क्यों और कैसे ताज महल को दुनिया के सात अजूबों में शामिल किया गया?

जौनपुर

 29-12-2020 11:04 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

हमारी दुनिया में प्रकृति ने समुद्र, पहाड़ और जमीन के कुछ ऐसे नजारे हमारे लिए तैयार किये हैं जिसकी कल्पना करना इंसान के लिए कभी-कभी सपने जैसा हो जाता है। दुनिया में प्रकृति ने इतने रंग बिखेरे है कि इंसान में भी इसे और सुन्दर बनाने की ललक पैदा हो गई। कभी अपनी यादों को अस्तित्व में रखने के लिए तो कभी कला को समर्पण करने के लिए तो कभी अपने वर्चस्व की वजह से इंसान ने ऐसी कई रचनाएं बनाई हैं जिनसे यह दुनिया और भी खूबसूरत बन गई। वैसे तो इंसान ने हजारों ऐसी कृतियां बनाई हैं जिन्हें देख आज भी लोग अंचभे में पड़ जाते हैं, लेकिन दुनियां के सात अजूबों की बात ही अलग है। अपनी शिल्प कला, वास्तु कला और भवन निर्माण कला के लिए दुनिया के सात अजूबे हमेशा से ही लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहे हैं। किंतु क्या आप जानते हैं कि दुनिया के इन सात अजूबों को कैसे चुना जाता है?
दुनिया के नए 7 अजूबों का लाने का विचार 2000 में आया था, इस तरह से 200 मौजूदा स्मारकों में से नए अजूबों को चुनने की एक पहल शुरू की गयी। ये पहल ज्यूरिक, स्विट्जरलैंड (Zurich, Switzerland,) में की गयी थी और इसके लिए बकायदा एक फाउंडेशन (न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन-New 7 Wonders Foundation (N7W) ) बनाया गया था, इस फाउंडेशन ने एक साईट बनवाई थी जिसमें सबसे पहले विश्व की करीब 200 धरोहरों की एक सूची बनाई गयी। यह चयन लोकप्रियता के आधार पर किया गया था, जिसका नेतृत्व कनाडा-स्विस (Canadian-Swiss) के बर्नार्ड वेबर (Bernard Weber) द्वारा किया गया। इस वेब साईट के माध्यम से लाखों से भी ज्यादा लोगों ने अपने फ़ोन या इंटरनेट से इसके लिए वोट (Vote) किया। यह वोटिंग काफी समय तक चली और इसके परिणामों को 7 जुलाई सन 2007 को लिस्बन (Lisbon) में घोषित किया गया था। अब हम सबके सामने दुनिया के नए सात अजूबे थे जिन्हें विश्व के लोगों ने वोटिंग के जरिये चुना था।
दुनिया के सात अजूबे (Seven Wonders of the World)
1. चीन की दीवार (Great Wall of China) (700 ई.पू.)
2. पेट्रा (Petra) (312 ई.पू.)
3. कोलोज़ीयम (Colosseum) (80 ई)
4. चिचेन इत्जा (Chichen Itza) (600 ई)
5. माचू पिच्चु (Machu Picchu) (1450 ई)
6. ताजमहल (Taj Mahal) (1643 ई.)
7. क्राइस्ट द रिडीमर (Christ the Redeemer) (1931 ई)
ये सभी सबसे पुराने वास्तुशिल्प स्मारक हैं, जिन्हें मानव हाथों की सबसे बड़ी रचना माना जाता है। इन स्मारक के अलावा गीज़ा के पिरामिड (Great Pyramid of Giza) सबसे प्राचीन (2560 ई.पू.) और विश्व का सबसे चमकीला अजूबा है, जो गीज़ा (मिस्र-Egypt) में स्थित है। इसका परिसर मनुष्य द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे बड़ा वास्तुशिल्प स्मारक है।
इस सूची में भारत के ताजमहल का होना एक सौभाग्य की बात है। ताजमहल भारत के वास्तुशिल्प में एक अमुल्य श्वेत मोती के समान है। पूरे देश में आपको इससे अधिक शानदार इमारत नहीं मिलेगी। यह पूरी दुनिया में प्यार का प्रतीक माना जाता है और प्यार की इसी खूबसूरती को इमारत की शक्ल दी है भारत के मुगल बादशाह शाहजहां (1628 से 1658 तक शासन) ने। शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया था। ताजमहल सन् 1983 में यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर के श्रेणी में नामित किया गया था। इसका निर्माण सन 1632-1653 के बीच हुआ था। मकबरे का निर्माण 1643 में पूरा हो गया था, लेकिन अन्य परियोजनाओं के निर्माण में 10 वर्षों का और समय लगा। इसे बनने में लगभग 20 से 21 वर्षों का समय लगा था। इसे बनाने के लिए शाहजहाँ ने पूरी दुनिया से सफ़ेद संगमरमर मंगवाया था। ताजमहल के विस्तार की बात करें तो ये 17 हेक्टेयर ((42-एकड़)) के क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसमें एक मस्जिद और एक अतिथि गृह भी शामिल है। ताजमहल में स्वयं शाहजहाँ का भी मकबरा है। इसे बनाने के लिए सम्राट के दरबार के मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी (Ustad Ahmad Lahauri) के नेतृत्व में 20,000 से भी ज्यादा मजदूरों ने काम किया था, और कहा जाता है की ताजमहल बनने के बाद शाहजहाँ ने मजदूरों के हाथ कटवा दिये थे। जिससे मजदूर ऐसी ईमारत कहीं और नहीं बना सके। यह खूबसूरत गुंबदों वाला महल चारों तरफ बगीचों से घिरा है। क्षितिज पर इसके ताज के आकार के अलावा कुछ नजर नहीं आता और मुगल शिल्पकला का यह सबसे बढ़िया उदाहरण माना जाता है। ताजमहल मुगल वास्तुकला का सर्वाधिक परिष्कृत एवं उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। ताजमहल परिसर को मुख्य रूप से पांच भागों में गया है:
1. यमुना नदी के उत्तर में चांदनी बाग (moonlight garden)
2. नदीमुखी टैरेस (Terrace), जिसमें मुख्य मकबरा, मस्जिद एवं जवाब इमारतें हैं।
3. चारबाग क्षेत्र, जिसमें मण्डप बने हैं।
4. जिलौखाना, जिसमे मकबरे के परिचरगण का आवास है, तथा अन्य गौण मकबरे स्थित हैं।
