ऊर्जा संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता को कम कर सकती है, पशु अपशिष्ट से प्राप्त ऊर्जा

जौनपुर

 17-04-2020 10:25 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

दैनिक जीवन को सूचारू रूप से चलाने के लिए ऊर्जा संसाधनों की हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, किंतु निरंतर किया जा रहा ऊर्जा संसाधनों का दोहन जहां भविष्य में इनकी पहुंच में बाधा उत्पन्न कर रहा है, वहीं पर्यावरण प्रदूषण का कारण भी बन रहा है। इस समस्या से उभरने में पशुधन बहुत सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इनसे प्राप्त खाद का उपयोग ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। चूंकि भारत में ऊर्जा की मांग बढ़ती जा रही है अतः उसे पूरा करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने एक महत्वाकांक्षी ढांचा बनाया है, जो स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर है। भारत (जहां दुनिया के एक तिहाई मवेशी हैं) में पशु खाद अत्यधिक मात्रा में पायी जाती है। खाद में मीथेन (Methane) की मात्रा भी बहुत अधिक होती है जिससे इसे आसानी से बायोगैस (Biogas) में परिवर्तित किया जा सकता है। भारत में पशुधन की आबादी 2012 में 512 मिलियन से 4.6% बढ़कर 2019 में लगभग 536 मिलियन हुई। हालांकि कुल मिलाकर मवेशियों की संख्या में वृद्धि मामूली सी है, लेकिन गाय, जो कुल पशुधन आबादी का एक-चौथाई से अधिक है, ने 18% की प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है। राज्य-वार, देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक पशुधन आबादी दर्ज की गई है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) वर्तमान समय में एक राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम (National Biogas and Manure Management Program) चला रहा है तथा इनका मत है कि मरम्मत योजनाओं के लिए अधिक धन आवंटन के साथ एक विकेन्द्रीकृत प्रबंधन दृष्टिकोण, परिवार आधारित बायोगैस संयंत्रों (biogas plants) के लिए भुगतान योजनाओं का पुनर्गठन, अधिक सार्वजनिक बायोगैस संयंत्रों का निर्माण, और दुग्ध उद्योग के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भारत को क्रमशः व्यक्तिगत, सार्वजनिक, और औद्योगिक स्तर पर अपनी बायोगैस क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। भारत में अपने बायोगैस उत्पादन का विस्तार करने की क्षमता है लेकिन इसके लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को ठोस नीतिगत प्रयास करने की आवश्यकता होगी। हालांकि सरकार अक्षय ऊर्जा, विशेष रूप से बायोगैस, में अपनी रुचि दिखा रही है किन्तु संरचनात्मक दोष और ध्यान की कमी बायोगैस को तेजी से बढ़ने से रोक रहे हैं। जिले के अधिकारियों की भागीदारी सफल बायोगैस नीति का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह अन्य अधिक केंद्रीकृत ऊर्जा स्रोतों से स्वाभाविक रूप से भिन्न है। बायोगैस संयंत्र उत्तम होते हैं क्योंकि वे साफ होते हैं और उनके लिए बहुत अधिक पूंजी की आवश्यकता नहीं होती। यदि पूरे देश में बायोगैस तकनीक का प्रसार हो तो भारत सरकार अपनी एलपीजी सब्सिडी (LPG subsidy) को भी कम कर सकती है। भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रयासों में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा सबसे अग्रणी हैं, लेकिन भारत के महत्वाकांक्षी स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में खाद से प्राप्त बायोगैस भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यदि भारत खाद को पूरी तरह से उपयोग करने में सक्षम है, तो देश 8.75 बिलियन क्यूबिक (billion cubic) मीटर बायोगैस का उत्पादन करने में सक्षम होगा जिससे 11.67 GWh (Gigawatt Hour) उत्पन्न किया जा सकेगा। यह नवीकरणीय ऊर्जा के लिए भारत के 2022 के लक्ष्य का लगभग 7% होगा। अक्षय ऊर्जा के अन्य रूपों में बुनियादी ढांचे की लागत उच्च है तथा इन्हें ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लगाने में अधिक समय भी लगता है। बायोगैस संयंत्र इन क्षेत्रों को बिजली देने के अपेक्षाकृत सस्ते तरीके हैं। वे खाना पकाने के लिए बायोमास (Biomass) के सीधे जलने पर निर्भरता को कम करते हैं, जो घरेलू वायु प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है। इसके अलावा, चूँकि भारत में CNG (compressed natural gas) वाहनों के लिए बाजार बढ़ता जा रहा है इसलिए डेयरी उद्योग CNG आपूर्तिकर्ताओं के रूप में एक विशिष्ट भूमिका को पूरा कर सकता है। पारंपरिक गैस और कोयला ऊर्जा को बदलने के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की तलाश की जा रही है क्योंकि वे पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं। स्वच्छ ऊर्जा के कुछ सामान्य स्रोतों में सौर, पवन, जल और भूतापीय ऊर्जा शामिल हैं। हालांकि, स्वच्छ ऊर्जा के लिए एक और संभावित मजबूत उपाय गाय की खाद भी है, जोकि एक जैव ईंधन के रूप में कार्य करती है। जैव ईंधन प्रायः पौधों और जानवरों से प्राप्त होता है और इसके कई प्रकार के अनुप्रयोग होते हैं। गाय की खाद का उपयोग बिजली और ईंधन दोनों के लिए किया जा सकता है। दोनों अनुप्रयोगों में, ऊर्जा उत्पादन के पीछे की अवधारणा मीथेन (Methane) गैस का संग्रह है जो खाद का एक उत्पाद है। गाय की खाद से मीथेन गैस एकत्र करने की बहुत बड़ी संभावना है। कुछ दुग्ध फार्म (farms ), दूध के उत्पादन साथ-साथ अन्य लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। इन फार्मों ने एक मशीन में निवेश किया है, जिसे डाइजेस्टर (digester) कहा जाता है। यह डाइजेस्टर गाय की खाद को एक ढेर में जमा करता है। दुकानें और घरों की बची सब्जियों को डाइजेस्टर में डाला जाता है, और सामग्री को एक साथ मिलाया जाता है। यह मिश्रण सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए एक अच्छी जगह के रूप में कार्य करता है, तथा इस प्रक्रिया से मीथेन गैस का उत्पादन होता है। मीथेन गैस को एक इंजन (engine) में एकत्रित किया जाता है और इसे ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इस ऊर्जा का उपयोग तब घरों में बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि देश भर में ऐसे कम ही डेयरी फार्म हैं जिन्होंने डाइजेस्टर में निवेश कर इस पद्धति का उपयोग किया है।

