क्यों रखे जाते हैं, रमज़ान के पवित्र महीने में रोजे?

जौनपुर

 23-04-2020 06:15 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

मुस्लिम धर्म में रमज़ान या रमदान का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस पवित्र महीने के प्रत्येक दिन मुस्लिम लोगों द्वारा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक उपवास या रोजे कठिन नियमों के साथ रखे जाते हैं। उपवास में भोजन और पेय पदार्थों के सेवन से दूरी व्यक्ति के संयम को इंगित करती है। रमजान के महीने में रोजे करना दूसरे वर्ष में शबान (Sha‘bān) के महीने के दौरान अनिवार्य किया गया था, जब मुस्लिम मक्का से मदीना चले गए थे। इस पवित्र महीने में रोजे रखना इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक स्तंभ का पालन करना है। रमजान के महीने में रोजे या उपवास करने के पीछे कई कारण निहित हैं। पहला ये कि यह इस्लाम धर्म के 5 मुख्य सिद्धांतों में से एक सिद्धांत है। ये पांच सिद्धांत अल्लाह पर पूर्ण विश्वास, पांच दैनिक प्रार्थना, धर्मार्थ दान, हज और रोजे हैं। इस्लाम का पालन करने के लिए इन सभी सिद्धांतों का पालन आवश्यक है। अगर कोई व्यक्ति इसका पालन कर रहा है तो वह इस्लामी विश्वासी के रूप में पहचाना जायेगा। रमजान के महीने के दौरान उपवास सभी सक्षम मुसलमानों के लिए अनिवार्य है। दूसरा कारण धर्मपरायणता प्राप्त करने के लिए है। मनुष्य के रूप में जीव पापों के प्रति अतिसंवेदनशील होता है और इस्लाम द्वारा स्थापित सीमाओं का पालन और उपवास करना धर्मनिष्ठ होना और खुद को सांसारिक सुखों से रोकना सिखाता है। यह विचार सुनिश्चित करने के लिए कि मनुष्य भौतिकवादी इच्छाओं के लिए नहीं भटक रहा है, और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में सक्षम हो सकता है, इसलिए उसे इसके लिए एक निश्चित प्रशिक्षण अवधि की आवश्यकता होती है, जो उसे रमज़ान के महीने में प्राप्त होती है। इस दौरान मुसलमानों के पास यह जानने और सीखने का पूरा समय होता है कि कैसे अपने पापों का अंत किया जाए, अच्छे कार्य किये जाए और कैसे अल्लाह का आशीर्वाद प्राप्त किया जाये। लयलात अल-कदर (Laylat al-Qadr) को शक्ति की रात के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस रात के साथ विशेष आशीर्वाद जुड़े हुए हैं, जिनका लाभ लेने के लिए रोजे आवश्यक हैं। अपने पिछले पापों के लिए क्षमा मांगने हेतु भी रमज़ान के दौरान रोजे रखे जाते हैं।

रमज़ान एक ऐसा महीना है जब कई प्रार्थनाएँ अल्लाह द्वारा सुनी जाती हैं और उन्हें पूरा किया जाता है। रमज़ान में रोजे रखने की भावना थवाब (Thawāb) की अवधारणा से भी जुड़ी हुई है। यह सवाब (Sawāb) के नाम से भी जाना जाता है, जोकि अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है 'इनाम'। इस्लामिक विश्वदृष्टि के संदर्भ में, थवाब आध्यात्मिक योग्यता या पुरस्कार को संदर्भित करता है जो अच्छे कर्मों और पवित्रता के प्रदर्शन से उत्पन्न होता है। आमतौर पर किये गए सभी अच्छे कार्य इनाम प्राप्त करने में योगदान देते हैं, लेकिन एक मुसलमान के लिए कुछ ऐसे अच्छे कार्य हैं जो दूसरों की तुलना में अधिक फायदेमंद होते हैं। इस्लाम में अच्छे कार्यों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, पहला आध्यात्मिक रूप से किया गया अच्छा कार्य और दूसरा नैतिक रूप से किया गया अच्छा कार्य। आध्यात्मिक रूप से किये गए अच्छे कार्य के बिना नैतिक अच्छाई नहीं हो सकती। इसलिए पहले आध्यात्मिक रूप से अच्छे कार्य किये जाने चाहिए। आध्यात्मिक अच्छे कार्यों में प्रार्थना, प्रार्थना के बाद या किसी अन्य समय में परमात्मा का स्मरण, निर्धारित धर्मार्थ (जकात), तथा दूसरों के साथ मिलकर कुरान का पाठ करना शामिल हैं, जबकि नैतिक अच्छाई में माता-पिता को प्यार और उनकी सेवा करना, बीमार लोगों की देख-रेख करना, रिश्तेदारी निभाना, धर्मार्थ कार्यों में समझदारी से पैसा खर्च करना, परिवार को उनके उचित अधिकार दिलाना आदि कार्य आते हैं। इन सभी कार्यों को जो बिना किसी स्वार्थ के करता है उसे अल्लाह द्वारा ईनाम की प्राप्ति होती है। रमजान के महीने के दौरान रोजे करने का उल्लेख कुरान के तीन छंदों में भी विशेष रूप से किया गया है। जिसके अनुसार - उपवास तुम्हारे लिए निर्धारित किया गया है क्योंकि यह तुमसे पहले उन लोगों के लिए निर्धारित किया गया था, जिससे तुम आत्म-संयम करना सीख सकते हो। निश्चित दिनों के लिए उपवास करो, लेकिन यदि आप में से कोई बीमार है, या यात्रा पर है, तो निर्धारित संख्या का उपवास बाद के दिनों से किया जाना चाहिए। जो लोग मुश्किल से ऐसा कर सकते हैं, उनके लिए यह एक जरूरतमंद व्यक्ति के खाने के लिए एक फिरौती की भाँति है। लेकिन वह जो अपनी मर्जी से अधिक दे देगा, - यह उसके लिए बेहतर है। और यह तुम्हारे लिए बेहतर है कि तुम उपवास करो।

