चंदन की व्यापक खेती द्वारा चंदन की तीव्र मांग को पूरा किया जा सकता है।

जौनपुर

 29-07-2021 09:33 AM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग. चंदन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग प्रकृति में पाए जाने वाले प्रत्येक पेड़ का अपना एक विशेष महत्व होता है। इसी प्रकार का एक पेड़ चंदन भी है, जो अपनी खूशबू के लिए विश्व प्रसिद्ध है। भारत में इस सदाबहार पेड़ का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है। भारत में चंदन ज्यादातर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में ज्वालामुखी के विशिष्ट क्षेत्रों में उगाया जाता है। आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2011 के अंत तक ज्वालामुखी मंदिर के पास एक वन भूमि पर 3,000 पूर्ण विकसित चंदन के पेड़ हुए और दिसंबर 2018 तक इनकी संख्या 3,998 तक पहुंच गई थी। यह पेड़ 13 से 16 मीटर तक की ऊंचाई तक पहुंच सकता है, जिसकी मोटाई या परिधि 100 से 200 सेंटीमीटर तक हो सकती है। चंदन को उगाने के लिए अच्छी धूप और अच्छी मिट्टी की आवश्यकता होती है। कम पानी में भी यह पेड़ आसानी से उग सकता है।प्राकृतिक रूप से उगाए गए चंदन के पेड़ को कटाई के लिए तैयार होने में 30 साल लगते हैं। हालांकि, जैविक तरीके से यदि इसकी गहन खेती की जाती है, तो 10 से 15 वर्षों में ही अच्छे परिणाम दिखाई दे सकते हैं।
भारी, पीली, खुशबूदार और महीन दाने वाली लकड़ी वाला यह पेड़ आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत मूल्यवान है। चंदन और इसके तेल का उपयोग कॉस्मेटिक उद्योग, दवा उद्योग, सुगंध चिकित्सा, साबुन उद्योग, इत्र आदि में किया जाता है। दुनिया में चंदन की कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई (Australian) चंदन को विशेष रूप से जाना जाता है तथा बाजार में इसका उत्कृष्ट व्यावसायिक मूल्य है। भारत में कर्नाटक चंदन का सबसे बड़ा उत्पादक है, और इसे चंदन की भूमि भी कहा जाता है। यहां चंदन की18 विभिन्न किस्में पायी जाती हैं तथा एक अच्छी गुणवत्ता वाली चंदन की लकड़ी की कीमत 20,000 रुपये किलो तक हो सकती है।
दुनिया भर में कई देशों द्वारा चंदन के पेड़ का उपयोग व्यापक रूप से किया जाता रहा है। हालांकि, वनों की अत्यधिक कटाई और पारिस्थितिक पर्यावरण संरक्षण के कारण वैश्विक प्राकृतिक चंदन की आपूर्ति में तेज गिरावट आई है। भारत जो दुनिया भर में चंदन का सबसे बड़ा निर्यातक था, अब पूरी तरह से चंदन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा है। इससे स्रोतों की और अधिक कमी हो गई, और चंदन की अंतरराष्ट्रीय कीमत में तेजी से वृद्धि हुई है। चीन (China), अमेरिका (USA), फ्रांस (France), रूस (Russia), मध्य पूर्व (Middle East), जापान (Japan) आदि ऐसे देश हैं, जहां चंदन की अंतरराष्ट्रीय कीमत में वृद्धि हुई है। यूरोप (Europe) और अमेरिका (America) ने संभवत: चंदन की विश्व आपूर्ति के 75% हिस्से पर कब्जा कर लिया है। चीन सालाना अपने इत्र और औषधीय उपयोग के लिए विदेशों से दस अरब रिंजिट (Ringgit) से अधिक चंदन आयात करता है।
