क्या निगरानी उपकरण (surveillance tool) कर रहे हैं व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिकार का उल्लंघन

जौनपुर

 07-04-2020 05:00 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

कोरोना विषाणु (Corona virus) का संक्रमण वर्तमान समय के लिए एक भयावह चुनौती बन गया है, तथा इस चुनौती का सामना करने के लिए विभिन्न देशों की सरकारें हर तरह का सम्भव प्रयास कर रही हैं। इन प्रयासों में संक्रमित व संदिग्ध लोगों पर निगरानी रखने के तरीके को बहुत अधिक महत्व दिया जा रहा है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इजरायल (Israel), दक्षिण कोरिया (South Korea), चीन (China) जैसे अनेक देशों की सरकारों द्वारा निगरानी उपकरणों को बहुतायत में अपनाया गया है, जिनका उपयोग कोरोना विषाणु के प्रकोप को ट्रैक (track) करने हेतु किया जा रहा है। चीन की यदि बात की जाये तो यहां की सरकार ने 14 दिन तक के लिए क्वारंटीन (quarantine) किये गये लोगों के दरवाजे पर सीसीटीवी कैमरे (CCTV cameras) लगाये हैं ताकि यह निगरानी की जा सके कि संदिग्ध व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के सम्पर्क में न जाए। इसके अलावा ड्रोन (drone) द्वारा लोगों को अपने मास्क पहनने के लिए सन्देश दिया जाता रहता है तथा मोबाइल ऐप (mobile apps) पर डिजिटल बारकोड (digital bar-codes) व्यक्तियों के स्वास्थ्य की स्थिति को उजागर करता है। लोगों पर नजर रखने के लिए ये कुछ तरीके दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ने अपनाए हैं। इन उपायों को सामान्य उपायों के रूप में देखा जा सकता है, किंतु कुछ उपाय चरम पर हैं।

COVID-19 के प्रकोप को रोकने के लिए दुनिया भर के देशों ने संक्रमित व्यक्तियों की निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। सिंगापुर (Singapore) में, सरकार ने संक्रमित व संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए ट्रेसटूगेदर (Trace Together) नाम से एक ऐप (app) शुरू किया है। यह एप मोबाइल फोन (mobile phone) के बीच ब्लूटूथ सिग्नल (Bluetooth signals) का उपयोग करता है ताकि यह देखा जा सके कि कोरोना विषाणु संभावित वाहक अन्य लोगों के साथ निकट संपर्क में तो नहीं है। इसके अलावा संक्रमण संभावित लोगों को कलाई पर एक बैंड (band) पहनने के लिए दिया गया है जो कि एक स्मार्टफोन ऐप (Smartphone app) से जुड़ा है। अगर कोई संक्रमण संदिग्ध अपनी जगह से कहीं और जाता है तो अधिकारी तुरंत सतर्क हो जाते हैं। दक्षिण कोरिया की बात की जाए तो, ऐसे लोगों को ट्रैक करने के लिए सरकार ने क्रेडिट कार्ड लेनदेन (Credit Card Transactions), स्मार्टफोन स्थान डेटा (Smartphone Location Data) और सीसीटीवी वीडियो (CCTV Video) जैसी तकनीकों का उपयोग करना शुरू किया है। कुछ यूरोपीय देशों में "होम क्वारंटीन (Home quarantine)" ऐप जारी किया गया है, जिसमें उपयोगकर्ता पुलिस को अपनी लोकेशन (location) के चित्र भेजते हैं, जिससे यह पता चलता है कि वे क्वारंटीन का उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं। यह एप्लिकेशन (application) उन लोगों के फोन नंबर से जुड़ा होता है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों द्वारा सिम्पटम्स ट्रैकर (symptoms tracker) भी बनाया गया है, जिसे लोग डाउनलोड (download) करके अपने लक्षणों को विस्तार से बता सकते हैं।

भारत में कोरोना विषाणु से संक्रमित संदिग्ध लोगों की पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने के लिए उनके हाथों पर मोहरें लगायी जा रही हैं तथा मोबाइल फोन और व्यक्तिगत डेटा (data) का उपयोग करके उन्हें ट्रैक किया जा रहा है। हाथ पर लगायी जाने वाली मोहरों में वह तारीख भी शामिल होती है, जिससे व्यक्ति को घर के अंदर रहना होता है। संदिग्ध लोगों को ट्रैक करने के लिए एयरलाइंस (airlines) और रेलवे से नागरिकों तथा रिजर्वेशन (reservation) का डेटा भी माँगा जा रहा है। ऐसा आवश्यक है क्योंकि कई लोग संक्रमित होते हुए भी यात्रा कर रहे हैं। कुछ राज्यों में, अधिकारियों ने संक्रमित रोगियों के प्राथमिक और माध्यमिक संपर्कों को ट्रैक करने के लिए टेलीफोन कॉल रिकॉर्ड (telephone call records), सीसीटीवी फुटेज (CCTV footage) और मोबाइल फोन जीपीएस सिस्टम (mobile phone GPS system) का उपयोग किया है। दक्षिण भारतीय राज्य केरल में, अधिकारी टेलीफोन कॉल रिकॉर्ड, निगरानी कैमरा फुटेज (surveillance camera footage) और फोन स्थान डेटा (phone location data) के मिश्रण का उपयोग उन लोगों पर नज़र रखने के लिए कर रहे हैं, जो कोरोना वायरस रोगियों के संपर्क में रहे।

