Post Viewership from Post Date to 29-Mar-2022
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
3028 99 3127

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

भारत में बढ़ती घरेलू बगीचों की लोकप्रियता और इससे होने वाले विविध लाभ

जौनपुर

 24-03-2022 07:58 AM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

कितने आश्चर्य की बात है की, हम प्रकृति (भूमि) में केवल एक नन्हे बीज को रोपित करते है, और प्रकृति हमें उसके बदले उसे कई गुना बड़ा करके पेड़ या पोंधे को उपहार स्वरूप दे देती है। शायद यही कारण है की बागवानी पूरे विश्व में एक सार्वभौमिक रूचि के रूप में उभरी है। आपको ऐसे लोग हर तरफ मिल जायेंगे जो घरों में घरेलू पोंधों और फूलों को उगाना बेहद पसंद करते हैं, किंतु क्या आप यह भी जानते थे की यह घरेलू बागवानी न केवल हमें स्वादिष्ट फल-सब्जियां प्रदान करती है, बल्कि यह हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ के लिए भी बेहद लाभदायक होती है।
पौधे मनुष्यों और पशुओं के लिए दवा का एक महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं, और फसलों को बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए जैविक कीटनाशकों के रूप में भी उपयोग किए जाते हैं। दुनिया भर के घरेलू बगीचों में जड़ी-बूटियाँ और औषधीय पौधे उगाए जाते हैं, और विकासशील देशों में लगभग 80% लोग इनका उपयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए और अपनी स्वास्थ्य स्थितियों में सुधार के लिए भी करते हैं। घर के बगीचों में पाए जाने वाले कई पौधों में कुछ औषधीय मूल्य होते हैं और उनका उपयोग कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए किफ़ायती तरीके से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, श्रीलंका में कांडियन उद्यानों के अपने आकलन में 125 पौधों की प्रजातियों में से लगभग 30% का विशेष रूप से औषधीय उपयोग के लिए और लगभग 12% चिकित्सा और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया गया था। युकाटन में जंगलों और बगीचों में पहचाने जाने वाले पौधों की प्रजातियों में से लगभग 70% का औषधीय उपयोग होता था।
2050 तक वैश्विक जनसंख्या के 9 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद के साथ, ही खाद्य उत्पादन और बफर स्टॉक को बढ़ाने की निरंतर आवश्यकता भी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि, साल 2050 में दुनिया की आबादी की औसत दैनिक कैलोरी आवश्यकता को पूरा करने के लिए वैश्विक खाद्य उत्पादन में 70% की वृद्धि की आवश्यकता होगी। ऐसी स्थिति में, दुनिया भर के देश, विशेष रूप से विकासशील देश जहां भूख और भोजन की कमी की व्यापकता अधिक तीव्र है, वहां भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने और खाद्य असुरक्षा और अकाल को रोकने के लिए लोग विभिन्न काउंटर रणनीतियों का सहारा ले रहे हैं। होम गार्डन या घेरलू बगीचे भी इस समस्या का कारगर समाधान बनकर उभरे हैं। दुनिया भर में 35% से अधिक मौतें पोषक तत्वों की कमी के कारण होती हैं। उनमें से, कई कम आय वाले देशों में विटामिन ए की कमी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों और बढ़ते बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करती है। रिपोर्ट में 7 मिलियन से अधिक महिलाओं को विटामिन ए की कमी के कारण जटिलताओं से पीड़ित होने का संकेत मिलता है और अफ्रीका और एशिया में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में 6 से 8% मौतें होती हैं। कुछ देशों में जहां यह समस्या गंभीर है, वहां विटामिन ए की कमी को दूर करने और सब्जियों और फलों के साल भर के उत्पादन की सुविधा के द्वारा आहार की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए घरेलू खाद्य उत्पादन कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (Princeton University) के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, घरेलू सब्जियों की बागवानी न केवल उपज की खपत और शारीरिक गतिविधि को बढ़ा सकती है बल्कि यह बेहतर भावनात्मक स्वास्थ से भी जुड़ी हुई है।
रिपोर्ट में पाया गया है कि 15 दैनिक गतिविधियों में से, जैसे पैदल चलना और बाइक चलाने के साथ ही, सब्जी की बागवानी भी मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक लाभकारी गतिविधियों में से एक है।
भारतीय समुदाय के बीच, एक महिला की एक हरे-भरे घर के बगीचे को बनाए रखने की क्षमता न केवल उसकी कृषि क्षमता को प्रदर्शित करती है बल्कि समाज में उसकी मजबूत स्थिति को भी प्रदर्शित करती है। शोध में पाया गया है की घरेलू बागवानी ने COVID-19 के बाद से लोकप्रियताहासिल की है, क्योंकि इस बीच कई महिलाओं ने होम गार्डनिंग शुरू की है। अन्य अध्ययनों से पता चला है कि, उन स्थितियों में जहां महिलाएं घर में बगीचे बना रही हैं वहां, घरेलू पोषण (विशेष रूप से बाल पोषण) में सुधार हुआ है।
अपनी खुद की सब्जियां उगाना मजेदार होने के साथ-साथ फायदेमंद भी हो सकता है। आपको बस शुरुआत करने की ज़रूरत है। लेकिन अगर आप एक पेशेवर सब्जी माली बनना चाहते हैं तो, आपको सीखना और समझना होगा कि आपके पौधों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए क्या करना पड़ता है।
कुछ सब्जियां जो आप अपने किचन गार्डन में आसानी से उगा सकते हैं उनमें पालक, फूलगोभी, हरी मटर आदि शामिल हैं। एक अच्छी घरेलू बागवानी योजना में सही स्थान का चयन करना, बगीचे के आकार का निर्धारण करना, सब्जियों के प्रकार और किस्मों पर निर्णय लेना शामिल होता है। सब्जियों के चयन में आप निम्नलिखित बातों पर विचार कर सकते हैं:
तरबूज को छोटे बगीचे में नहीं लगाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे बहुत अधिक क्षेत्र की आवश्यकता होती है। खीरे और खरबूजे जैसी अन्य बेल की फसलें हैं, जिन्हें छोटे बगीचों में आसानी से उगाया जा सकता है। यदि आपका बगीचा छोटा है, तो शलजम, मूली और चुकंदर जैसी फसलें जल्दी उपज दे सकती हैं, और इसके लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता नहीं होती है। दूसरी ओर, टमाटर, बुश बीन्स और मिर्च को अधिक स्थान की आवश्यकता होती है और उद्पादन में अधिक समय लेती हैं।
आपको ऐसी सब्जियां लगानी चाहिए जो बाजार में खरीदने के लिए महंगी हों। ब्रोकोली सबसे महंगी सब्जियों में से एक है जिसे ज्यादातर घर के बगीचों में उगाया जा सकता है। साथ ही आप अपने आहार में अधिक विविधता लाने के लिए विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण रूप से आपको ऐसी सब्जियां भी उगानी चाहिए जो आप और आपके परिवार को खाना पसंद हो।

