क्या है आल्हा रामायण का इतिहास और क्यूँ है वो इतनी ख़ास?

जौनपुर

 13-10-2020 03:03 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जिसने रामायण की कथा नहीं सुनी होगी, परंतु बहुत ही कम लोगों ने आल्हा रामायण के बारे में सुना होगा। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि आल्हा रामायण क्या है व इसकी रचना किसने की थी? और आल्हा कौन थे? दरसल यह रामायण (हालांकि लिखित रूप में नहीं लिखी गई है लेकिन मौखिक रूप से कविता में प्रसारित है) वाल्मीकि की रामायण के बाद और तुलसीदास की रामायण से कई सौ साल पहले रची गई थी। "पृथ्वीराज रासो" की तरह, इस रामायण ने रामलीला के मंत्र और गीतों से भी अत्यधिक लोकप्रियता हासिल की और आज भी, रामायण का यह संस्करण (मूल वाल्मीकि नहीं और न ही तुलसीदास संस्करण) राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में बहुत लोकप्रिय है। भारत के उपन्यास सम्राट 'मुंशी प्रेमचंद' ने आल्हा के काम पर एक दिलचस्प रचना लिखी थी, और वह इसमें आल्हा रामायण का भी उल्लेख करते हैं। आल्हा कहानी में प्रेमचंद आल्हा का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि “आल्हा का नाम किसने नहीं सुना? पुराने जमाने के चन्देल राजपूतों में वीरता और जान पर खेलकर स्वामी की सेवा करने के लिए किसी राजा महाराजा को भी यह अमर कीर्ति नहीं मिली। राजपूतों के नैतिक नियमों में केवल वीरता ही नहीं थी बल्कि अपने स्वामी और अपने राजा के लिए जान देना भी उसका एक अंग था। आल्हा और ऊदल की जिन्दगी इसकी सबसे अच्छी मिसाल है, इनकी मिसाल हिन्दोस्तान के किसी दूसरे हिस्से में मुश्किल से मिल सकेगी। आल्हा और ऊदल के कारनामों के बारे में एक चन्देली कवि ने एक कविता लिखी और उस कविता को रामायण से भी अधिक लोकप्रियता प्राप्त हुई। यह कविता आल्हा के नाम से ही प्रसिद्ध है और आठ-नौ शताब्दियाँ गुजर जाने के बावजूद उसकी दिलचस्पी और सर्वप्रियता में अन्तर नहीं आया है।”
आल्हा रामायण की एक दिलचस्प वीडियो (आज कई मिलियन व्यूज (Million Views) में लोकप्रियता के साथ) यूट्यूब (YouTube) में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है, इन वीडियो को आप निम्न लिंक में जाकर देख सकते हैं:




आल्हा एक मौखिक महाकाव्य है, यह कहानी पृथ्वीराज रासो और भाव पुराण की कई मध्यकालीन पांडुलिपियों में भी पाई जाती है। एक धारणा यह भी है कि कहानी मूल रूप से महोबा के बर्ग के जगनिक द्वारा लिखी गई थी, लेकिन अभी तक इस बात की पुष्टि करने वाली ऐसी कोई पांडुलिपि नहीं मिली है। पुराणों में कहा गया है कि माहिल(जो एक राजपूत थे), आल्हा और उदल के दुश्मन थे, उनका कहना था कि आल्हा अलग परिवार से आए हैं क्योंकि उनकी माँ एक आर्यन अहीर थी। वहीं भाव पुराण के अनुसार आल्हा की माता, देवकी, अहीर जाति की सदस्य थीं, अहीर "सबसे पुरानी जाति" है।
भाव पुराण में यह भी बताया गया है कि केवल उनकी माताएं अहीर जाति से नहीं थी बल्कि बक्सर के उनके पैतृक पिता भी अहीर थे। आल्हा भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र में लोकप्रिय आल्हा-खंड कविता के नायकों में से एक है और इसके रचयिता जगनिक हैं, जो कालिंजर तथा महोबा के शासक परमाल (परमर्दिदेव) के दरबारी कवि थे। इस रचना को संपूर्ण रूप से मौखिक परंपरा द्वारा आगे सौंपा गया और वर्तमान में कई पुनरावृत्तियों में मौजूद है, जो भाषा और विषय दोनों में एक दूसरे से भिन्न हैं। बुंदेली, बघेली, अवधी, भोजपुरी, मैथिली और कन्नौजी के प्रसंग इनमें से सबसे प्रसिद्ध हैं। 

