विटामिन-सी. मानव शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद पोषक तत्व

जौनपुर

 26-06-2021 10:57 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

शरीर को सेहतमंद बनाए रखने के लिए, पोषक तत्वों की भूमिका से हम सभी भली- भांति परिचित हैं। लेख में आगे हम शरीर के लिए बेहद ज़रूरी पोषक तत्व, विटामिन- सी की विशेषताओं को जानेंगे। विटामिन-सी कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक सफेद ठोस कार्बनिक यौगिक है। यह चीनी के शुद्धतम रूप डेक्सट्रोज (dextrose) से कृत्रिम तौर पर भी प्राप्त किया जाता है। इसका उपयोग प्रायः विटामिन पूरक या खाद्य परिरक्षक के रूप में किया जा सकता है। खट्टे पदार्थों अथवा फलों में विटामिन-सी का स्तर उच्च होता है। चूँकि मानव शरीर इसका स्वयं उद्पादन करने में सक्षम नहीं होता, इसलिए हम इसे अपने भोजन के माध्यम से या, कई विटामिन युक्त मल्टीविटामिन ए गोली या टैबलेट ले कर प्राप्त कर सकते हैं। यह सर्दी को ठीक कर सकता है और हमें स्वस्थ रखने में सहायक होता है, यही कारण है कि बीमार पड़ने पर डॉक्टर अथवा हमारे माता-पिता द्वारा हमें विटामिन-कि युक्त दवाइयों एवं फलों जैसे, संतरे का सेवन करने के लिए कहा जाता है, क्यों की खट्टे फलों में यह प्रचुरता से पाया जाता है।
हमारे शरीर में यह एंटीऑक्सिडेंट (antioxidant) का काम करता है, अर्थात यह रासायनिक रूप से मुक्त कणो को बाँधकर रखता है और हमारे ऊतक पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को भी कम कर देता है, साथ ही यह हड्डियों, दांतों, रक्त वाहिकाओं, मसूड़ों और स्नायुबंधन के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए अति महत्त्वपूर्ण है। यह शरीर के भीतर प्रोटीन कोलेजन का भी निर्माण करता है, जो की हमारे आंतरिक अंगों के समुचित कार्य को संतुलित रखता है। विटामिन-सी की खोज, "स्कर्वी" (scurvy) नामक एक बीमारी के प्रसार के साथ हुई, इस बीमारी में मसूड़ों के नीचे से रक्तस्राव होने लगता है। स्कर्वी शब्द की उत्पत्ति 'स्कॉर्बुटस' (लैटिन) , 'स्कोरबुट' (फ्रेंच) और 'स्कोरबुट' (जर्मन) में हुई थी। यह रोग मुख्य रूप से दुनियाभर की नौसेनाओं के लिए बेहद आम समस्या था। एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में लगभग 20 लाख नाविक इस रोग से प्रभावित थे, अतः इसके उपचार स्वरुप 1747 में, जेम्स लिंड (James Lind) ने, स्कर्वी ग्रस्त 12 नाविकों के लिए छह अलग-अलग उपचारों पर काम किया। उन्होंने पाया की केवल संतरे और नींबू स्कर्वी रोग के विरुद्ध असरदार थे। पानी के साथ-साथ 1845 में यह रोग धरती पर आयरलैंड में 'महान आलू अकाल' के दौरान भी फैला। मनुष्यों के विपरीत कई जानवर स्वयं में विटामिन-सी का संश्लेषण करने में सक्षम हैं। 1928 में वैज्ञानिक अल्बर्ट सजेंट-ग्योर्गी (Albert Szent-György) ने सर्वप्रथम अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal glands) से एक पदार्थ को अलग किया, जिसे उन्होंने 'हेक्सुरोनिक एसिड' (hexuronic acid) नाम दिया। इसके चार साल बाद, चार्ल्स ग्लेन किंग (Charles Glenn King) ने अपनी प्रयोगशाला में पहली बार विटामिन-सी को प्रथक करने पर यह निष्कर्ष निकाला कि यह 'हेक्सुरोनिक एसिड' जैसा ही था। 