1789 का जौनपुर डेनियल की नज़र से

जौनपुर

 02-01-2018 04:59 PM
द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना
18वीं सदी एक ऐसा दौर था जब दुनिया कई बदलाओं से होते हुये गुजर रही थी। दुनियाभर में कई नयी खोजें हो रही थी जिन्होने दुनिया की समझ को बदलकर रख दिया। यह वह दौर था जब औद्योगिकिकरण तेजी से अपना पैर फैला रहा था। दुनिया भर के लोग एक देश से दूसरे देश का सफर कर रहे थें। इन्ही में थॉमस और विलियम डेनियल नाम के दो व्यक्ति जो एक नये खोज के साथ भारत घूमने आये। यह खोज थी कैमरा ऑब्सक्युरा। कैमरा ऑब्सक्युरा एक ऐसी खोज थी जिसने वर्तमान काल के कैमरे की खोज को प्रेरणा दी। डेनियल भारत के विभिन्न स्थानों पर गयें तथा वहाँ के इमारतों व अन्य वस्तुओं का चित्रण किये। इसी सफर में वे जौनपुर, जो कि उस काल में सिराज-ए-हिन्द के नाम से प्रसिद्ध था, को देखने आये। यहाँ पर आकर अटाला, शाही किला व गोमती के किनारे का चित्र उन्होंने बनायें। थॉमस और विलियम, चाचा और भतीजे थें तथा वे 1789 में दिसम्बर महीने में जौनपुर आये थे। डेनियल कैमरा ऑब्सक्युरा का प्रयोग करते थे चित्रकारी के लिये। कैमरा ऑब्सक्युरा का आविष्कार इराकी वैज्ञानिक इब्न-अल-हजैन ने करीब 1015-1021 ई. मे किया था। कैमरा आब्स्क्युरा एक छोटे डब्बे या काले कमरे के रूप में होता है जिसमें एक छोटे छेद में एक लेंस लगा हुआ होता है जिससे सामने का चित्र छोटा व उल्टा ऑब्सक्युरा के अंदर बनता है। इसमें आने वाली किरणों के अनुसार किसी एक वस्तु को बढा कर भी दिखाया जा सकता है। उल्टे चित्र को पलट कर सीधा भी किया जा सकता है। यही कारण है कि डेनियल द्वारा बनाये गये सारे चित्र आकार और प्रकार से दोषहीन दिखाई देते हैं। डेनियल द्वारा बनायी गए चित्रों के आधार पर पेरिस के फोटोग्राफर एन्टोनियो मार्टिनेल्ली भारत आये और वे हर उस स्थान पर गये जहाँ से थॉमस और विलियम डेनियल ने चित्र बनाया था। इस प्रकार से समय के साथ हुये बदलाओं के विषय में विषद् जानकारी प्राप्त होती है। एन्टोनियो के इस परियोजना से कैमरा ऑब्सक्युरा के प्रयोग का पता भी चला। 1. https://www.telegraphindia.com/1050705/asp/calcutta/story_4949282.asp 2. https://books.google.co.in/books/about/Voyage_en_Inde.html?id=d6jWAAAAMAAJ&redir_esc=y 3. मार्टिनेल्ली एन्टोनियोः ओरियंटल सीनरीः टू हन्ड्रेड इयर्स ऑफ इंडियाज़ आर्टिस्टिक एण्ड आर्किटेक्चरल हेरिटेज

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