अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक है पशुधन

जौनपुर

 10-06-2020 10:30 AM
स्तनधारी

पशुधन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है इसलिए मत्स्य मंत्रालय के तहत पशुपालन और दुग्ध विभाग को भी पशुधन और इससे सम्बंधित सटीक सूचनाओं के संग्रह और उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में और अधिक सुधार लाने और प्रभावी कार्यान्वयन तथा निगरानी हेतु किसी भी कार्यक्रम की उचित योजना और निर्माण के लिए, प्रत्येक निर्णायक चरण में वैध आंकडों की आवश्यकता होती है। देश में इस तरह के आंकड़ों का मुख्य स्रोत पशुधन जनगणना है। 1919 से समय-समय पर देश भर में पशुधन की जनगणना की जाती है। जनगणना में आमतौर पर सभी पालतू जानवरों को शामिल किया जाता है। भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद में पशुधन क्षेत्र का कुल योगदान लगभग 4.11% है।

2014-15 के दौरान मौजूदा कीमतों पर पशुधन क्षेत्र से उत्पादन का मूल्य लगभग 537535 करोड़ रुपये था जोकि कृषि, मत्स्य पालन और वानिकी क्षेत्र से उत्पादन के मूल्य का लगभग 25.63 प्रतिशत था। पशुधन क्षेत्र मूल स्थिति में 110 लाख लोगों को तथा सहायक स्थिति में 90 लाख लोगों को नियमित रोजगार प्रदान करता है। फसल क्षेत्र में 35 प्रतिशत की तुलना में पशुधन क्षेत्र में महिलाएं 70 प्रतिशत श्रम शक्ति का गठन करती हैं। पूरे देश में 18 वीं पशुधन जनगणना अक्टूबर 2007 में की गयी थी जिसने 2007 में कुल पशुधन आबादी को 5,297 लाख और मुर्गीपालन पक्षियों की आबादी को 6,488 लाख पर रखा। इस जनगणना के अनुसार पूरे विश्व में भैंस की जनसंख्या के लिए भारत का स्थान पहला, मवेशियों और बकरियों के लिए दूसरा, भेड़ के लिए तीसरा, बत्तख के लिए चौथा, मुर्गियों के लिए पांचवा, और ऊंट के लिए छटवां है। 2015-16 के दौरान पशुधन ने 1379.7 लाख टन दूध, 6973 करोड अंडे और 447.3 लाख किलोग्राम ऊन, 26.8 लाख टन मांस और 94.5 लाख टन मछली का योगदान दिया।

2012 में देश में मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर, घोड़े, खच्चर, गधे, ऊंट, याक आदि को मिलाकर कुल पशुधन आबादी 5120.5 लाख थी। इस वर्ष जहां पिछली जनगणना की तुलना में कुल पशुधन आबादी में लगभग 3.33% की कमी आयी वहीं गुजरात (15.36%), उत्तर प्रदेश (14.01%), असम (10.77%), पंजाब (9.57%) बिहार (8.56%), सिक्किम (7.96%), मेघालय (7.41%), और छत्तीसगढ़ (4.34%) में पशुधन की आबादी में काफी वृद्धि हुई। 2012 में कुल गोजातीय जनसंख्या (मवेशी, भैंस, मिथुन और याक) 2,999 लाख थी, जिसने पिछली जनगणना (2007) के मुकाबले 1.57% की गिरावट को दर्शाया। गायों और भैंसों में दुधारू पशुओं की संख्या 6.75% की वृद्धि के साथ 1110.9 लाख से बढ़कर 1185.9 लाख हुई। इस वर्ष मादा मवेशियों की कुल संख्या 1,229 लाख थी जोकि पिछली जनगणना की तुलना में 6.52% बढ़ी। इसी प्रकार महिला भैंस की कुल संख्या 925 लाख थी जिसमें पिछली जनगणना के मुकाबले 7.99% की वृद्धि हुई।

