। 1800 के दूसरे दशक में, यूरोप में छपी विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को पुन: प्रकाशित करके कलकत्ता बुक सोसाइटी द्वारा प्रकाशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया गया। अकेले कलकत्ता में ही बैपटिस्ट (Baptist)द्वारा 1820 तक विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में 710,000 स्कूली किताबें छापने का दावा किया गया।1857 में, शहरी आम आदमी को मुद्रित पुस्तिका के महत्व का अचानक एहसास हुआ, कि केवल प्रिंट ही देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न समुदायों के बीच विचारों के आदान-प्रदान में सहायक हो सकता है। वहीं ब्रिटिश के आने के बाद उन्होंने देश में शिक्षा को बढ़ावा देने, शहरी आबादी के एक बड़े हिस्से को सफेदपोश करने को बढ़ावा दिया। इन दोनों लक्ष्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में मुद्रण / प्रकाशन को उन्नत किया। 1844 में मद्रास में हिगिनबोथम (Higinbotham) जैसे संगठन; 1858 में लखनऊ में नवल किशोर प्रेस; 1864 में बंबई में डीबी तारापोरवाला एंड संस; 1877 में इलाहाबाद में एएच व्हीलर एंड कंपनी; 1884 में इलाहाबाद में इंडियन प्रेस; 1885 में दिल्ली में आई.एम.एफ. प्रेस; 1888 में गोवर्सन पब्लिशर्स ने स्वतंत्रता-पूर्व युग में व्यावसायिक प्रकाशन गतिविधियों को प्रोत्साहन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न प्रकाशन गृहों के प्रवेश के लिए 1900 के पहले तीन दशक उल्लेखनीय थे। वे स्कूलों और कॉलेजों के लिए पाठ्य पुस्तकों, धार्मिक पुस्तकें, साहित्य पर किताबें, राष्ट्रीय भावना से प्रेरित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में नई बनाई गई किताबों के मुद्रण और प्रकाशन में शामिल थे।
वहीं मोती लाल बनारसी दास (1903 में स्थापना); अंजुमन तारक़ी उर्दू (हिंद) (1903 में स्थापित हुई); ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (भारतीय शाखा) (1912 में स्थापना); और गोरखपुर में गीता प्रेस (1927 में स्थापना) जैसे प्रकाशकों ने बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों और बंगाल में हिंदी प्रकाशन व्यापार को बहुत बढ़ावा दिया। साथ ही दक्षिण में, कुछ मुद्रण / प्रकाशन घर जैसे 1931 में एलेप्पी में स्थापित विद्यारम्भम प्रेस और बुक डिपो; 1925 में कालीकट में स्थापित के.आर ब्रदर्स ; 1935 में मद्रास में स्थापित प्रसाद मुद्रण और प्रक्रिया, और 1936 में मद्रास में स्थापित वाणिज्यिक मुद्रण ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1932 में स्थापित कलकत्ता में श्री सरस्वती प्रेस द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के लिए छिपी हुई प्रचार सामग्री की छपाई कर आंदोलन में भाग लिया गया।1914 और 1947 के बीच स्वतंत्रता संग्राम में तेजी आने के साथ भारतीय प्रेस ने भी अपनी गति को बनाए रखा, और अधिकांश अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्र प्रेस और प्रिंटिंग के क्षेत्रों में अपने कारखानों को अद्यतन और उन्नत करते रहे।
बेनेट कोलमैन एंड कंपनी(जो द टाइम्स ऑफ इंडिया (The Times of India) और द इलस्ट्रेटेड वीकली (The Illustrated Weekly) के मालिक थे) द्वारा बहु-रंगीन पत्रिकाओं को मुद्रित करने के लिए भारत में पहली रोटार फोटो प्रेस स्थापित की गई थी। लेकिन वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता और ब्रिटिश राज द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के कारण स्थानीय भाषा का प्रेस अंग्रेजी भाषा के प्रेस के साथ तालमेल नहीं बिठा सका।1940 से 1960 तक गोवा में चार से छह प्रिंटर थे, जिनमें से प्रमुख थे जेडी फर्नांडीस, गोमांतक प्रिंटर और बोरकर प्रिंटर। इनके साथ साथ छोटे उद्यमी भी मैदान में शामिल हुए, जिनमें से एक चर्चोरम के एक स्थानीय स्कूल के शिक्षक थे, जिन्होंने 24,000 रुपये के मामूली निवेश के साथ एक प्रेस (बांदेकर ऑफ़सेट (Bandekar Offset)) को शुरू किया।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3vvqpf4
https://bit.ly/3y3Q28l

चित्र संदर्भ
1  पहला प्रिंटिंग प्रेस 1556 में सेंट पॉल कॉलेज (St. Paul’s College), गोवा में स्थापित किया गया जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. र्डिनेंड विसलर Conclusiones Philosophicas प्रति XX। प्रिंसिपिया फिलॉसॉफिका एक्सप्लिकेटे, डिलिंगेन 1665 को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. कलकत्ता, बैपटिस्ट मिशन को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. 1932 में स्थापित कलकत्ता में श्री सरस्वती प्रेस को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



RECENT POST

  • क्या गणित से डर का कारण अंक नहीं शब्द हैं?भाषा के ज्ञान का आभाव गणित की सुंदरता को धुंधलाता है
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:05 AM


  • भारतीय जैविक कृषि से प्रेरित, अमरीका में विकसित हुआ लुई ब्रोमफील्ड का मालाबार फार्म
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 09:57 AM


  • क्या शहरों की वृद्धि से देश के आर्थिक विकास में भी वृद्धि होती है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:49 AM


  • मिट्टी से जुड़ी हैं, भारतीय संस्कृति की जड़ें, क्या संदर्भित करते हैं मिट्टी के बर्तन या कुंभ?
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:49 AM


  • भगवान बुद्ध के जीवन की कथाएँ, सांसारिक दुःख से मुक्ति के लिए चार आर्य सत्य
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:53 AM


  • आधुनिक युग में संस्कृत की ओर बढ़ती जागरूकता और महत्व
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:09 AM


  • पर्यावरण की सफाई में गिद्धों की भूमिका
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:40 PM


  • मानव हस्तक्षेप के संकटों से गिरती भारतीय कीटों की आबादी, हमें जागरूक होना है आवश्यक
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:13 AM


  • गर्मियों में नदियां ही बन जाती हैं मुफ्त का स्विमिंग पूल, स्थिति हमारी गोमती की
    नदियाँ

     13-05-2022 09:33 AM


  • तापमान वृद्धि से घटते काम करने के घण्‍टे, सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाला क्षेत्र है कृषि
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:11 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id