इस पद्धति के उपयोग से ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बना जा सकता है, जिससे बिजली के अधिक बिलों का भुगतान करने की आवश्यकता को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा इस ऊर्जा को बेच कर भी लाभ कमाया जा सकता है। लगभग 1000 गायों वाले फार्म में, प्रतिदिन 250 से 300 किलोवाट (Kilowatt) ऊर्जा का उत्पादन करने की क्षमता है। इससे 300 घरों को ऊर्जा दी जा सकती है। ईंधन के लिए गाय की खाद के उपयोग ने टोयोटा जैसी कार कंपनी (car companies) की रुचि भी बढ़ाई है। कंपनी के पास एक ऊर्जा संयंत्र बनाने की योजना है जो गाय की खाद से मीथेन को हाइड्रोजन और ऊर्जा में बदल देता है। हाइड्रोजन का उपयोग विशेष रूप से टोयोटा की ईंधन सेल हाइड्रोजन कारों (fuel cell hydrogen cars) को ईंधन देने के लिए किया जा सकता है। गाय की खाद से मीथेन गैस का उपयोग गैसोलीन (gasoline) से चलने वाली कारों और घरों में बिजली उत्पन्न करने के लिए प्राकृतिक गैस का एक विकल्प है। डोमिनियन एनर्जी (Dominion Energy), जो अमेरिका के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक है, भी पशुधन कचरे को बिजली में परिवर्तित करके अच्छे उपयोग के लिए इस्तेमाल करना चाहता है, क्योंकि यह एक ही समय में, प्रदूषण को भी कम करता है। इसके लिए उसने अपशिष्ट से ऊर्जा परियोजना को वंगार्ड रिन्यूएबल्स (Vanguard Renewables) और अमेरिका के डेयरी फार्मर्स (Dairy Farmers) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी के तहत शुरू किया है। भारत में गाय की अत्यधिक उपलब्धता है। इनसे प्राप्त गोबर का उपयोग प्रायः खाद बनाने के लिए किया जाता है। क्योंकि भारत में लकड़ियों का अभाव निरंतर बढ़ता जा रहा है तथा ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता अत्यधिक बढ़ती जा रही है उस स्थिति में गाय के गोबर का उपयोग ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

संदर्भ:
1.
http://www.sciencepolicyjournal.org/uploads/5/4/3/4/5434385/narayan_2018_jspg.pdf
2. http://large.stanford.edu/courses/2017/ph240/xiao-m2/
3. https://bit.ly/2z9EJiL
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Cow_dung
5. https://bit.ly/3bk0ryO
चित्र सन्दर्भ:
1.
Needpix.com - मुख्य चित्र में बायोगैस संयंत्र को दिखाया गया है।
2.Pixabay.com - दूसरे चित्र में जैविक खाद को प्रदर्शित किया है।



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