इस प्रकार हम देख सकते हैं कि चंदन के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार बहुत बड़ा है, और यह एक बड़ा अवसर है, जब चंदन के बागान में निवेश किया जा सकता है। चंदन के पेड़ की अत्यधिक कटाई के खतरे को कम करने के लिए भारत सरकार ने इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। 2002 तक व्यक्तिगत रूप से चंदन उगाने पर प्रतिबंध लगा हुआ था, जिसके कारण चंदन की अवैध तस्करी को बढ़ावा मिला और चंदन के लगभग 90% पेड़ों को नुकसान पहुंचा। भारत के विभिन्न राज्यों में चंदन उगाने पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस कीमती लकड़ी की मांग बहुत अधिक हो गई है। हालांकि, कुछ राज्यों ने इन पेड़ों को उगाने से प्रतिबंध हटा लिया है। इन राज्यों में चंदन के पेड़ लगाने पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इन पेड़ों को सरकार से अनुमति लेने के बाद ही काटा जा सकता है। इसकी लकड़ी को काटना और, इस्तेमाल करना तथा उसे खुले बाजार में बेचना अवैध है। निजी रूप से उगाए गए चंदन के पेड़ को काटने से पहले राज्य के वन विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता होती है।
चंदन जहां अपने आर्थिक मूल्य के लिए उत्कृष्ट है, वहीं यह विभिन्न धर्मों में सांस्कृतिक रूप से भी अत्यधिक मूल्यवान है। हिंदू धर्म में चंदन को बहुत पवित्र माना जाता है, तथा इसका उपयोग पूजा के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंदन के पेड़ में देवी लक्ष्मी का निवास होता है। इसकी लकड़ी को पीसकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग विभिन्न अनुष्ठानों और समारोहों में किया जाता है। हिंदू धर्म और आयुर्वेद में, चंदन को एक ऐसा साधन माना जाता है, जो ईश्वर को हमारे करीब ला सकता है। बौद्ध परंपराओं में भी चंदन को विशेष महत्व दिया गया है। पाली कैनन (Pāli Canon) के विभिन्न सूत्रों में चंदन का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि चंदन की खुशबू ध्यान लगाने और इच्छाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है। जैन धर्म में भी चंदन विशेष महत्व रखता है।जैन धर्म में चंदन और केसर को मिलाकर बनाए गए पेस्ट को जैन देवताओं की पूजा के लिए उपयोग में लाया जाता है। जैन धर्म में दाह संस्कार समारोहों के दौरान मृत शरीर को चंदन की माला पहनाई जाती है। सूफी परंपरा में, सूफी संतों की कब्र पर चंदन के पेस्ट का उपयोग किया जाता है। पूर्वी एशिया (Asia) में, पूजा और विभिन्न समारोहों में अगर वुड (Agarwood) के साथ चंदन का उपयोग किया जाता है। कोरियाई (Korean) शमनवाद में, चंदन को जीवन का पेड़ माना जाता है।
चंदन के सांस्कृतिक और आर्थिक मूल्य के कारण इसका संरक्षण अत्यधिक आवश्यक है। यदि इसका संरक्षण नहीं किया जाता है, तो इसके अत्यधिक दोहन और अवैध तस्करी की सम्भावना बहुत अधिक बढ़ सकती है, जिससे इसके विलुप्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।अन्य देशों में चंदन को बड़े पैमाने पर उगाया जा रहा है और इनका स्वतंत्र रूप से निर्यात किया जा रहा है। भारत में यदि चंदन के पेड़ों की अप्रतिबंधित कटाई और व्यापक खेती को बढ़ावा दिया जाए, तो चंदन की तीव्र मांग को पूरा किया जा सकता है और इसकी सुरक्षा से सम्बंधित खतरे को भी कम किया जा सकता है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3eVtgVU
https://bit.ly/3BKQpnE
https://bit.ly/3i3lWJH
https://bit.ly/3y87V35

चित्र संदर्भ
1. चंदन लकड़ी के टुकड़ों का एक चित्रण (flickr)
2. चंदन के पौधे का एक चित्रण (wikimedia)
3. भगवान गणेश की चंदन की नक्काशीदार मूर्ति का एक चित्रण (wikimedia)



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