रमजान के इन उपवासों को करने के लिए कुछ नियम भी निर्धारित किये गए हैं जैसे - रोजे के दौरान कुछ भी खाने या पीने से बचना, यौन गतिविधि में संलग्न न होना। पवित्र उपवास के पालन के लिए अनैतिक कामों से बचना आवश्यक है। सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्त तक उपवास की भावना मन में होनी चाहिए। यदि भोजन या पेय पदार्थों के सेवन और यौन गतिविधि में संलग्न न होने के पीछे उपवास की भावना निहित नहीं है तो वह उपवास मान्य नहीं होगा। उपवास केवल वे लोग ही कर सकते हैं जिन्हें इसकी अनुमति मिली है अर्थात एक ऐसी स्थिति से मुक्त होना आवश्यक है जो उपवास की वैधता को रोके। दुनिया भर में मुस्लिम समाज में रमजान का पालन एक समान तरीके से किया जाता है किन्तु सुन्नियों और शिया समुदाय में रमजान का पालन करने में कुछ अंतर है। जैसे सुन्नी समुदाय अपना उपवास भले ही सूर्यास्त के बाद तोड़ते हैं किन्तु यह वो समय होता है जब आकाश में प्रकाश मौजूद होता है। शिया समुदाय पूरी तरह से अंधेरा हो जाने पर अपने उपवास का समापन करते हैं। सुन्नी समुदाय के विपरीत शिया मुसलमान एक अतिरिक्त छुट्टी भी मनाते हैं। वे मोहम्मद के दामाद अली का स्मरण करने के लिए तीन दिन का उत्सव मनाते हैं। सूफी मुसलमानों के लिए रमजान का पालन थोड़ा अलग है। वे उपवास करते समय समान नियमों का पालन करते हैं, लेकिन आधी रात को अतिरिक्त प्रार्थना करते हैं। उनके द्वारा की जाने वाली प्रथा को धिक्र (Dhikr) कहा जाता है, जिसमें वे 99 बार अल्लाह का नाम जपते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे अल्लाह के लिए अपना प्यार दिखाना और उनके साथ एक व्यक्तिगत संबंध रखना चाहते हैं, अन्य मुसलमानों के विपरीत जो भगवान के प्रकोप से डर सकते हैं। कई मुस्लिम-बहुल देशों में रमज़ान के महीने में शराब की बिक्री पर अंकुश लगा दिया जाता है। साथ ही यह सीमित किया जाता है कि इसे कब और किसे बेचा जा सकता है।

कुछ देशों में, जो लोग दिन के दौरान सार्वजनिक रूप से भोजन करते हैं, उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है या जेल भी भेजा जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात जहां भारी मात्रा में पश्चिमी आबादी रहती है, में रेस्तरां दिन के दौरान भोजन करने वाले ग्राहकों को छिपाने के लिए पर्दे का उपयोग करते हैं। वहीं कुछ जगह दिन के दौरान रेस्तरां बंद कर दिए जाते हैं। सूर्यास्त के बाद सभी मुस्लिमों द्वारा उपवास खजूर और पानी के साथ तोड़ा जाता है।

चित्र (सन्दर्भ):
1.
मुख्य चित्र में रमजान की सजावट में महत्वपूर्ण लालटेन और पवित्र चाँद के साथ मस्जिद को दिखाया गया है, जो रमजान की रूहानी पवित्रता को प्रस्तुत कर रहें हैं।
2. दूसरे चित्र में प्रार्थना करते एक रमजानी उपासक को दिखाया गया है।
सन्दर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Fasting_during_Ramadan
2. https://bit.ly/3bAL8Sw
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Thawab
4. https://globalnews.ca/news/5288243/why-muslims-fast-during-ramadan/
5. https://bloom.bg/2zkxmVD



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