कोरोना काल में संगीतकारों की घटती आय और ऑनलाइन प्लेटफार्म

जौनपुर

 10-11-2020 07:06 PM
ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

कोरोना वायरस ने न केवल भारत की बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर दी है। कोरोना वायरस के कारण भारत की अर्थव्‍यवस्‍था पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट आई है। लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं और हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन इन आँकड़ों के परे करोड़ों लोग हैं, जिनकी जीविका पर इस बीमारी का असर पड़ा है। कोरोना के चलते होटल, रेस्टोरेंट, ट्रैवलस, टैक्सी और पर्टयन जैसे कई उद्योग प्रभावित हुये हैं। इस महामारी से संगीत जगत भी अछूता नहीं रहा है। देशभर में लगे लॉकडाउन (Lockdown) से संगीत उद्योग की कमर टूट गई है। इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अब तो केवल समय ही दिखाएगा कि भविष्य में यह उद्योग कैसे पटरी पर आएगा?
डेलॉयट और ट्रेड बॉडी इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री (Deloitte and Trade Body the Indian Music Industry) द्वारा प्रकाशित 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस संकट से पहले भारत में लाइव संगीत उद्योग का मूल्य 1,280 करोड़ रुपये था। परंतु महामारी के चलते कई सारे लाइव म्यूजिक कोंसेर्ट (Live Music Concert) रद्द या स्थगित कर दिये गये। जिससे संगीत जगत बुरी तरह प्रभावित हुआ। द इवेंट्स एंड एंटरटेनमेंट मैनेजमेंट एसोसिएशन (The Events and Entertainment Management Association) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन से भारत भर में लाइव शो रद्द होने के बाद, 63.1% इवेंट कंपनियों को 1 करोड़ तक का नुकसान हुआ है। बिलबोर्ड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में सूचीबद्ध 1,000 से अधिक लाइव कोंसेर्ट को रद्द कर दिया गया। इनमें खेल, कॉमेडी, फिल्म और संगीत से जुडी हस्तियां शामिल होने वाली थी। इतना ही नहीं कोरोना वायरस के चलते मशहूर अमेरिकी पॉपस्टार खालिद ने भी भारत का दौरा रद्द कर दिया, वे “खालिद फ्री स्पिरिट वर्ल्ड टूर (Khalid Free Spirit World Tour)” के चलते भारत का दौरा करने वाले थे। उन्हें 14 अप्रैल, 2020 को बैंगलोर में प्रदर्शन करना था, परंतु महामारी के कारण वे भारत नहीं आये।

भारत में इस महामारी के कारण संगीत उद्योग में हो रहे नुकसान के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सरकार से व्यावसायिक उद्योग को राहत पैकेज मिलेगा, जिसमें संगीत क्षेत्र भी शामिल होगा। परंतु सरकार की तरफ से ऐसे किसी भी राहत पैकेज की घोषणा नहीं हुई, जिसमें कलाकारों और संगीतकारों का कोई जिक्र हो। राहत ना मिलने के बाद बेंगलुरु के संगीतकार देबजीत बसु ने प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को एक अपील की। उन्होने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है, जिसके माध्यम से वह सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे है। इस याचिका में 19 मई के बाद से अभी तक 1,600 से अधिक हस्ताक्षर एकत्र हो चुके हैं। देबजीत बसु कहते हैं कि “यह याचिका केवल संगीतकारों तक सीमित नहीं है, यह मनोरंजन से जुड़े सभी तकनीशियन, इंजीनियर और कर्मचारी आदि के लिये है। यह पहल पूरी तरह से व्यक्तिगत है, हालांकि मैंने कुछ कलाकारों और अन्य प्रतिनिधियों से बात की, सभी ने इसमें अपनी सहमति व्यक्त की और माना कि हमारा उद्योग पूरी तरह से अनदेखा हो गया है।” विश्व स्तर पर देखा जाये तो वैश्विक संगीत उद्योग 50 बिलियन डॉलर से अधिक का है, जिसमें दो जगहों से पैसा आता है। पहला, लाइव संगीत- इसके जरिये संगीत उद्योग के कुल राजस्व का 50% से अधिक पैसा आता है। दूसरा, रिकॉर्ड संगीत, स्ट्रीमिंग (Streaming), डिजिटल डाउनलोड (Digital Download), बिक्री और सिंक्रनाइज़ेशन (Synchronization) (फिल्मों, गेम, टीवी और विज्ञापन का संगीत) आदि से कुल राजस्व का बाकी का पैसा आता है। परन्तु अब कोरोना काल में रिकॉर्ड किये हुये संगीत से ज्यादा राजस्व आ रहा है और लाइव कोंसेर्ट से पैसा कम होता जा रहा है।