संदर्भ

https://bit.ly/3IqlWxt.
https://bit.ly/3qoG3Wy
https://bit.ly/3tq4TXZ

चित्र सन्दर्भ

1. घर में उगे टमाटरों को दर्शाता एक चित्रण (Housing)
2. महिला किसान को दर्शाता एक चित्रण (PixaHive)
3. टमाटरों की बेलों को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
4. एलिवेटेड वेजिटेबल गार्डन को दर्शाता एक चित्रण (gardenphotos)
5. घड़े में पानी भरती भारतीय महिला को दर्शाता एक चित्रण (flickr)



***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • भगवान बुद्ध के जीवन की कथाएँ, सांसारिक दुःख से मुक्ति के लिए चार आर्य सत्य
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:53 AM


  • आधुनिक युग में संस्कृत की ओर बढ़ती जागरूकता और महत्व
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:09 AM


  • पर्यावरण की सफाई में गिद्धों की भूमिका
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:40 PM


  • मानव हस्तक्षेप के संकटों से गिरती भारतीय कीटों की आबादी, हमें जागरूक होना है आवश्यक
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:13 AM


  • गर्मियों में नदियां ही बन जाती हैं मुफ्त का स्विमिंग पूल, स्थिति हमारी गोमती की
    नदियाँ

     13-05-2022 09:33 AM


  • तापमान वृद्धि से घटते काम करने के घण्‍टे, सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाला क्षेत्र है कृषि
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:11 PM


  • भारतीय नाटककार, प्रताप शर्मा द्वारा बड़े पर्दे पर प्रदर्शित मेरठ की शक्तिशाली बेगम समरू का इतिहास
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     11-05-2022 12:13 PM


  • जलवायु परिवर्तन से जानवरों तथा मनुष्‍य के बीच बढ़ सकता है नए वायरस द्वारा रोग संचरण
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     10-05-2022 09:04 AM


  • वर्ष 2030 में नौकरियों व् कौशल का क्या भविष्य होगा? फ़िल्हाल, शिक्षा में बड़े सुधार की ज़रुरत है
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     09-05-2022 08:50 AM


  • नील नदी में रहने वाले मगरमच्छों से निकटता से जुड़े हैं सोबेक देवता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     08-05-2022 07:41 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id