भारत में मिट्टी के स्वस्थ्य के प्रशिक्षण में नहीं बना कोविड-19 रुकावट

जौनपुर

 16-10-2020 10:22 PM
भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

जौनपुर कृषि प्रधान क्षेत्र है, जिसकी अर्थव्‍यवस्‍था का एक बड़ा हिस्‍सा कृषि से आता है। यहां की मुख्‍य फसलें चावल, मक्का, मटर, मोती बाजरा, गेहूं, काला चना, प्याज़ और आलू हैं, इसके साथ ही कुछ चारे की फसलें भी उगायी जाती हैं। फसलें वर्षा और सिंचाई दोनों के साथ उगाई जाती हैं। जौनपुर में मुख्‍यतः रेतीली, जलोढ़ या रेतीली दोमट मिट्टी पायी जाती है। गोमती नदी के किनारे स्थित होने के कारण यहाँ जलोढ़ मिट्टी का अनुपात अन्‍य से ज्‍यादा है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने की वजह से जौनपुर में मृदा अपरदन एक स्वाभाविक रूप से होने वाली प्रक्रिया है। कृषि में, मिट्टी का क्षरण जल और वायु की प्राकृतिक, शारीरिक शक्तियों द्वारा या जुताई जैसी कृषि गतिविधियों से होता है।
मिट्टी का क्षरण फसली उत्पादकता को कम करता है और निकटस्थ जलक्षेत्रों, आर्द्रभूमि और झीलों के प्रदूषण में योगदान देता है। मृदा अपरदन एक धीमी प्रक्रिया हो सकती है, जो अपेक्षाकृत निरंतर जारी रहती है या खतरनाक दर पर भी हो सकती है, जिससे ऊपरी मिट्टी को गंभीर नुकसान होता है। मृदा संघनन, कम कार्बनिक पदार्थ, मिट्टी की संरचना का नुकसान, खराब आंतरिक जल निकासी, लवणता और मिट्टी की अम्लता, आदि गंभीर समस्याएं मिट्टी की गिरावट की स्थिति को उत्पन्न करती हैं। मृदा अपरदन प्रमुख रूप से जल व वायु द्वारा होता है। यदि जल व वायु का वेग तीव्र होगा तो अपरदन की प्रक्रिया भी तीव्र होती है। अतिगहन एवं दीर्घकालिक वर्षा मृदा के भारी अपरदन का कारण बनती है।
मिट्टी की सतह पर वर्षा की बूंदों का प्रभाव मिट्टी की सतह को तोड़ सकता है और सकल पदार्थ को तितर-बितर कर सकता है। मिट्टी के कार्बनिक पदार्थों के स्तर को कम करने वाली जुताई और फसल संबंधी प्रथाएं, मृदा संरचना को खराब करती हैं या मृदा संघनन के परिणामस्वरूप मृदा अपरदन में वृद्धि को प्रभावित करती हैं। वहीं दूसरी ओर हवा से होने वाले अपरदन में हवा के माध्यम से रोपाई, पौधों या बीज को नष्ट कर देता है। साथ ही फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं, जिसका परिणाम महंगा हो जाता है। मिट्टी के फटने से क्षतिग्रस्त पौधे, उपज में कमी, गुणवत्ता की हानि और बाज़ार मूल्य में कमी के साथ कई रोग उत्पन्न होने लगते हैं। उच्च कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण है मिट्टी की गुणवत्ता इसलिए मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और मिट्टी के संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। 2002 में मृदा विज्ञान के अंतर्राष्ट्रीय संघ द्वारा मृदा दिवस को मनाने के लिए सिफारिश की गई थी। थाईलैंड के राज्य के नेतृत्व में और वैश्विक मृदा साझेदारी की संरचना के भीतर, खाद्य और कृषि संगठन ने वैश्विक जागरूकता बढ़ाने वाले मंच के रूप में विश्व मिट्टी दिवस की औपचारिक स्थापना का समर्थन किया। वहीं 5 दिसंबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि यह थाईलैंड के राजा स्वर्गीय एच. एम. राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (Bhumibol Adulyadej) के आधिकारिक जन्मदिन से मेल खाती है, जो इस पहल के मुख्य समर्थकों में से एक थे।
महामारी के आगमन के साथ, भारत में होने वाले मृदा प्रशिक्षण में रुकावट आ गई, जिसके समाधान के लिए वर्ल्ड एग्रोफोरेस्ट्री (आईसीआरएएफ) (World Agroforestry (ICRAF)) की वैश्विक मृदा प्रयोगशाला भूमि क्षरण निगरानी संरचना ने भारत को आभासी प्रशिक्षण प्रदान किया। कोविड-19 (Covid-19) के प्रकोप से पहले भारत में दो संगठनों ने वर्ल्ड एग्रोफोरेस्ट्री की साझेदारी में भूमि क्षरण निगरानी संरचना को लागू किया था। इन दो परियोजनाओं को अजीम प्रेमजी परोपकारी पहल द्वारा वित्त पोषित किया गया है। भारत में प्रयोगशाला मृदा विश्लेषण पर प्रशिक्षण, तिरुपति में 16-20 सितंबर 2019 से पहले ही शुरू हो गया था, जिसमें आईसीआरएएफ के वैज्ञानिक 25 मृदा वैज्ञानिकों, प्रयोगशाला तकनीशियनों और डॉक्टरेट (Doctorate) उम्मीदवारों के साथ संलग्न थे। वहीं जहां अभी कोविड-19 के कारण क्षेत्र सर्वेक्षण कम हो गया है, इस आभासी प्रशिक्षण के बाद, सहभागियों को स्थानीय स्तर पर मिट्टी के नमूनों का प्रसंस्करण करने में काफी सहायता मिलेगी।
विभिन्न मृदा संरक्षण उपायों को अपनाने से पानी, हवा और जुताई से होने वाले मिट्टी के अपरदन को कम किया जा सकता है। जुताई और फसल के कार्य, साथ ही भूमि प्रबंधन कार्य, सीधे तौर से एक खेत में मिट्टी के अपरदन की समस्या और समाधान को प्रभावित करते हैं। जब फसल की कटाई या बदलती जुताई पद्धतियाँ किसी क्षेत्र पर कटाव को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती हैं, तो दृष्टिकोण या अधिक चरम उपायों का संयोजन आवश्यक हो सकता है।
वहीं यदि देखा जाए तो कई किसानों ने अपने खेतों पर मिट्टी के अपरदन की समस्याओं से निपटने के लिए कई तरह से महत्वपूर्ण प्रगति की है।

