क्‍या है विशालकाय सब्‍जियों के पीछे का विज्ञान?

जौनपुर

 21-06-2021 07:34 AM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें साग-सब्जियाँ

सब्जियां हमारे भोजन का अभिन्‍न अंग हैं, विश्‍व में भांति भांति की सब्जियां उगायी जाती हैं। जो रंग, रूप, आकार, एवं स्‍वाद में भिन्‍न भिन्‍न होती हैं। कई बार आपने सामान्‍य आकार से भिन्‍न या विशाल आकार की सब्जियां देखी होंगी। एक 50 किलो गोभी या एक ऐसे कद्दू की कल्‍पना करें जो प्रत्‍येक दिन 12 किलो बढ़ता हो।ये विशाल सब्जियां स्‍वत: या अकस्‍मात ही नहीं उग जाती हैं इनके लिए विशेष योजना एवं देखभाल की आवश्‍यकता होती है।जौनपुर शहर भी अपनी नेवार प्रजाति की मूली के लिए प्रसिद्ध है जो कि चार से छह फीट तक लंबी होती है। इस प्रकार की विशालकाय सब्जियां उगाने वाले किसान आपस में प्रतियोगिता भी करते हैं। जिसके माध्‍यम से उनका प्रोत्‍साहन बढ़ने के साथ साथ ज्ञान का आदान प्रदान भी होता है।यदि आप बृहद्काय सब्जियां उगाने के आदि हैं तो अपने स्‍थानीय मेलों में भाग लें और अपने प्रतियोगियों से बात करें। उनमें से कुछ संकोची होंगे लेकिन कई अपने ज्ञान के साथ बहुत खुले और उदार होंगे और आपके साथ खुशी से अपनी तकनीक पर चर्चा करेंगे। ब्रिटेन (Britain) के विशाल-सब्जी उत्पादकों के लिए, 2020 एक विंटेज (vintage) वर्ष था। सितंबर में इस साल के ग्रो शो दौरे (Grow Show tour ) पर तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए गए: दुनिया की सबसे भारी लाल गोभी (31.6kg), दुनिया का सबसे लंबा सेलसीफी (salsify) (5.6 मीटर) और दुनिया का सबसे लंबा चुकंदर (8.6 मीटर)। हैपशायर (Hampshire) के लिमिंगटन (Lymington ) के इयान (Ian) और स्टुअर्ट पाटन (Stuart Paton) ने यूके (UK) के सबसे भारी कद्दू को उगाया, जिसका वजन 1,176.5 किलोग्राम था।
लंबे समय तक, विशाल-वनस्पति उत्पादकों ने अपनी रूचि को गंभीरता से लेने के लिए संघर्ष किया। मुख्य बागवानी शो में, सब्जी उत्पादक दो श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करते हैं: "गुणवत्ता" सब्जी श्रेणियां और विशाल-वनस्पति प्रभाग। क्वालिटी-वेजिटेबल लॉट (quality-vegetable lot ) में विशाल-सब्जी उत्पादकों के बारे में बताया जा सकता है की ये विशाल-सब्जी उत्पादक पैसे के लिए नहीं, बल्कि प्रसिद्ध‍ि के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं: हालांकि अमेरिका (America) में विशाल-कद्दू का प्रदर्शन अधिक आकर्षक होता है, ब्रिटेन में शायद ही कोई 50 पौंड या इससे अधिक पुरस्कार राशि में जीतता है। आप बृहद्काय सब्जियां कभी खा नहीं सकते हैं। कौन 30 फीट गाजर खाना चाहता है? यह बहुत ही सख्‍त होगा। (ज्यादातर समय, सब्जियों को स्थानीय किसानों द्वारा जानवरों के चारे के लिए, या चटनी में उपयोग किया जाता है।) प्रसिद्धि‍ के साथ बृहद्काय सब्जी उगाने वाले अपने आनंद के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इस प्रकार की सब्‍जियों को उगाने के लिए विशेष प्रशिक्षण, गहन पूर्व तैयारी, और बहुत सारे धैर्य की आवश्‍यकता होती है।यदि आप इस प्रकार की सब्‍जी उगाने का सोच रहे हैं तो इससे पूर्व कुछ शोध करें और तय करें कि आप किस बृहद्काय सब्‍जी की किस्म को उगाना चाहते हैं। इन सब्‍जियों को उगाने के लिए निम्‍न बिंदुओं को ध्‍यान में रखा जा सकता है:
