भारतीय शिल्प निर्माण का अनूठा उत्पाद हैं, काली मिट्टी के बर्तन

जौनपुर

 21-09-2020 04:16 AM
म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

भारत विशिष्ट कलाओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है तथा यहां कि मिट्टी के बर्तन बनाने की कला विश्व भर में प्रसिद्ध है। भारत में मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार की मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जिससे विशिष्ट प्रकार के उत्पादों का निर्माण होता है। काली मिट्टी के बर्तन भी इन्हीं उत्पादों में से एक हैं। मुगल काल के समृद्ध काली मिट्टी के बर्तन बनाने की कला को आज भी निजामाबाद के लोगों द्वारा जीवित रखा गया है। निजामाबाद की इस कला को बढ़ाने में दिये गये अपने अप्रतिम प्रयास के लिए भारत सरकार द्वारा 2015 में इसे भौगोलिक चिन्‍ह (Geographical Indication) प्रदान किया गया और यह अभी भी शहर में कारीगरों के लिए रोजगार का एक प्राथमिक स्रोत बना हुआ है।
इसकी गिनती भारत की विशिष्‍ट कलाओं में होती है तथा यह व्‍यवसाय निजामाबाद, आजमगढ़ और इसके पास-पास रहने वाले लोगों के लिए आय का मुख्‍य स्‍त्रोत भी है। काली मिट्टी के बर्तन बनाने की कला का मूल गुजरात में माना जाता, जो 17वीं शताब्‍दी में मुगलों के हनुमंतगढ़ में हमले के बाद यहां आयी तथा इन्‍होंने ही इस क्षेत्र का नाम बदलकर निजामाबाद रख दिया। शहर चारों ओर से झील से घिरा होने के कारण यहां मुस्लिम महिलाओं के स्‍नान के लिए भूमिगत मार्ग बनाया गया तथा इनके स्‍नान हेतु मिट्टी के बर्तनों के निर्माण का जिम्‍मा गुजराती कुम्‍हारों को सौंपा गया। धीरे-धीरे इस कला में मुगल स्‍वरूप भी देखने को मिलने लगा। निजामाबाद के काली मिट्टी के बर्तन प्रायः स्‍थानीय महीन चिकनी मिट्टी से तैयार किये जाते हैं, जिसमें मिट्टी को विभिन्‍न आकृतियों (घरेलू उपयोग के बर्तन, धार्मिक मूर्तियां, सुराही, सजावटी सामग्री इत्‍यादि) में डालकर भट्टी में पकाया जाता है, चावल के भूसे की भट्टी का धुआं इन्‍हें एक विशिष्‍ट चमक प्रदान करता है। मिट्टी के उत्‍पादों को वनस्‍पति की सामग्री से धोकर सरसों के तेल से रगड़ा जाता है। इन बर्तनों को फूल पत्तियों के डिजाइन (Design), ज्‍यामितीय आकृति, चांदी के समान जिंक (Zinc) और मर्करी (Mercury) के पाउडर के डिजाइन से सजाया जाता है। कभी कभी इन्‍हें लाह से भी सजाया जाता है, जो गर्म करने पर इन्‍हें चमक प्रदान करती है।