1933 में नॉर्मन हॉवर्थ (Norman Haworth) ने पहली बार विटामिन-सी की रासायनिक संरचना से अवगत कराया। इस विटामिन की कमी से स्वास्थ्य सम्बंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे- सूखी और क्षतिग्रस्त त्वचा, आसानी से चोट लगना, घावों का धीमा उपचार आदि। विटामिन सी, जिसे एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic acid) भी कहा जाता है, सबसे प्रभावी पोषक तत्वों में से एक है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, साथ ही आपके शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली की कमी, हृदय रोग, प्रसव पूर्व स्वास्थ्य समस्याओं और यहाँ तक ​​कि त्वचा की झुर्रियों से भी बचाता है। यह विटामिन घाव भरने, कार्टिलेज, हड्डियों और दांतों की मरम्मत जैसे कई जैविक कार्यों को भी कुशलता से पूरा करता है।
प्रायः यह खट्टे फलों में प्रचुरता से पाया जाता है, किंतु इसे हम कुछ स्वाद में भिन्न फलों से भी प्राप्त कर सकते हैं।
स्ट्रॉबेरी: यह अपनी सुगंध, चमकीले रंग और मीठे स्वाद के लिए जानी जाती है। परंतु प्रत्येक 100 ग्राम स्ट्रॉबेरी में 59 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, जो कि 100 ग्राम संतरे से अधिक होता है।
अमरूद:  प्रायः अमरुद की कई किस्में प्रचलित हैं, जैसे पीले फल वाले चेरी अमरूद, स्ट्रॉबेरी अमरूद और लाल सेब अमरूद। अमरूद में विटामिन-सी की प्रचुर मात्रा होती है। किसी 100 ग्राम अमरूद में 228 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, जो अन्य फलों की तुलना में काफ़ी अधिक होता है।
अनानास: अपने अद्वितीय स्वाद के साथ ही यह महत्त्वपूर्ण विटामिन और खनिजों का एक अच्छा स्रोत है। यह 48mg के साथ विटामिन-सी के सबसे समृद्ध स्रोतों में से एक है और इसमें रोग से लड़ने वाले एंटीऑक्सिडेंट (antioxidants) भी होते हैं।
आम: यह स्वादिष्ट फल सर्वाधिक पसंद किये जाने वाले फलों में से एक है, जो विटामिन-सी के अच्छे स्रोतों में से एक है। इसमें प्रति 100 ग्राम में 36 मिलीग्राम विटामिन सामग्री होती है। आम को कच्चा या मैंगो शेक के रूप में अथवा फलों के सलाद के रूप में खाया जा सकता है। हमारा शहर जौनपुर विशेष रूप से आम की विभिन्न किस्मों के उद्पादन के लिए प्रसिद्ध है। स्वाद और सेहत के गुणों से भरपूर इन स्वादिष्ट आमों का निर्यात देश के विभन्न हिस्सों में होता है। क्या हम अधिकांश हिस्सा लखनऊ, दिल्ली, मुंबई आदि के समृद्ध जिलों में निर्यात करते हैं? यह आज महामारी के चलते विचार करने योग्य है, क्योंकि हमें जौनपुर निवासी के स्वास्थ्य के बारे में भी चिंतित होने की आवश्यकता है।

संदर्भ

https://bit.ly/2SYWiwi
https://bit.ly/3xSyXLn
https://bit.ly/3xPZwAS
https://bit.ly/2UDxGtp
https://bit.ly/2SoS5By

चित्र संदर्भ
1. विटामिन-सी युक्त फलों का एक चित्रण (flickr)
2. दवा की दुकान पर विटामिन सी की खुराक का एक चित्रण (wikimedia)
3. हमारे शरीर में विटामिन सी के बंटवारे का एक चित्रण (researchgate)



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