सही बीज का चयन: एक बृहद्काय फल, फूल या सब्‍जी को उगाने के लिए दुर्लभ बीज की तलाश होती है।आप आरंभ करने के लिए निम्‍न में से कुछ बीजों का चयन कर सकते हैं:
कद्दू: अटलांटिक बृहद्काय कद्दू (Atlantic Giant Pumpkin) (लगभग 200 से 400 किग्रा)
स्क्वैश: शो किंग जाइंट ग्रीन स्क्वैश (Show King Giant Green Squash) (लगभग 200 किग्रा)
सूरजमुखी: धूसर धारी वाले बृहद्काय सूरजमुखी (Grey Stripe Giant Sunflower) (2-फुट ऊँचा)
टमाटर: पुराना कॉलॉसस हीरलोम टमाटर (Old Colossus Heirloom Tomato) (लगभग 1 किग्रा)
तरबूज: कैरोलिना क्रॉस (विशाल) तरबूज (Carolina Cross (Giant) Watermelon) (लगभग 90 किग्रा)
गोभी: उत्तरी बृहद्काय गोभी (Northern Giant Cabbage) (लगभग 45 किग्रा)
गाजर: जापानी शाही लंबी गाजर (Japanese Imperial Long Carrot) (12+ इंच लंबी)
ककड़ी: बृहद्काय जैपेलिन ककड़ी (Mammoth Zeppelin Cucumber) (लगभग 7 किग्रा)
लौकी: बृहद्काय लंबी लौकी (Giant Long Gourd) (120 इंच)
प्याज: केल्‍सी मीठा बृहद्काय प्याज (Kelsae Sweet Giant Onion) (लगभग 6 किग्रा)
काली मिर्च: उच्‍च वजनदार संकर काली मिर्च (Super Heavyweight Hybrid Pepper) (लगभग 2.2 ग्राम)
बड़ी सब्जियों को उगाने का एक अन्य विकल्प के रूप में आप अपने द्वारा उगायी गयी सबसे बड़ी सब्‍जी के बीज को चुन सकते हैं, हालांकि यह संकर के साथ काम नहीं करते हैं।
उर्वरक: इस प्रकार की सब्‍जियों को उगाने के लिए पोषक तत्‍व से भरपूर सूखी मिट्टी की आवश्‍यकता होती है, सर्दियों से पहले नाइट्रोजन के साथ-साथ अधिक से अधिक कार्बनिक पदार्थों को मिलाकर मिट्टी को संशोधित किया जाना चाहिए। वसंत ऋतु में, मिट्टी की गहराई से खुदाई करें, विशेष रूप से अगर गाजर जैसी कंदमूल सब्जियां उगा रहें हैं, इन्‍हें अपनी जड़ों के विकास के लिए बहुत ढीली मिट्टी की आवश्यकता होती है।रोपाई से पहले मिट्टी में खाद मिलाएं, यदि आप अपनी सब्‍जी के प्रति संजिदा हैं तो इसे उगाने से पहले मिट्टी का परीक्षण कराएं और किसी भी पोषक तत्व और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी की भरपाई करें। बृहद्काय सब्जियां जल्दी से उगने की प्रवृत्ति रखते हैं, इसलिए उन्हें बहुत सारे पोषक तत्‍व की आवश्यकता होती है।