इस वर्ष भैंस की आबादी में 3.19% की वृद्धि देखी गयी और आबादी 1,053 लाख से बढ़कर 1,087 लाख हुई। 2012 में जहां विदेशी दुधारू मवेशियों की आबादी 34.78% की वृद्धि के साथ 144 लाख से बढ़कर 194.2 लाख हुई वहीं देसी दुधारू मवेशियों की आबादी 0.17% की मामूली वृद्धि के साथ 480.4 लाख से बढ़कर 481.2 लाख हुई। देश की कुल भेड़ आबादी 650.6 लाख थी। पिछली जनगणना की तुलना में बकरी की आबादी में 3.82% की गिरावट आई और देश में कुल बकरी आबादी 1351.7 लाख हुई। इस वर्ष पिछली जनगणना की तुलना में देश में कुल सूअरों की आबादी में 7.54% की कमी आई। पिछली जनगणना की तुलना में घोड़े और पोनी (Pony-छोटा घोडा) की आबादी में 2.08% की वृद्धि देखी गयी।

इसी प्रकार देश में इस वर्ष कुल खच्चरों की आबादी में 43.34% की वृद्धि देखी गयी। पिछली जनगणना की तुलना में ऊंट की आबादी 22.48% की कमी के साथ 4 लाख हुई। इस वर्ष देश में मुर्गी की कुल आबादी में पिछली जनगणना की तुलना में 12.39% की वृद्धि हुई। 2012 में कुल मवेशियों का योगदान, कुल पशुधन आबादी का लगभग 37.28% था। जनगणना के अनुसार देश में कुल मवेशियों की संख्या इस समय 1909 लाख थी। 10.27 प्रतिशत हिस्से के साथ इस वर्ष मवेशियों की कुल आबादी मध्य प्रदेश में सबसे अधिक थी जिसके बाद 10.24 प्रतिशत के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर था। इस सूची में 8.65 प्रतिशत के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर रहा। 2019 में हुई जनगणना के अनुसार कुल पशुधन आबादी 5357.8 लाख और मुर्गी पालन पक्षियों की आबादी 8518.1 लाख थी।

2012 और 2019 में प्रमुख राज्यों की पशुधन जनसंख्या को आप निम्नलिखित तालिका के माध्यम से समझ सकते हैं:

20 वीं पशुधन जनगणना अक्टूबर, 2018 के दौरान शुरू की गई थी। यह जनगणना देशभर के लगभग 6.6 लाख गांवों और 89 हजार शहरी वार्डों (Wards) में की गई थी, जिसमें 27 करोड़ से अधिक घरों और गैर-घरों को आवरित किया गया था। 20 वीं पशुधन की जनगणना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि यह जानवरों और मुर्गीपालन पक्षियों की नस्ल-वार संख्या को अधिकृत करने के लिए डिज़ाइन (Design) की गयी थी। उत्तर प्रदेश राज्य में 2012 और 2019 में पशुधन जनसंख्या क्रमशः 687 और 678 लाख थी।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में सभी पशुधन का एकल चित्र प्रस्तुत किया गया है।
2. दूसरे चित्र में पालतू गाय के एक झुण्ड का चित्र है।
3. तीसरे चित्र में घोड़ों का एक समूह है।
4. चौथे चित्र में गाय का दूध निकालते हुए चित्रण किया गया है।
5. पांचवे चित्र में मुर्गों को दिखाया गया है।
6. छटे चित्र में चारा चरने जाती हुई बकरियों का चित्रण है।
7. अंतिम चित्र में भेड़ों का एक समूह दिखाई दे रहा है।

संदर्भ:
1. https://www.ijcmas.com/6-11-2017/Jitendra%20Kumar%20Singh,%20et%20al.pdf
2. https://vikaspedia.in/agriculture/agri-directory/reports-and-policy-briefs/20th-livestock-census
3. http://dadf.gov.in/sites/default/filess/Livestock%20%205_0.pdf



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