कला. संकट के समय एक प्रेरणा का स्रोत है

जौनपुर

 09-06-2021 09:59 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

"एक तस्वीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है" यह कथन वैश्विक इतिहास में ढेरों अवसरों पर सार्थक हुआ है। अर्थात यदि हम किसी भी ऐतिहासिक छवि अथवा चित्रकारी को देखें, हर चित्रकारी अपने समय में हुई घटनाओं और अवसरों की प्रस्तुति करती है। जहाँ तस्वीरों में हम विश्व युद्ध के दौरान हुई तबाही के पीछे छुपे दर्द को महसूस कर सकते हैं, वही अनेक चित्रकलाओं में मुग़ल कालीन दौर के विलासिता पूर्ण जीवन को देख सकते हैं। वर्तमान में देखा जाए तो अनेक चित्रकार अपनी कला के माध्यम से कोरोना महामारी के मार्मिक परिदृश्य को प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी प्रकार कला ने मानव इतिहास में घटी अन्य आपदाओं के समय भी मानवता का मार्गदर्शन किया, साथ ही हमें ढांढस भी बधाया है। लेख में आगे हम कोरोना काल में कला की भूमिका को समझेंगे।
दुनिया में कोरोना महामारी के विस्तार के साथ ही, कई विद्वान यह खोजने में लग गए, कि आज से पूर्व जब भी इस प्रकार की आपदाएं आई, तब लोगों ने किस प्रकार आपदाओं और क्वारंटाइन अवधि का सामना किया। अध्ययनों से विद्वानों ने यह पता लगाया की चित्रकला को लंबे समय से त्रासदी और अनिश्चितता का सामना करने के लिए प्रयोग किया गया है। विश्व इतिहास में 14 वीं शताब्दी के मध्य समय को "द ब्लैक डेथ" के नाम से भी जाना जाता है, क्यों की यह ऐसा समय था जब प्लेग(Plague) (एक जानलेवा बीमारी) बेहद आम हो गयी थी, कुछ समय शांत रहने के बाद 18 वीं शताब्दी में इसने फिर से कोहराम मचाना शुरू कर दिया (विशेष तौर पर यूरोपीय देशों में )। यूरोप के देशों में धार्मिक स्थलों पर ऐसी अनेक चित्रकलाएं हैं, जिनमे तत्कालीन (Plague) परिस्थितियों को चित्रित किया गया है।
इन चित्रकारियों में प्लेग संक्रमित मरीज़ को भोजन देने और सामाजिक दूरियों का पालन करने अथवा न करने के मुद्दे दर्शाए गए हैं। विशेषज्ञों को इन चित्रकारियों से आपदा के दौरान कला (पेंटिंग) की भूमिका को समझने का अवसर मिला, उन्होंने पाया कि किसी भी संकट के समय लोग अपनी भावनाओं और हालातों को किसी ऐसे माध्यम से देखना पसंद करते हैं, जो आकर्षक हो और दिल को छू लेती हो। अर्थात कला (पेंटिंग) में यह क्षमता थी कि वह लोगों की मनोदशा को प्रस्तुत कर सके. इसलिए कला आपदा और प्लेग के समय की वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करती हैं, और यह लोगों को संकट के समय मनोवैज्ञानिक रूप से सांत्वना दे सकती हैं। दुःख के समय में हमें भी यह सुनना अधिक साहस देता है कि, “मैने भी उस दौर को देखा है जिससे तुम गुजर रहे हो” - इन शब्दों को पेंटिंग बार-बार दोहराती थी, जिनमे संकट का सामना कर रहे लोगों को चित्रित किया गया था। यूरोप कि विभिन्न कला प्रदर्शनियों में शामिल प्राचीन चित्रकारियों में यह पाया गया कि, उन चित्रकारियों में प्लेग ग्रसित लोगों और शवों कि तुलना में ऐसी पेंटिंग अधिक थी, जो पीड़ितों कि देखभाल करने का आग्रह करती थी। यहाँ तक कि प्रदर्शनी में शामिल एक चित्रकला का शीर्षक ही "होप एंड हीलिंग" (Hope and Healing) था। इससे एक तथ्य और स्पष्ट हो जाता है कि "संकट के समय लोग विभिन्न प्रेरणा स्रोत की खोज करते हैं और चित्रकलाओं को ऐसे ही प्रेरणा स्रोत के तौर पर बनाया गया था। आज जबकि पूरा विश्व कोरोना महामारी कि चपेट में है तब हम इन ऐतिहासिक प्रसंगों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। लॉकडाउन ने हमारी शारीरिक गतिविधियों को सीमित कर दिया है, परंतु हमारा मस्तिष्क नकारात्मक विचारों के साथ भागा जा रहा है। ऐसे संकट के समय में चित्रकला अहम भूमिका निभा सकती है, पहले कि तुलना में आज हमारे पास सोशल मीडिया जैसे माध्यम है- जिसकी सहायता से तस्वीरों में हम उन लोगो को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, जो हमारे ही जैसे बन्धनों का सामना कर रहे हैं। साथ ही कई ऐसे कलाकार भी है, जो अपनी कला को ऑनलाइन माध्यम से साझा कर रहे हैं। सौभाग्य से इनमे से अधिकतर सकारात्मक है जैसा करना जरूरी भी हैं, क्यों इस भयावह संकट के समय किसी भी प्रकार की नकारात्मकता हमारे मन में डर की भावना को और अधिक मजबूत कर सकती है। आज हम ऑनलाइन आर्ट गैलरी लगाने में सक्षम है, सौभाग्य से इन आर्ट दीर्घाओं (गैलरी) में ऐसे ढेरों सकारात्मक चित्र प्रस्तुत किये जा रहे हैं, जो पीड़ितों को साहस बधा रहे हैं और सेवा कर्मियों (डॉक्टर, नर्स इत्यादि) को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
कई चित्र जो ऑनलाइन वायरल हो रहे हैं उनमें से अधिकांश डॉक्टरों और नर्सों के हैं, जिनमे उन्हें योद्धा के तौर पर दिखाया गया है और कई अन्य पेंटिंग ऐसी भी हैं जिसमे धैर्य तथा साहस से भरे मरीजो (कोरोना पीड़ितों) को महामारी से लड़ते हुए दिखाया गया है। अतः यह तय है कि कला लोगों को मनोवेज्ञानिक स्तर (विशेष रूप से संकट के समय) पर मजबूत करती है, और चिकित्सकों को निरंतर काम करने के लिए प्रेरित कर रही है। देखा जाये तो महामारी ने, कला क्षेत्र पर इंटरनेट कि वजह से पछले सभी युगों कि तुलना में सकारात्मक प्रभाव डाला है। कई छोटे बड़े कलाकार अपनी कलाओं का ऑनलाइन प्रदर्शन कर रहे हैं, और लाभ भी कमा रहे हैं। महामारी ने कलाकारों द्वारा अपनी कला को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने और बेचने में सक्षम भी बनाया है।

संदर्भ
https://bit.ly/3yWWjRz
https://bit.ly/3g7mNqS
https://go.nature.com/2SazAAD
https://bit.ly/3piIngf

चित्र संदर्भ
1. कोरोना से जूझते डॉक्टरों का एक चित्रण (Youtube "SRIDHAR'S DRAWING BOOK")
2. जोस लिफ़ेरिनक्स - प्लेग स्ट्रीक के लिए सेंट सेबेस्टियन इंटरसेडिंग का एक चित्रण (wikimedia)
3. कला के जरिये कोरोना महामारी के दौरान जागरूकता फ़ैलाने का एक चित्रण (wikimedia)


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