वर्तमान में आल्हा खण्ड की जगनिक द्वारा लिखी गई कोई भी प्रति मौजूद नहीं है, अभी इसकी संकलित की गई प्रति ही उपलब्ध है, जिसका संकलन विभिन्न विद्वानों ने अनेक क्षेत्रों में गाये जाने वाले आल्हा गीतों के आधार पर किया है। इसलिए आज हमें इसके विभिन्न संकलनों में पाठांतर मिल सकते हैं और कोई भी प्रति पूर्णतः प्रमाणिक नहीं मानी गई है। आल्हा-खण्ड का सबसे लोकप्रिय संस्करण ललिताप्रसाद मिश्र द्वारा लिखा गया ग्रंथ है, जो संवत 1956 (1900 CE) में मुंशी नवल किशोर के पुत्र प्रयाग नारायण के अनुरोध पर रचा गया था।

संदर्भ :-
https://www.utsavmantra.com/alha-hindi-story-premchand/
https://www.youtube.com/watch?v=bU0z2ZFHmSI
https://www.youtube.com/watch?v=tDDKLWGdYw0
https://en.wikipedia.org/wiki/Alha
https://en.wikipedia.org/wiki/Alha-Khand

चित्र सन्दर्भ:
मुख्य चित्र में वीर आल्हा का सांकेतिक कलात्मक चित्र है। (Prarang)
दूसरे चित्र में संजो बघेल द्वारा प्रस्तुत आल्हा रामायण के सीडी कवर (CD Cover) दिखाया गया है। (Youtube)
तीसरे चित्र में आल्हा खंड के विभिन्न मुखपृष्ठ दिखाये गये हैं। (Prarang)
अंतिम चित्र में सुरजन चैतन्य के द्वारा सुरों में पिरोया गया आल्हा महोवा की लड़ाई का चित्र दिखाया गया है। (Youtube)


RECENT POST

  • अंतरिक्ष मौसम की पृथ्वी के साथ परस्पर क्रिया और इसका पृथ्वी पर प्रभाव
    जलवायु व ऋतु

     22-10-2021 08:24 AM


  • विभिन्न संस्कृतियों में फूलों की उपयोगिता
    बागवानी के पौधे (बागान)

     21-10-2021 08:27 AM


  • लाल केले की बढ़ती लोकप्रियता महत्व तथा विशेषताएं
    साग-सब्जियाँ

     21-10-2021 05:44 AM


  • व्यवसाय‚ उद्यमिता और अप्रवासियों के बीच संबंध
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-10-2021 09:50 AM


  • मुहम्मद पैगंबर के जन्मदिन मौलिद के पाठ और कविताएँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-10-2021 11:35 AM


  • पूरी तरह से मांसाहारी जीव है, टार्सियर
    शारीरिक

     17-10-2021 12:06 PM


  • परमाणु ईंधन के रूप में थोरियम का बढ़ता महत्व और यह यूरेनियम से बेहतर क्यों है
    खनिज

     16-10-2021 05:32 PM


  • भारत-फारसी प्रभाव के एक लोकप्रिय व्यंजन “निहारी” की उत्पत्ति और सांस्‍कृतिक महत्व
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-10-2021 05:16 PM


  • दशहरे का संदेश और मैसूर में त्यौहार की रौनक
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-10-2021 06:06 PM


  • संपूर्ण धरती में जानवरों और पौधों के आवास विखंडन से प्रभावित हो रही है जैविक विविधता
    निवास स्थान

     13-10-2021 06:00 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id