सूफीवाद पर सबसे प्राचीन फारसी ग्रंथ : कासफ़-उल-महज़ोब

जौनपुर

 07-07-2020 04:55 PM
ध्वनि 2- भाषायें

जौनपुर पुराने समय से ही उर्दू, सूफी ज्ञान और संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र था। शारकी वंश के दौरान यह मुसलमानों और हिंदुओं के बीच अपने उत्कृष्ट सांप्रदायिक संबंधों के लिए जाना जाता था। 1480 में सुल्तान सिकंदर लोदी ने इस पर विजय प्राप्त की और कई शारकी स्मारकों को नष्ट कर दिया। लेकिन कई महत्वपूर्ण मस्जिद बच गई, विशेष रूप से अटाला मस्जिद, जामा मस्जिद और लाल दरवाजा मस्जिद। जौनपुर की ये मस्जिदें एक अद्वितीय वास्तुशिल्प शैली प्रदर्शित करती हैं, जिसमें परंपरागत हिंदू और मुस्लिम प्रारूपों का संयोजन देखने को मिलता है। जौनपुर में सक्रिय रह चुके चिश्ती क्रम के सूफ़ीवाद का अली हजवेरी (एक प्रसिद्ध सूफी संत) की पुस्तक कासफ़-उल-महज़ोब में भी काफी महत्व देखने को मिलता है।

कासफ़-उल-महज़ोब सूफीवाद पर सबसे प्राचीन और अद्वितीय फारसी ग्रंथ है, जिसमें अपने सिद्धांतों और प्रथाओं के साथ सूफीवाद की पूरी व्यवस्था है। साथ ही अली हजवेरी स्वयं अपने लेख के प्रति व्याख्यात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। इसमें रहस्यमय विवादों और वर्तमान विचारों को भी चित्रित किया गया है, जिन्हें अनुभवों द्वारा प्रस्तुत करके स्पष्ट किया गया है। इस पुस्तक ने कई प्रसिद्ध सूफी संतों के लिए ‘वसीला' (आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम) के रूप में काम किया है। यही कारण है कि चिश्ती आदेश के एक प्रमुख संत, मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी ने एक बार कहा था कि एक महत्वाकांक्षी मुरीद जिसके पास मुर्शिद नहीं है, उसे अली हुज्जिरी की किताब काशी उल-महजोब पढ़ना चाहिए, क्योंकि वह उसे आध्यात्मिक रूप से मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

इस पुस्तक की रचना करने में, अली हुज्जिरी को अपनी किताबों के खो जाने से असुविधा हुई थी, जो उन्होंने ग़ज़ना, अफगानिस्तान में छोड़ी थी। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि इस पुस्तक को लिखने में उन्हें काफी समय लगा होगा। उन्हें ज्ञान प्राप्त करने के लिए सीरिया, इराक, फारस, कोहिस्तान, अजरबैजान, तबरिस्तान, करमान, ग्रेटर खोरासन, ट्रान्सोक्सियाना, बगदाद जैसी जगहों पर कम से कम 40 वर्षों तक यात्रा करने के लिए जाना जाता है। बिलाल (दमिश्क, सीरिया) और अबू सईद अबुल खैर (मिहान गांव, ग्रेटर खोरासन) के मंदिर में उनकी यात्रा का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान कई सूफियों से मुलाकात थी। उनसे मिलने वाले सभी सूफी विद्वानों में से, उन्होंने दो नामों “शेख अबुल अब्बास अहमद इब्न मुहम्मद अल-अश्कानी और शेख अबुल कासिम अली गुरगानी” का उल्लेख बेहद सम्मान के साथ किया है।

मूल रूप से फारसी में लिखी गई इस पुस्तक का पहले ही विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। काशफ-उल-महजोब की पांडुलिपियां कई यूरोपीय पुस्तकालयों में संरक्षित हैं। इसे उस समय के भारतीय उपमहाद्वीप के लाहौर में लिथोग्राफ किया गया था। रेनॉल्ड ए. निकोल्सन (Reynold A. Nicholson) द्वारा कासफ़-उल-महज़ोब का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था। कासफ़-उल-महज़ोब अली हुज्जिरी का एकमात्र कार्य है, जो आज तक बना हुआ है। इस पुस्तक में, अली हुज्जिरी सूफीवाद की परिभाषा को संबोधित करते हैं और कहते हैं कि इस युग में, लोग केवल आनंद की तलाश में रहते हैं और भगवान को संतुष्ट करने के लिए दिलचस्पी नहीं रखते हैं।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र के पार्श्व में जौनपुर का एक प्राचीन चित्र दिख रहा है और अग्र में एक सूफी की छवि दिखाई दे रही है। चित्र में जौनपुर में प्राचीन समय से ही सूफीवाद के महत्व को प्रदर्शित किया गया है। (Prarang)
2. दूसरे चित्र में कशफ़ुल महजूब के आवरण पृष्ठ दिखाए गए हैं। (Prarang)
3. तीसरे चित्र में कशफुल महजूब के शीर्ष पृष्ठ को दिखाया गया है। (Googlebooks)
4. चौथे चित्र में जौनपुर में सूफीवाद का इदारा (घर) दिखाया गया है। (Prarang)

संदर्भ :-
https://en.wikipedia.org/wiki/Ali_Hujwiri
https://en.wikipedia.org/wiki/Kashf_ul_Mahjoob
https://en.wikipedia.org/wiki/Jaunpur,_Uttar_Pradesh
https://www.jaunpurcity.in/2014/03/jaunpur-was-then-major-center-of-urdu.html



RECENT POST

  • औषधीय गुणों के साथ रेशम उत्पादन में भी सहायक है, शहतूत की खेती
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     30-10-2020 04:16 PM


  • भारत में लौह-कार्य की उत्पत्ति
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-10-2020 05:43 PM


  • पंजा शरीफ में भी मौजूद है पैगंबर मुहम्मद साहब कदम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     29-10-2020 09:50 AM


  • मोहम्‍मद के जन्‍मोत्‍सव मिलाद से जूड़े अध्‍याय
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     27-10-2020 09:59 PM


  • कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने में चुनौती साबित हो रहा है जल संकट
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     27-10-2020 12:32 AM


  • दशानन की खूबियां
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     26-10-2020 10:38 AM


  • आश्चर्य से भरपूर है, बस्तर की असामान्य चटनी छपराह
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     25-10-2020 05:59 AM


  • नृत्‍य में मुद्राओं की भूमिका
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-10-2020 08:17 PM


  • दिव्य गुणों और अनेकों विद्याओं के धनी हैं, महर्षि नारद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-10-2020 04:58 PM


  • जौनपुर के मुख्य आस्था केंद्रों में से एक है, मां शीतला चौकिया धाम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-10-2020 09:38 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id