5. ताजगंजी, जो मूल रूप से एक बाजार एवं तत्काळीन मजदूरों आदि के लिये कारवां रूपी आवास स्थली थी, और अब उसके कुछ अवशेषमात्र ही शेष हैं। यह जिलौखाना और उद्यान के बीच में ही बड़ा द्वार स्थित है।
ताज महल को मुगल वास्तुकला की सौंदर्य उपलब्धि का शिखर माना जाता है। ताज महल मुगल वास्तुकला की समृद्ध विरासत से प्रेरित था। हालांकि ताज महल बनवाने के दौरान शाहजहां ने मुगल शैली में वास्तुकला की अभिव्यक्ति और विकसित की और उसे बहुत ऊपर ले गए। इसमें सफेद संगमरमर के इस्तेमाल और कीमती पत्थरों में कि हुई नक्काशी का काम एक नया विचार था और उसी से ये सिर्फ एक मकबरा ना होकर कला की मिसाल बन गया।
ताज महल परिसर: कई इमारतों से मिलकर ताज महल परिसर बना है और इसमें प्रभावशाली सजावटी प्रवेशद्वार भी हैं। इन दरवाज़ों पर कुरान के शिलालेख हैं। इसमें विशाल बाग है, जिसमें फव्वारे और पानी की नहरें हैं।
मुख्य मकबरा: एक सममित वर्ग इमारत है जिसे एक ऊँचे आधार पर बनाया गया है। इसकी छत एक गुंबद के आकार की है। अधिकांश मुगल मकबरों की तरह ही इसमें भी मूल तत्व फारसी मूल के हैं। मुख्य मकबरे की इमारत के चारों कोनों के हर कोने पर एक मीनार है जो कि मकबरे के आधार के बाहरी छोर पर हैं।
बाहरी अलंकरण: ताजमहल का बाहरी अलंकरण, मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण हैं। जैसे ही सतह का क्षेत्रफल बदलता है, उसका अलंकरण भी इसी अनुपात में बदलता है। अलंकरण को केवल सुलेखन, निराकार, ज्यामितीय या पादप रूपांकन से ही किया गया है और जड़ाउ काम के लिए इस्तेमाल पत्थरों में जेड, जैस्पर और काले और पीले रंग के संगमरमर शामिल हैं। आंतरिक अलंकरण: ताजमहल का आंतरिक कक्ष परंपरागत अलंकरण अवयवों से कहीं परे है। यहाँ जड़ाऊ कार्य पच्चीकारी नहीं है, वरन बहुमूल्य पत्थरों एवं रत्नों की लैपिडरी (lapidary) कला है। आंतरिक कक्ष एक अष्टकोण है, जिसके प्रत्येक फलक में प्रवेश-द्वार है। आंतरिक दीवारें लगभग 25 मीटर ऊँची हैं, एवं एक आभासी आंतरिक गुम्बद से ढंकी हैं, जो कि सूर्य के चिन्ह से सजा है। आठ संगमरमर के फलकों से बनी जालियों का अष्टकोण, कब्रों को घेरे हुए है। हरेक फलक की जाली पच्चीकारी के महीन कार्य से गठित है।
ताज महल में कब्रें: ताज महल के मुख्य कमरे में स्थित बनावटी कब्रों के चारों ओर संगमरमर की जाली का बेहतरीन काम है जिस पर नक्काशी और पच्चीकारी जड़ाऊ का काम है। जिनके मुख दांए एवं मक्का की ओर हैं। मुमताज महल की कब्र आंतरिक कक्ष के मध्य में स्थित है, जिसका आयताकार संगमरमर आधार 1.5 मीटर चौड़ा एवं 2.5 मीटर लम्बा है। इस पर किया गया सुलेखन मुमताज की पहचान एवं प्रशंसा में है। शाहजहाँ की कब्र मुमताज की कब्र के दक्षिण की ओर है। यह पूरे क्षेत्र में, एकमात्र दृश्य असम्मितीय घटक है, यह आकार में बड़ी और समान तरह के नक्काशी के काम से सजी है।
ताजमहल के प्रवेशद्वार से लेकर बगीचे, प्रभावशाली गुंबद, मीनारें, मकबरे और सफेद संगमरमर की खूबसूरती तक, ये सब मिलकर एक खास और सुंदर अनुभव देते हैं। इसके निर्माण के हर कदम पर अविश्वसनीय शिल्प कौशल बसा हुआ है। ताज महल से प्रेरित होकर भारत में अनेकों ताजमहल की प्रतिकृति बनी है, जो देखने में ताज महल से हम नहीं। सम्पूर्ण भारत में ताज महल के समान अनेकों इमारतों का निर्माण प्राचीन काल और वर्तमान काल में किया गया है जिसे निम्नलिखित रूप से देखा जा सकता है-
बीबी का मकबरा
बीबी का मकबरा जो की औरंगाबाद में स्थित है जो मूल ताज के समान दिखता है। इसलिए इसे अक्सर दक्खन का ताज कहा जाता है। यह औरंगाबाद में प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है, जिसे राजकुमार आज़म शाह (Azam Shah) (मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के सबसे बड़े बेटे) ने अपनी प्यारी माँ, दिलरस बानू बेगम (Dilras Banu Begum) की याद में बनवाया था। दिलचस्प बात यह है कि इसे अता -उल्लाह (Ata-ullah) ने डिजाइन किया था, जो ताज महल के प्रमुख वास्तुकार, उस्ताद अहमद लाहुरी के पुत्र थे।
मिनी ताजमहल
मिनी ताजमहल निश्चित रूप से मूल ताजमहल का प्रतिरूप है, इसे 2011 में बुलंदशहर में फैजुल हसन कादरी (Faizul Hasan Qadr) द्वारा अपनी पत्नी के लिए बनवाया गया है, जिनकी कैंसर से मृत्यु हो गई थी।
शहजादी का मकबरा
इस छोटे पैमाने की प्रतिकृति को 1660 में बनाया गया था, जो कि अवध के तीसरे नवाब मुहोम्मद अली शाह बहादुर की बेटी, राजकुमारी जीनत असिया की याद में बनाया गया था। परंतु यह ईंटों से बना है।
ताजमहल, सेवन वंडर्स पार्क (Taj Mahal, Seven Wonders Park)
राजस्थान के कोटा शहर में एक मनोरंजन पार्क में (जिसे सेवन वंडर्स पार्क कहा जाता है) दुनिया के सात अजूबों को बनाया गया है जिसमे ताजमहल का भी प्रतिरूप बनाया गया है। संदर्भ:
https://en.wikipedia.org/wiki/Taj_Mahal
https://bit.ly/2L5ym5N
https://bit.ly/3hogNdg
https://bit.ly/3pur0rv
चित्र संदर्भ:
मुख्य तस्वीर में ताजमहल दिखाया गया है। (Unsplash)
दूसरी तस्वीर में दुनिया के 7 अजूबों को दिखाया गया है। (Wikimedia)
तीसरी तस्वीर ताजमहल पर पुष्प डिजाइन दिखाती है। (Unsplash)
आखिरी तस्वीर में ताजमहल की वास्तुकला को दिखाया गया है। (Unsplash)