रूपाई के समय पर डाले गए धीमी गति से कार्य करने वाले जैविक उर्वरक तब कार्य करते हैं जब पौधों को भोजन की आवश्‍कता होती है। यह मिट्टी को स्वस्थ रखेगा और इससे कीट की समस्याएं दूर होंगी।यदि आप कद्दू या टमाटर का चयन करते हैं तो इसके लिए आपको उर्वरक के रूप में पोटेशियम (Potassium) और फास्फोरस (phosphorus) की उच्‍च मात्रा की आवश्‍यकता होगी वहीं यदि आप गोभी जैसी पत्तेदार सब्जी उगाते हैं, तो आपको उच्च नाइट्रोजन (Nitrogen) की आवश्‍यकता होगी।बड़े कद्दू, स्क्वैश और तरबूज की किस्मों को सप्ताह में एक बार तरल उर्वरक की आवश्यकता होती है, जबकि छोटी जड़ वाली फसलों को इस प्रकार के नित्‍य पोषण की थोड़ा कम आवश्यकता होती है।बृहद्काय सब्जियों को पानी की उच्‍च मात्रा की आवश्‍यकता होती है। सामान्‍य सब्‍जियों की तुलना में इसमें अधिक गहराई तक पानी डालना होगा, अत्‍यधिक गीली मिट्टी से भी सब्जियां खराब हो सकती हैं। अत: सिंचाई में संतुलन बनाए रखें। कीट और बीमारियां पौधों में तीव्रता से बढ़ती हैं औ रपूरी फसल को बर्बाद कर सकती हैं, खासकर जब फल लगना प्रारंभ हुआ ही हो । अपने पौधों की रोजाना जांच करें और किसी भी समस्या का तुरंत उपचार करें। कोशिश करें कि खराब हिस्‍से को हाथ से हटा दें, क्योंकि रसायनों का उपयोग पौधे के विकास को बाधित कर सकता है।
हमारे जौनपुर शहर में उगले वाली विश्‍व प्रसिद्ध मू‍ली के लिए यहां का वातावरण सबसे प्रमुख है। इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गोमती नदी सिचांई हेतु पर्याप्‍त पानी उपलब्‍ध कराती है।यहां की मूली जब दूसरे जिलों में जाती है तो उसे देखने के लिए भीड़ लग जाती है।
लोग इस मूली को उपहार के रूप में देते हैं। किंतु हर गुजरते वक्‍त के साथ इस मूली के प्रति किसानों का रूझान घटता जा रहा है जिसके परिणामस्‍वरूप जो पहले 15 से 17 किलो तक वजन की होती थी आज 5 से 7 किलो तक में सिमट गयी है। इस मूली की खेती कुछ विशेष क्षेत्रों में ही होती थी, उसमें से अधिकांश क्षेत्र में मकान बना दिए गए हैं। जिस कारण जगह सिमट गयी है। इस प्रकार की मूली को लगाने के लिए विशेष परिश्रम और देखरेख की आवश्‍यकता होती है, किंतु किसानों को इसकी उचित लागत एवं अपेक्षित प्रोत्साहन न मिलने के कारण, इनका इसके प्रति रूझान कम हो गया।वहीं अब किसान कम समय में ज्यादा सब्जियां उत्पादन देने वाली फसल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।किसानों का कहना है कि इस मूली की फसल की देखभाल बच्चों की तरह करनी पड़ती है किन्तु बाजार में आने के बाद इसकी मूल लागत मिलना भी कठिन हो गया। प्रारंभ में कृषि विभाग व अन्य संस्थायें इसके लिए किसानों को पुरस्कृत कर उनका उत्साह बढ़ाने का काम करती थी किंतु इन संस्थाओं का रुझान भी खत्म होने लगा है, परिणामस्‍वरूप किसानों ने मूली की खेती पर विशेष ध्‍यान नहीं दिया जिससे इसका आकार तथा वजन कम होकर 7 किलो तक सिमट गया।

संदर्भ:
https://bit.ly/3zwyqQT
https://bit.ly/3zyFDzM
https://bit.ly/3iJNYLh
https://bit.ly/3xnXjMQ
https://bit.ly/3wxFmeO

चित्र संदर्भ
1. बृहद्काय मूली का एक चित्रण (Prarang)
1. ग्रो शो दौरे के दौरान विशालकाय गोभी का एक चित्रण (canna)
2. विशाल सब्जियां, अलास्का राज्य मेला, पामर का एक चित्रण (flickr)
3. विशालकाय मूली के साथ खड़े व्यक्ति का एक चित्रण (Prarang)



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