संदर्भ :-
http://www.omafra.gov.on.ca/english/engineer/facts/12-053.htm
http://jaunpur.kvk4.in/district-profile.html
https://www.un.org/en/observances/world-soil-day
https://www.foreststreesagroforestry.org/news-article/improving-the-health-of-indias-soil-doesnt-stop-for-covid-19/

चित्र सन्दर्भ:
मुख्य चित्र में जौनपुर में मृदा अपरदन के चित्र को दिखाया गया है। (Prarang)
दूसरे चित्र में जौनपुर के खेतिहर धान की रोपाई करते हुए दिखाए गए हैं। (Prarang)
तीसरे चित्र में जलोढ़ मिट्टी का एक खदान स्थल दिखाया गया है। (prarang)
चौथे चित्र में जौनपुर की उपजाऊ मिट्टी और यहां की खेती का कलात्मक चित्रण है। (Prarang)
अंतिम चित्र में जौनपुर की गोमती नदी और उस पर बना प्राचीन शाही पुल दिखाई दे रहा है। (Wikimedia)


RECENT POST

  • परिवहन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात AI
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     27-05-2022 09:37 AM


  • खाद्य यादों में सभी पांच इंद्रियां शामिल होती हैं, इस स्मृति को बनाती समृद्ध
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2022 08:17 AM


  • जौनपुर सहित यूपी के 6 जिलों से गुज़रती पवित्र सई नदी, क्यों कर रही अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष?
    नदियाँ

     25-05-2022 08:18 AM


  • जंगलों की मिटटी में मौजूद 500 मिलियन वर्ष पुरानी विस्तृत कवक जड़ प्रणालि, वुड वाइड वेब
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:38 AM


  • चंदा मामा दूर के पे होने लगी खनिज संसाधनों के लिए देशों के बीच जोखिम भरी प्रतिस्पर्धा
    खनिज

     23-05-2022 08:47 AM


  • दुनिया का सबसे तेजी से उड़ने वाला बाज है पेरेग्रीन फाल्कन
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:53 PM


  • क्या गणित से डर का कारण अंक नहीं शब्द हैं?भाषा के ज्ञान का आभाव गणित की सुंदरता को धुंधलाता है
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:05 AM


  • भारतीय जैविक कृषि से प्रेरित, अमरीका में विकसित हुआ लुई ब्रोमफील्ड का मालाबार फार्म
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 09:57 AM


  • क्या शहरों की वृद्धि से देश के आर्थिक विकास में भी वृद्धि होती है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:49 AM


  • मिट्टी से जुड़ी हैं, भारतीय संस्कृति की जड़ें, क्या संदर्भित करते हैं मिट्टी के बर्तन या कुंभ?
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:49 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id