मन और आत्मा को शुद्ध करने का साधन हैं, इस्लामिक कला के ज्यामितीय और संग्रथित प्रतिरूप

जौनपुर

 15-01-2021 12:58 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

जौनपुर में इस्लामी (Islamic) वास्तुकला के कई अद्भुत उदाहरण मौजूद हैं। शर्की सम्राटों के तहत, जौनपुर इस्लामी कला, वास्तुकला और सीखने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना। इस वास्तुकला के अधिकांश ढांचे तब नष्ट हो गए, जब सिकंदर लोदी (Sikander Lodi) ने जौनपुर पर पुनः विजय प्राप्त की। यहां के अधिकांश कार्यों में वास्तुकला की एक बहुत ही सामान्य विशेषता देखी जा सकती है, और वह है, इसका इस्लामिक ज्यामितीय और संग्रथित पैटर्न या प्रतिरूप (Interlace patterns)। इस्लामी सजावट में इन दोनों ही सजावट रूपों का अत्यधिक महत्व है, यहां तक कि, इन्हें इस्लामी और मूरिश (Moorish) कला की पहचान भी माना जाता है।
इस्लामी कला के सजावटी पैटर्न को देंखे, तो इसे मौटे तौर पर तीन भागों में बांटा गया है, जिनमें अरबस्क (Arabesque), ज्यामितीय प्रतिरूप और हस्तलिपि शामिल हैं। इन तीनों ही प्रकारों में अक्सर विस्तृत संग्रथित पैटर्न दिखायी देता है। इस्लामिक अरबस्क की बात करें, तो यह कलात्मक सजावट का एक रूप है, जिसमें सपाट सतहों की सजावट को शामिल किया जाता है। इसमें कुंडलीनुमा और संग्रथित पत्तियों, तनों और रेखाओं के लयबद्ध रैखिक पैटर्न सम्मिलित किए जाते हैं, जो अक्सर अन्य तत्वों के साथ भी संयुक्त होते हैं। आमतौर पर इसमें एक एकल डिज़ाइन (Design) बनाया जाता है, जिसे वांछित रूप से कई बार दोहराया भी जा सकता है। सजावटी पैटर्न का अन्य रूप, हस्तलिपि, इस्लामी कला का केंद्रीय तत्व मानी जाती है, जो रूचिपूर्ण और धार्मिक संदेश का संयोजन होती है। यह कभी-कभी सजावट का मुख्य रूप होती है, लेकिन कई बार इसे अरबस्क के साथ भी उपयोग में लाया जाता है। इसका उपयोग अधिकतर मस्जिदों, मदरसों और मकबरों जैसी इमारतों की सजावट के लिए किया जाता है। इस्लामी कला के सजावटी ज्यामितीय पैटर्न की यदि बात करें तो, इन्हें ज्यामितीय आकृतियों जैसे वर्गों, वृत्तों आदि के दोहरे संयोजनों से बनाया जाता है। ये संयोजन एक दूसरे को अतिव्यापित तथा संग्रथित करते हैं। ज्यामितीय प्रतिरूप अरबस्क के साथ संयोजित होकर अधिक जटिल और मिश्रित प्रतिरूप बनाते हैं। प्रत्येक ज्यामितीय आकृति का अपना एक विशेष महत्व होता है, जो किसी न किसी चीज का प्रतीक होता है। उदाहरण के लिए वृत के आकार को एकता और विविधता का प्रतीक माना जाता है।
इस्लामी कला और वास्तुकला में ज्यामितीय पैटर्न के विभिन्न रूप देखे जा सकते हैं, जिनमें किलिम कार्पेट्स (Kilim carpets), फारसी गिरिह (Persian Girih), मोरक्कन ज़ुलेइल टाइलवर्क (Moroccan Zellige Tilework), मुकर्नस सजावटी वॉल्टिंग (Muqarnas Decorative Vaulting), सिरेमिक (Ceramics), चमड़ा, रंजित कांच, वुडवर्क (Woodwork - लकड़ी का काम), मेटलवर्क (Metalwork - धातु का काम) आदि शामिल हैं। माना जाता है, कि इस्लामी कला में उपयोग किये जाने वाले प्रतिरूपों की उत्पत्ति ग्रीक (Greek), रोमन (Roman) और सासैनियन (Sasanian) की पूर्व संस्कृतियों में उपयोग किये गये सरल डिजाइनों से हुई थी। ज्यामितीय और संग्रथित पैटर्न की मुख्य विशेषता यह है कि, इसमें प्राकृतिक वस्तुओं का प्रतिनिधित्व नहीं किया जाता। इसका मुख्य कारण इनका इस्लामी कला से जुड़ा होना है, जो शुद्ध अमूर्त रूपों पर अपनी एकाग्रता द्वारा पहचानी जाती है। इस्लामी सजावट कला में मानव या जानवरों के जीवित रूपों के उपयोग का निषेध किया गया है। इसलिए यह कला आलंकारिक छवियों का उपयोग करने से बचती है।
इस्लामी संस्कृति में, इन प्रतिरूपों को आध्यात्मिक क्षेत्र के लिए एक पुल के रूप में देखा जाता है, जो मन और आत्मा को शुद्ध करने का एक साधन माना जाता है। यह वास्तुकला उनकी चीनी मिट्टी की कला, कपड़ा या किताबों की कला आदि में भी देखी जा सकती है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करती है।

संदर्भ:
http://islamicarchitectureinindia.weebly.com/jaunpur-style.html
https://en.wikipedia.org/wiki/Islamic_interlace_patterns
https://en.wikipedia.org/wiki/Islamic_geometric_patterns
चित्र संदर्भ:
मुख्य तस्वीर एक गेट पर इस्लामी geometric पैटर्न दिखाती है। (विकिमीडिया)
दूसरी तस्वीर में इस्लामिक ornament pendant पैटर्न दिखाया गया है। (Pixabay)
तीसरी तस्वीर इस्लामी geometric पैटर्न दिखाती है। (snappygoat)
अंतिम चित्र में इस्लामिक पैटर्न को दिखाया गया है। (pxhere)


RECENT POST

  • सदियों पुराना है सोने के प्रति भारतीयों के प्रेम का इतिहास
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:52 PM


  • जीवन का असली आनंद है, दूसरों को खुशी देना
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 11:57 AM


  • सारण में ‘छनना’ के निर्माता हुए महामारी से प्रभावित
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:34 PM


  • मन और आत्मा को शुद्ध करने का साधन हैं, इस्लामिक कला के ज्यामितीय और संग्रथित प्रतिरूप
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:58 AM


  • एक दूसरे के साथ प्रेम और आंनद के साथ रहने का प्रतीक है, मकर संक्रांति
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:31 PM


  • मानव विकास सूचकांक देश के विकास के स्तर पर नजर रखने के लिए अनिवार्य है
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-01-2021 12:26 PM


  • आखिर क्‍यों नहीं छापती सरकार असीमित पैसे?
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     12-01-2021 11:46 AM


  • भारत के कुछ प्रसिद्ध अंत:कक्ष खेलों का इतिहास
    हथियार व खिलौने

     11-01-2021 10:56 AM


  • 1929 के चर्चित गीतों में से एक है, ‘औल्ड लैंग सिन’
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     10-01-2021 02:51 AM


  • बाजार में तीव्रता से बढ़ती बिटकॉइन (Bitcoin) की मांग
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     09-01-2021 01:24 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id