RECENT POST

  • अंतरिक्ष मौसम की पृथ्वी के साथ परस्पर क्रिया और इसका पृथ्वी पर प्रभाव
    जलवायु व ऋतु

     22-10-2021 08:24 AM


  • विभिन्न संस्कृतियों में फूलों की उपयोगिता
    बागवानी के पौधे (बागान)

     21-10-2021 08:27 AM


  • लाल केले की बढ़ती लोकप्रियता महत्व तथा विशेषताएं
    साग-सब्जियाँ

     21-10-2021 05:44 AM


  • व्यवसाय‚ उद्यमिता और अप्रवासियों के बीच संबंध
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-10-2021 09:50 AM


  • मुहम्मद पैगंबर के जन्मदिन मौलिद के पाठ और कविताएँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-10-2021 11:35 AM


  • पूरी तरह से मांसाहारी जीव है, टार्सियर
    शारीरिक

     17-10-2021 12:06 PM


  • परमाणु ईंधन के रूप में थोरियम का बढ़ता महत्व और यह यूरेनियम से बेहतर क्यों है
    खनिज

     16-10-2021 05:32 PM


  • भारत-फारसी प्रभाव के एक लोकप्रिय व्यंजन “निहारी” की उत्पत्ति और सांस्‍कृतिक महत्व
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-10-2021 05:16 PM


  • दशहरे का संदेश और मैसूर में त्यौहार की रौनक
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-10-2021 06:06 PM


  • संपूर्ण धरती में जानवरों और पौधों के आवास विखंडन से प्रभावित हो रही है जैविक विविधता
    निवास स्थान

     13-10-2021 06:00 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id