2014 में लाइव कोंसेर्ट का राजस्व, रिकॉर्ड किये हुये संगीत के राजस्व से ज्यादा था परंतु महामारी आने से बाद से इसका राजस्व कम होता गया है और शायद ऐसी स्थिति आने वाले समय में भी रहेगी। परंतु अभी के आंकड़ों को देखें तो महामारी के दौरान रिकॉर्ड किए गए संगीत का राजस्व जोकि एक समय में संगीत जगत के कुल राजस्व का एक चौथाई था, खुदरा दुकानों के बंद होने से लगभग एक-तिहाई रह गया है और इनकी डिजिटल बिक्री लगभग 11% गिर गई है। लेकिन 2020 की पहली तिमाही में, ऑनलाइन संगीत के राजस्व में 70.0% की वृद्धि हुई, आज ऑनलाइन संगीत सुनने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या 42.7 मिलियन पर पहुंच गई है। ये साक्ष्य यह भी दर्शाते हैं कि कोरोना वायरस के समय में लोगों का संगीत सुनने का तरीका बदल रहा है। ज्यादातर उपभोक्ता टीवी और स्मार्ट फोनों और घरेलू उपकरणों का उपयोग करते हैं। संगीत उद्योग के अंतगर्त विज्ञापन जगत भी आता है। इंटरएक्टिव एडवरटाइजिंग ब्यूरो (Interactive Advertising Bureau) के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि लगभग एक चौथाई मीडिया खरीदारों और ब्रांडों ने 2020 के पहले छमाही में सभी विज्ञापन रोक दिए और 46% खर्च कम कर दिया। जिसका असर कलाकारों और संगीतकारों की आय पर देखने को मिला। इसके अलावा संगीत के लाइव प्रदर्शन का राजस्व लगभग शून्य हो गया है, सभी बड़े लाइव कोंसेर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जस्टिन बीबर (Justin Bieber) से लेकर द वीकेंड (The Weekend) तक के विश्व दौरे रद्द हो गये हैं।
इस स्थिति को देख कर U2 के प्रमुख आयरिश गायक बोनो का मानना है कि “लाइव संगीत का भविष्य बहुत अलग" होने वाला है, क्योंकि दुनिया अभी कोरोना वायरस महामारी से उभरने के लिए संघर्ष कर रही है।” कांटेक्टम्यूजिक (Contactmusic) के अनुसार, गायक बोनो ने कहा कि “इस समय में शायद ड्राइव-इन शो (Drive-in Show) एक अच्छा विकल्प होगा, क्योंकि इससे सामाजिक दूरी बनाई जा सकती है और लोग संगीत का लुफ्त भी उठा सकते हैं। मुझे लगता है कि यह कुछ समय के लिए बहुत अच्छा विकल्प होगा।”
आज इस दौर में कंपनियों और संगीतकारों को नये वैकल्पिक तरीकों की ओर रुख करने की जरूरत है, जो कि भविष्य में भी बने रहें। ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से दर्शकों के साथ जुड़ने का तरीका सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। स्किलबॉक्स (Skillbox) जैसे प्लेटफार्म संगीत व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिये एक बेहतरी तरीका बनता जा रहा है, जो मामूली शुल्क दे कर लोगों के साथ जुड़ने और अपनी आय को बढ़ाने का मौका देता है। इसी प्रकार स्पोटिफाई (Spotify), और एप्पल म्यूजिक एंड जिओसावन (Apple Music & JioSaavn) प्लेटफार्म है जो संगीत व्यवसाय को बढ़ावा दे रहे हैं। इंटरनेट दिन प्रति दिन मनोरंजन के एक महान स्रोत बनता जा रहा है। सीडी बेबी जैसी सेवाएं भी संगीत डाउनलोड करने और दुनिया भर में स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों पर संगीत को प्रकाशित और वितरित करने का अच्छा ऑनलाइन स्रोत है। स्पोटिफाई ने भारतीय स्वतंत्र कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए नई प्लेलिस्ट भी बनाईं है। उम्मीद है कि इससे संगीत जगत में लोगों की आय में सुधार होगा और ये उद्योग एक बार फिर से अपनी रफ्तार से चलने लगेगा। इनके अलावा इंस्टाग्राम टीवी, फेसबुक, यूट्यूब लाइव और ज़ूम जैसे प्लेटफार्म भी कोरोना काल में संगीत उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं।

संदर्भ:
https://www.contentninja.in/dojo/content-marketing/with-concerts-on-pause-music-industry-innovates-way-forward/
https://www.weforum.org/agenda/2020/05/this-is-how-covid-19-is-affecting-the-music-industry/ https://www.newindianexpress.com/cities/bengaluru/2020/may/24/government-should-hear-covid-crisis-hit-music-industry-bengaluru-based-musicians-2147477.html
https://indianexpress.com/article/entertainment/music/future-of-live-music-will-be-different-for-a-while-bono-6402972/
http://everythingexperiential.businessworld.in/article/Live-Music-Industry-in-India-is-facing-a-new-crisis-after-COVID-19/18-03-2020-186544/

चित्र सन्दर्भ:
पहली छवि कोविड के दौरान वीडियो स्ट्रीमिंग के माध्यम से लाइव संगीत दिखाती है।(livemint)
दूसरा चित्र लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट से लिया गया है।(youtube)
तीसरा चित्र महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय म्यूजिक एल्बम के संग्रह का है।(prarang)
चौथी छवि जौनपुर के गाँवों में स्थानीय गायन करते हुए दिखाई देती है।(alamy)


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