जौनपुर के शाही किले का इतिहास और वास्तुकला का विवरण

जौनपुर

 13-07-2020 04:45 PM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

शाही किला जौनपुर मध्यकालीन इतिहास का एक उत्कृष्ट नमूना है। इस किले के मुख्य द्वार के बाहर मौजूद छह फीट ऊंचे स्तंभ पर सन 1376 की तिथि अंकित है और इसमें शारिकों के वंशजों के लिए भत्ते को जारी रखने के लिए किले के सभी हिंदू और मुस्लिम कोतवाल से अपील की गई है। इस पट पर फारसी भाषा में एक लेख उकेरा गया है, जिसमें यह लिखा है कि, “मैं अल्लाह और उनके नबी के नाम पर एक मुसलमान को शपथ दिलाता हूँ; और अगर वह हिंदू है तो मैं उसे राम, गंगा और त्रिवेणी के नाम की शपथ दिलाता हूं कि यदि वह इस लेख पर अमल नहीं करता है तो वह भगवान अथवा पैगंबर द्वारा शापित हो जाएगा और यदि उन्होंने चाहा तो उसके चेहरे को पुनरुत्थान के दिन काला कर दिया जाएगा और वह नर्क में जाएगा।”

इस लेख में कुल 17 पंक्तियाँ हैं, जो कि हिन्दू और मुस्लिम कोतवालों को शर्की वंशजों का प्रवेश भत्ता जारी रखने का परामर्श देता है, परन्तु इसके कोई ठोस प्रमाण नहीं उपलब्ध हैं। सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुगलक ने राठौर राजाओं (कन्नौज) के मंदिरों और महलों की भौतिकवादी सामग्री का उपयोग करके इस किले को बनवाया था। किला पहले से मौजूद एक टीले पर बना था। मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान किले का जीर्णोद्धार और विकास किया गया था। किले में एक विशाल प्रवेश द्वार है, जो 14 मीटर ऊँचा है, इसके दोनों ओर कक्ष हैं। मुगल साम्राज्य के दौरान, अकबर के गवर्नर मुनीम खान ने पूर्वी प्रवेश द्वार की ओर एक अतिरिक्त प्रांगण बनवाया था, जिसमें 11 फीट ऊंचा प्रवेश द्वार है। किला एक अनियमित चतुर्भुज के रूप में है, जिसके पूर्व में मुख्य प्रवेश द्वार है और पश्चिम में एक अतिरिक्त निकास द्वार है। इसके द्वार, दीवारें और अन्य संरचनाएं राख के चौकोर पत्थर से बनी हैं।

इस किले में कुछ अत्यंत ही महत्वपूर्ण इमारतें भी स्थित हैं, जिनमें से हमाम या भूलभुलैया, बंगाल शैली की मस्जिद (जिसमें तीन गुम्बद हैं) और सामने एक मीनार भी स्थित है, जिसपर कुरान की आयतें लिखी हुई हैं। भूलाभुलैया की संरचना तुर्की स्नान या हमाम का एक आदर्श प्रतिरूप है। यह ठोस संरचना आंशिक रूप से भूमिगत है, जिसमें प्रवेश और निर्गम प्रणाली, गर्म और ठंडे पानी और शौचालय जैसी अन्य जरूरतों की व्यवस्था है। वहीं विशिष्ट बंगाल शैली में निर्मित किले के भीतर की मस्जिद 39.40 x 6.65 मीटर की ऊँची इमारत है, जिसमें तीन छोटे गुंबद हैं।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में शाही किले का मुख्य प्रवेश द्वार और उसके बाहर स्थापित स्तम्भ को दिखाया गया है। (Prarang)
2. दूसरे चित्र में अकबर द्वारा बनवाया गया प्रवेश द्वार दिखाया गया है। (Prarang)
3. तीसरे चित्र में शाही किले के प्रवेश द्वार और शाही प्रांगण के प्रवेश द्वार को दिखाया गया है। (Prarang)
4. चौथे चित्र में शाही किले में स्थित मस्जिद और कुरान की आयतों के उत्कीर्णन वाली मीनार को दिखाया गया है। (Prarang)
5. पांचवे चित्र में शाही किले के सूचनापट के साथ हमाम या भूलभुलैया को दिखाया गया है। (Prarang)
6. अंतिम चित्र में मस्जिद के सामने की मीनार का विशुद्ध चित्रण है। (Prarang)

संदर्भ :-
https://www.jaunpuronline.in/city-guide/shahi-qila-in-jaunpur
https://military.wikia.org/wiki/Shahi_Qila,_Jaunpur
https://en.wikipedia.org/wiki/Shahi_Qila,_Jaunpur
https://www.jaunpurcity.in/2013/12/what-is-written-on-pillar-placed.html



RECENT POST

  • कर्मयोगी कृष्ण के विविध स्वरूप
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     11-08-2020 09:54 AM


  • क्षमतानुसार दान देने पर केंद्रित है, पीटर सिंगर का विचार प्रयोग ‘द लाइफ यू कैन सेव’
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-08-2020 06:45 PM


  • भारत में सबसे बड़ी ताजे पानी की झील
    नदियाँ

     09-08-2020 03:34 AM


  • क्या पक्षियों को पालतू बनाना उचित है?
    पंछीयाँ

     08-08-2020 06:05 PM


  • महाभारत और मुगल काल का लोकप्रिय खेल है चौपड़ या चौसर
    हथियार व खिलौने

     07-08-2020 06:25 PM


  • क्या रहा मनुष्य और उसकी इन्द्रियों के अनुसार, अब तक प्रारंग और जौनपुर का सफर
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     07-08-2020 06:27 PM


  • क्या है, कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण का मतलब ?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     06-08-2020 09:30 AM


  • गोमती नदी के ऊपर बने शाही पुल का इतिहास
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     05-08-2020 09:30 AM


  • तंदूर का इतिहास
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     04-08-2020 08:45 AM


  • दुनिया में सबसे अलग जनजाति है
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     02-08-2020 05:36 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id