शास्त्रीय भारतीय नृत्य की तीन श्रेणियां है नृत्त, नृत्य एवं नाट्य

जौनपुर

 06-05-2021 09:32 AM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

भारत में रंगमंच की उत्पत्ति का स्त्रो त नाट्यशास्त्रो को माना जाता है, यह भारतीय संस्कृशति में रंगमंच और नृत्य की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। नाट्यशास्त्रा की रचना भरत नाम के मुनि द्वारा की गयी थी,माना जाता है कि इन्हेंन नाट्य की शिक्षा भगवान ब्रह्मा जी द्वारा दी गयी थी। नाट्यशास्त्र संभवतः दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे व्यापक रंगमंच और नृत्य की कृति है, और यह आज भी भारत में रंगमंच और नृत्य के शास्त्रीय रूपों की नींव रखती है।नृत्य शरीर के विभिन्नी अंगों की गतिविधि, मुख और नयनों के माध्यहम से भावों की अभिव्यिक्त्ति का संयोजन है। यह सदियों से चली आ रही एक पारंपरिक गतिविधि है, जिसमें संगीत के साथ धार्मिक, पौराणिक कथाओं या इनसे संबंधित पात्रों या शास्त्री य साहित्य से संबंधित विषयों को विस्ताकर से प्रस्तु त किया जाता है।नृत्यश को वास्तसव में तीन श्रेणियों क्रमश: नृत्ता, नृत्य और नाट्य में विभाजित किया गया है। आईये इनको विस्तार में समझें:

नृत्ति:
भावाभिनयहीनं तु नृत्तजमित्ययभिधीयतेअभिनय
और भाव रहित नृत्तयन को नृत्तस कहा जाता है। ताल और लय के साथ शुद्ध नृत्तनन क्रिया को नृत्तत कहा जाता है।नृ्त्तम अर्थात शुद्ध नृत्य, जिसमें शरीर की सुंदर गतिविधियों के माध्यम से लय की प्रस्तुति की जाती है। यह हमेशा उन मनोदशा, भाव और रस को दर्शाता है, जो नृत्य के लिए गाए जाने वाली रचनाओं में अंतर्निहित होते हैं। यह अपने शुद्ध सौन्दधर्य के लिए महत्वपूर्ण है। नृत्त् की प्रस्तुति चेहरे के भावों पर जोर नहीं देती है। इसमें कदमों की प्रस्तुसति की प्रमुखता होती है। इसमें ताल और समय के बीच तालमेल के लिए लय और ताल प्रमुख मार्गदर्शक कारक होते हैं। अभिनय दर्पण रस भाव को उद्घाटित किए बिना शारीरिक गतिविधियों के रूप में नृ्त्य को परिभाषित करता है।

नृत्य:
रस भाव व्यंकजनादियुक्तंप नृत्यंप मितीयते

रस भाव व्यंकजन युक्तं नर्त्त‍न क्रिया नृत्यस कहलाती है। नृत्यव के अंतर्गत ताल लय पर अंग संचालन के साथ भाव का समन्व य होता है। जब नाट्य और नृत्तव दोनों मिलते हैं तो यह नृत्यच बन जाता है अर्थात किसी भी शब्दह का अभिनय जब ताल और लय के साथ किया जाता है तो वह नृत्यृ कहलाता है।नृत्यि कदमों का कार्य और अभिनय का संयोजन होता है। यह रस और मनोवैज्ञानिक अवस्था से संबंधित है। हस्तन, अंग, भौंह, होंठ आदि से संबंधित अंगिका अभिज्ञान नृ्त्य में बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। यह नृत्य के व्याख्यात्मक पहलू को भी दर्शाता है जहां हाथ के इशारे और चेहरे के भाव प्रदर्शन, गीत के बोल के अर्थ को दर्शाते हैं। नर्तक के भाव का प्रमुख महत्व है, इसलिए इसे नृत्तत की नकल करने वाला पहलू भी माना जा सकता है।

नाट्य:
नाट्य तन्नावटकं चैव पूज्यंऔ पूर्वकथायुतम्
प्राचीन कथा एवं चरित्र पर आधारित अभिनय नाट्य कहलाता है, जिसे जनमानस में सम्मालन प्राप्त हो। नाट्य का तात्प र्य अभिनय और भाव, रस और अभिज्ञान की संयुक्त अभिव्यक्ति से है। नाट्य शब्द की उत्पत्ति मूलत: नट शब्दय से हुई है, जिसका अर्थ है गति और नृत्य या अभिनय। इसे लयाल, इसाई और नाटक के संयोजन के रूप में भी माना जा सकता है, अर्थात, साहित्य, संगीत और नाटक। इस प्रकार नाट्य नृत्य और संगीत या लय और अभिनय या नृ्त्तञ और नृत्य के माध्यम से कहानी कह रहा है। नृत्य के प्राथमिक मानकों के साथ नृत्तम, नृत्य और नाट्य की गतियों को हमेशा सामांजस्यस में होना चाहिए। भाव के साथ संयोजन में नृत्तन में पाया जाने वाला लय नृत्यय बन जाता है, जो इशारों और क्रियाओं के साथ संयुक्त होने पर नाट्य बन जाता है। नाट्य अंत में प्रभावशाली होने के साथ-साथ तभी प्रभावी होगा जब नृत्य की शारीरिक गतिविधियों और अभिन्न भावों के बीच सामंजस्य हो। सभी महान नर्तक अपने प्रत्येक प्रदर्शन में तीनों का सही मिश्रण प्रदर्शित करते हैं।

संदर्भ:
https://bit.ly/2Sivoi9
https://bit.ly/3vxQ8R9
https://bit.ly/2SjPrgb
https://bit.ly/3t6I5JG

चित्र संदर्भ :-
1. नृत्य का एक चित्रण (Wikimedia, Unsplash)
2. नृत्यांगना का एक चित्रण (Unplash)
3 .नृत्यांगना का एक चित्रण (Unplash)



RECENT POST

  • क्या है उत्तर प्रदेश का जनसंख्या नियंत्रण कानून
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     25-09-2021 10:12 AM


  • भोजन संरक्षण और फसल उत्पादन में किण्वन की भूमिका
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     24-09-2021 09:21 AM


  • शरीर के विभिन्न अंगों के कैंसर भिन्न कारणों से होते हैं एवं विश्वभर में नियंत्रण के प्रयास
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     23-09-2021 10:45 AM


  • सबसे खतरनाक जानवरों में से एक है बॉक्स जेलीफ़िश, क्या बचा जा सकता है इसके डंक से
    मछलियाँ व उभयचर

     22-09-2021 09:08 AM


  • भारत की रॉक कट वास्तुकला से निर्मित भव्य विशालकाय आकृतियां
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-09-2021 09:46 AM


  • लकड़ी से बनी कुछ चीजें क्यों हैं काफी महंगी?
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     20-09-2021 09:31 AM


  • इतिहास की सबसे भीषण परमाणु दुर्घटना है, चर्नोबिल परमाणु दुर्घटना
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-09-2021 12:48 PM


  • जौनपुर की अनूठी शहर संरचना है यूरोप के प्रसिद्ध शहरों जैसी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     18-09-2021 10:07 AM


  • ओजोन परत के संरक्षण के लिए वैश्विक पैमाने पर उठाए गए कदम
    जलवायु व ऋतु

     17-09-2021 09:48 AM


  • जलवायु को विनियमित करने में महासागर की भूमिका
    समुद्र

     16-09-2021 10:09 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id