सुरक्षा उपायों की दृष्टि से सरकार के ये कदम बहुत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं किंतु व्यक्तिगत गोपनीयता के संदर्भ में इस प्रकार के निगरानी उपकरण एक बड़ा प्रश्न उठाते हैं। इस अभूतपूर्व समय में, व्यक्तिगत स्वतंत्रता में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। यूरोप आमतौर पर एक ऐसी कानूनी प्रणाली का समर्थन करता है, जहां निजता (privacy) के अधिकार को बहुत उच्च दर्जा दिया गया है। ऐसी जगहों पर सरकार के उपायों को गोपनीयता उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो सरकारें बचाव के लिए हर तरह का प्रयास कर रही हैं, किंतु मानवाधिकार संगठन निगरानी उपकरणों में आने वाली तेजी को गोपनीयता उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं। इनका तर्क है कि किसी भी व्यक्ति के स्थान डेटा जैसे निगरानी उपकरण संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी नहीं हो सकते। इस तरह की कोई समयरेखा भी नही है, जब सरकारें इस तरह की जानकारी एकत्रित करना बंद कर दें। प्रकोप से निपटने के लिए सरकारें निगरानी उपकरणों के उपयोग सहित कई असामान्य कदम उठा रही हैं। मानवाधिकार संगठन का मत है कि सरकारों को ये शक्तियां तब तक प्रदान नहीं की जानी चाहिए जब तक कि वे जनता को यह ना दिखा सकें कि ये शक्तियां या नीतियां वास्तव में एक महत्वपूर्ण तरीके से COVID-19 का सामना करने में मदद करेंगी। फोन स्थान (phone location) जैसे कुछ डेटा का संग्रह, वायरस के प्रसार को ट्रैक करने में कारगर साबित नहीं हुआ है। यह हमारे डिजिटल अधिकारों के लिए एक खतरा है, इसलिए सरकारों को ये शक्तियां प्रदान नहीं की जानी चाहिए। संगठन ने तर्क दिया कि स्मार्टफ़ोन पर ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (Global Positioning System) केवल 16-फुट रेडियस (radius) के दायरे में ही सटीक होता है। विषाणु उन लोगों के बीच फैल सकता है, जो एक दूसरे के निकट संपर्क में हैं, जिनका शरीर एक दूसरे से 6 फीट के दायरे के भीतर है। ब्लूटूथ और इन जैसी अन्य तकनीकों को बेहतर सटीकता के लिए उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी (guarantee) नहीं है कि किसी दिए गए फोन को छह फुट की सटीकता के साथ स्थित किया जा सकता है। कोरोनो विषाणु से लड़ने के लिए निगरानी उपकरणों का उपयोग महामारी के समाप्त होने के बाद सरकारी शक्ति के बारे में चिंता पैदा करता है। विशेषज्ञों ने इस बारे में चिंता जताई है कि सरकारें डेटा का उपयोग कैसे कर रही हैं, इसे कैसे संग्रहित किया जा रहा है। इन विषयों को लेकर कोई भी पारदर्शिता नहीं है। कुछ सरकारों ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है कि वे कौन सा डेटा एकत्र कर रहे हैं और वे कितने समय तक जानकारी रखेंगे, हालांकि सभी ने विशिष्ट तिथियों के बारे में कुछ नहीं कहा है। महामारी के खत्म हो जाने के बाद इस तरह के असाधारण उपायों को समाप्त करना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है। यह एक आपातकालीन प्रतिक्रिया स्थिति में अच्छा हो सकता है, लेकिन सामान्य जीवन या दैनिक जीवन के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। महामारी के समाप्त हो जाने के बाद व्यक्तिगत डेटा को संरक्षित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। गोपनीयता और सार्वजनिक स्वास्थ्य यह दोनों ही आम तौर पर एक मानव अधिकार हैं और सार्वजनिक नीति में बहुत उच्च दर्जा रखते हैं। इसलिए दोनों के बीच आवश्यक संतुलन की अत्यधिक आवश्यकता है।

संदर्भ:
1.
https://cnb.cx/2yHYb5Z
2. https://bit.ly/2UOFqpV
3. https://www।coindesk।com/mass-surveillance-threatens-personal-privacy-amid-coronavirus
4. https://bit.ly/3bXnrmX
5. https://reut.rs/39OoPXM
चित्र सन्दर्भ:
1.
piqseql - Modified
2. unsplash.com - Camera
3. unsplash.com - face mask
4. Pexels - Modified



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