इन बर्तनों पर अर्द्ध-शुष्‍कावस्‍था में बांस की टहनियों से डिजाइन बनाये जाते हैं। वर्तमान समय में निजामाबाद के लगभग 200 शिल्‍प परिवार इस कार्य में संलग्‍न हैं। वर्ष 2014 में काली मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्रामीण धरोहर विकास के लिए भारतीय ट्रस्ट’ (‘Indian Trust for Rural Heritage Development’) द्वारा निजामाबाद में ब्‍लैक पोटरी (Black Pottery) उत्‍सव का आयोजन किया गया। निजामाबाद के यह मिट्टी के बर्तन विश्‍व स्‍तर पर निर्यात भी किये जाते हैं तथा इसे भारत सरकार द्वारा 2015 में भौगोलिक चिन्‍ह (Geographical Indication) भी प्रदान किया गया। जीआई टैग के साथ, निज़ामाबाद की काली मिट्टी के बर्तनों ने एक अलग पहचान हासिल की है और इसलिए शिल्प प्रेमियों के बीच नई लोकप्रियता हासिल की है। उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के निज़ामाबाद के सोहित गाँव के सभी घर, काली मिट्टी के बर्तनों को निर्मित करके अपना जीवन यापन करते हैं। शिल्प की उत्पत्ति गुजरात के कच्छ क्षेत्र से हुई है। औरंगजेब के मुगल शासन के दौरान क्षेत्र के कुछ कुम्हार निजामाबाद चले गए। दिलचस्प बात यह है कि यह भारत का एकमात्र स्थान है, जो उत्तर-पूर्व भारत के पत्थर के बर्तन के विपरीत, मिट्टी के साथ काली मिट्टी के बर्तन बनाता है।

निज़ामाबाद में कुम्हार पास के तालाबों से स्थानीय रूप से उपलब्ध महीन बनावट वाली मिट्टी का उपयोग करते हैं। वे पारंपरिक कुम्हार के चाक पर मिट्टी को विभिन्न आकृतियों और आकारों के उत्पादों में बदल देते हैं, जिन्हें बाद में भट्टी में पकाया जाता है। यहाँ के बर्तनों में इनके रासायनिक संघटन का भी अहम् योगदान है, जिसका कारण है यहाँ पर नसीरपुर मिट्टी का प्रयोग किया जाता है जो प्लास्टिक मिट्टी (Plastic Clay) की तरह व्यवहार करती है। इनको करीब 850 डिग्री सेल्सियस (Degree Celsius) पर गर्म किया जाता है, जिससे इनको यह स्वरुप प्राप्त होता है। इनमें सजावट के लिए जिंक (Zinc) और मर्करी (Mercury) के पाउडर का भी प्रयोग किया जाता है। काली मिट्टी के बर्तन, वास्तव में, भारतीय शिल्प निर्माण का एक अनूठा उत्पाद है।

संदर्भ:
https://en.wikipedia.org/wiki/Nizamabad_black_clay_pottery
http://www.airportsindia.online/black-beauty-of-nizamabad/
https://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/0371750X.1998.10804855
https://jaunpur.prarang.in/posts/2224/azamgarh-black-pottery-near-jaunpur

चित्र सन्दर्भ:

सभी चित्रो में काली मिट्टी के बर्तन दिखाए हैं।(canva)


RECENT POST

  • मोहम्‍मद के जन्‍मोत्‍सव मिलाद से जूड़े अध्‍याय
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     27-10-2020 09:59 PM


  • कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने में चुनौती साबित हो रहा है जल संकट
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     27-10-2020 12:32 AM


  • दशानन की खूबियां
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     26-10-2020 10:38 AM


  • आश्चर्य से भरपूर है, बस्तर की असामान्य चटनी छपराह
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     25-10-2020 05:59 AM


  • नृत्‍य में मुद्राओं की भूमिका
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-10-2020 08:17 PM


  • दिव्य गुणों और अनेकों विद्याओं के धनी हैं, महर्षि नारद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-10-2020 04:58 PM


  • जौनपुर के मुख्य आस्था केंद्रों में से एक है, मां शीतला चौकिया धाम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-10-2020 09:38 AM


  • कृत्रिम वर्षा (Cloud Seeding): बादल एवम्‌ वर्षा को नियंत्रित करने का कारगर उपाय
    जलवायु व ऋतु

     21-10-2020 01:06 AM


  • मुगलकालीन प्रसिद्ध व्‍यंजन जर्दा
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     20-10-2020 08:47 AM


  • नौ रात्रियों का पर्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-10-2020 07:21 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id