प्राचीन काल से मानव उपचार में किया जा रहा है कीड़ों का उपयोग

जौनपुर

 05-10-2021 03:09 PM
तितलियाँ व कीड़े

कीड़े ऐसे जीव हैं जिनको देख कर अधिकांश लोग घिन करते हैं ऐसे में लोग यह भूल जाते हैं कि इनका योगदान हमारे पारिस्थितिक तंत्र में अत्यंत ही महत्वपूर्ण होता है। भोजन के रूप में शहद, और कपड़ों के लिए रेशम और पौधों के परागण के अलावा, लोग अपने जीवन में कीड़ों के लाभों के बारे में बहुत कम सोचते हैं।दरसल हमारे स्वास्थ्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्से के रूप मेंकीड़ों का हमारी दवाओं में भी उपयोग किया जाता है।जोड़ों की सूजन, गठिया, त्वचा रोग, मल्टीपलस्केलेरोसिस (Multiple sclerosis), कैंसर (Cancer), संक्रमण और दर्द जैसी कई बीमारियों के इलाज के लिए मधुमक्खी के जहर का उपयोग कई हजारों वर्षों से लोक चिकित्सा में किया जाता रहा है।हाल ही में, घाव भरने के लिए शहद के उपयोग की व्यापक समीक्षा की गई है। इन अध्ययनों ने घाव की मरम्मत और संक्रमित घावों की नसबंदी में शहद की प्रभावकारिता का प्रदर्शन किया और आमतौर पर नैदानिक अभ्यास में शहद के उपयोग का समर्थन किया, लेकिन केवल कुछ प्रकार के घावों के साथ और अतिरिक्त नैदानिक परीक्षणों के बाद। शहद पदार्थों का एक जटिल मिश्रण है और कोशिकाओं पर विभिन्न घटकों के कार्यों और मानव रोगों की एक श्रृंखला के उपचार में शहद की प्रभावशीलता को समझने में आणविक स्तर पर प्रगति की जा रही है।न केवल चीन (China) और बाहिया (Bahia) में बल्कि भारत, एशिया (Asia), अफ्रीका (Africa) और मैक्सिको (Mexico) में भी लोक चिकित्सा में कीट स्राव और कीटों का उपयोग किया जाता है।
कीड़े और उनसे निकाले गए पदार्थों का उपयोग बड़ी संख्या में दुनिया भर की संस्कृतियों में औषधीय गुणों के रूप में देखने को मिलता है। चिकित्सा के अलावा यदि देखा जाए तो इन कीड़ों का प्रयोग जादूई गतिविधियों द्वारा बीमारियों के उपचार के तौर पर भी देखने को मिलता है। कीड़ों द्वारा स्वास्थ्य सम्बन्धी उपचारों पर दुनिया भर में कई वैज्ञानिकों ने बेहतर तरीके से शोध आदि किये जिसमें यह पाया गया कि कई प्रकार के रोगों के उपचार में कीड़ों का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जा सकता है, उदाहरण के तौर पर जब हम बात करते हैं तो मधुमेह की बिमारी के दौरान घाव आदि लग जाने पर कीड़ों के जरिये ही इलाज किया जाता है। वर्तमान काल में आज दुनिया भर में कीड़ों के आधार पर कई बीमारियों का उपचार किया जा रहा है और यह एक अत्यंत ही सुलभ उपचार के रूप में निकल कर सामने आया है। आयुर्वेद प्राचीन भारत की चिकित्सा पद्धति पर आधारित एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।आयुर्वेद में दीमक का प्रयोग विशिष्ट और अस्पष्ट दोनों प्रकार की बीमारियों में किया जाता था। दीमक का प्रयोग अल्सर, अनीमिया और आम्वाती जैसे रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता था तथा इसको ही दर्द निवारक के रूप में भी ग्रहण किया जाता था। जेट्रोफा के पत्ते पर पाया जाने वाला एक अन्य कीट भी औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, इस कीट को काट के उबाल कर एक घोल बनाया जाता है और इस घोल के प्रयोग से बुखार, जठरान्त्र आदि जैसी बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। इस प्रकार से हम देख सकते हैं कि भारत में प्राचीन काल से ही कीड़ों का प्रयोग किया जाता जा रहा है। कीड़ों से सम्बंधित उपचार को एंटोमोथेरेपी (Entomotherapy) के रूप में जाना जाता है, इस विधा से प्राचीन और आधुनिक काल में भी इलाज किया जाता है। पारंपरिक रूप से यह माना जाता था कि कई कीड़ों और जीवों के शरीर के कुछ अंग मनुष्यों से मिलते जुलते हैं ऐसे में कई सभ्यताओं में उन कीड़ों का प्रयोग दवा के रूप में किया जाता था जैसे कि मक्सिको (Mexico) में मादा टिड्डों पर प्रयोग किया जाता है।जिसके पीछे का कारण है कि मादा टिड्डों का जिगर मनुष्यों से काफी हद तक मिलता जुलता है।
इसके अलावा भारत और चीन में भी इस प्रकार से कीड़ों से सम्बंधित इलाज अत्यंत ही महत्वपूर्ण हैं।
अब आधुनिक दौर में एंटोमोथेरेपी की बात करें तो इसका प्रयोग कई जीवाणुनाशक आदि दवाओं का निर्माण कीटों के आधार पर ही किया जाता है। भारत के न्येशीऔर गालो जनजाति जो कि अरुणांचल प्रदेश में पाए जाते हैं अपने इलाज के लिए कीड़ों का प्रयोग बड़े पैमाने पर करते हैं। ये जनजातियां गुबरैला आदि का भी प्रयोग स्वास्थ सम्बंधित मामलों के लिए करती हैं।
वहीं मैगॉटथेरेपी (Maggot therapy) एक प्रकार की बायोथेरेपी (Biotherapy) है जिसमें जीवित, कीटाणुरहित मैगॉट्स को गैर-चिकित्सा त्वचा और मानव या अन्य जानवर के कोमल ऊतकों के घावों में शामिल किया जाता है ताकि घाव (क्षय) के भीतर नेक्रोटिक (Necrotic -मृत) ऊतक को साफ किया जा सके और कीटाणुशोधन किया जा सके। साथ ही इस बात के प्रमाण भी मौजूद हैं कि मैगॉटथेरेपी घाव भरने में मदद कर सकती है।मैगॉटथेरेपी पुराने अल्सर में उपचार में सुधार करती है। साथ ही मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति के पैर के अल्सर में लाभ के अस्थायी प्रमाण भी देखे गए हैं।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3FfkrSp
https://bit.ly/3BiEFbK
https://bit.ly/3FeQ3aO
https://bit.ly/3gxvKc7
https://bit.ly/2YkFUrZ
https://bit.ly/3uGDUq7

चित्र संदर्भ
1. पैर के घाव पर मैगॉट डीब्राइडमेंट थेरेपी (maggot debridement therapy) का एक चित्रण (wikimedia)
2. हाथ में दंश देती मधुमक्खी का चित्रण (istockr)
3. मादा टिड्डों का एक चित्रण (flickr)
4. मेडिकल पैकेजिंग में मैगॉट्स कीड़ों का एक चित्रण (wikimedia)



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