अपने गौरव का गान करती शर्की काल की बरहा मस्जिद

जौनपुर

 25-11-2019 11:18 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

जौनपुर उत्तरप्रदेश का एक अति प्राचीन जिला है, यहाँ की स्थापना फिरोज़ शाह तुगलक ने की थी जो कालान्तर में शर्की साम्राज्य की राजधानी बनी। शर्कियों ने जौनपुर को एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित किया और यहाँ पर अनेकों इमारतों का निर्माण करवाया जिनमें अटाला मस्जिद, शाही किला, झंझरी मस्जिद, चार अंगुल मस्जिद, जामा मस्जिद आदि प्रमुख हैं।

शर्कियों के बाद इस शहर पर लोदियों ने आक्रमण किया और इस शहर को तोड़ कर रख दिया लेकिन फिर बाद में मुग़ल साम्राज्य की नज़र इस पर पड़ी और उन्होंने इस शहर को फिर से आबाद किया और यहाँ पर अनेकों नई इमारतों का निर्माण करवाया जिनमें कुलीच खान का मकबरा, मस्जिदें और शाही पुल आदि हैं। यहाँ पर एक मस्जिद का शर्कियों द्वारा निर्माण किया गया था जिसका नाम बरहा मस्जिद है जो कि अत्यंत ही कम प्रसिद्ध है, तो आइये इस लेख में हम इस मस्जिद के बारे में पढ़ते हैं और जानने की कोशिश करते हैं इसके वास्तु और इतिहास के बारे में।

जौनपुर से कुछ ही दूर एक अन्य स्थान है जिसका नाम है जाफराबाद। वास्तविकता में यदि देखा जाए तो जाफराबाद भी मुग़ल और शर्की काल में एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण शहर था और वहां पर भी कई इमारतों का निर्माण किया गया था। मुग़ल काल में सिक्कों की टकसाल का भी निर्माण जाफराबाद में ही किया गया था।

आज वर्तमान का जाफराबाद का रेल स्टेशन यहाँ की एक प्राचीन इमारत की ही नींव पर उपस्थित है। कुछ विद्वानों की मानें तो जाफराबाद स्टेशन के ही नीचे मुग़ल कालीन टकसाल दबा हुआ है। शेख बरहा की मस्जिद जाफराबाद में ही स्थित है। यह करीब सन 1311 में बनवाई गयी थी। यह मस्जिद जिस स्थान पर बनी है उस क्षेत्र में कई मंदिर एक समय में हुआ करते थे जो कि या तो फिरोज़ शाह के काल में तोड़े गए या फिर प्राकृतिक रूप से गिर गए थे। अब ऐसे में इस मस्जिद का निर्माण यहाँ पर पाए जाने वाले मंदिर के पत्थरों के प्रयोग से हुआ है।

प्राचीन काल में कई ऐसे स्थल दिखाई देते हैं जहाँ पर पुरानी इमारतों को तोड़ कर या खाली इमारतों के सामान को नयी इमारतों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता था। उदाहरण स्वरुप महाराष्ट्र के उस्मानाबाद क्षेत्र की बुद्ध गुफा धाराशिव को देख सकते हैं या फिर मांडू में स्थित नीलकंठ महादेव के मंदिर को देख सकते हैं। इस इमारत का आकार प्रकार असमान प्रकार का दिखता है। इसमें एक 65 फीट बड़ा चौकोर हॉल है जिसकी छत 20 फीट ऊंची है और इसके छत की यदि बात की जाए तो यह बात निकल कर सामने आती है कि यह गुम्बदाकार ना होकर सपाट है। यह मस्जिद कुल 60 खम्बों पर खड़ी है। इस मस्जिद के मेहराब का भाग कुछ 10 फीट मोटा है जो कि जौनपुर के मस्जिदों की विशेषता है। इस मस्जिद में जौनपुर के अन्य मस्जिदों की भाँती तोरण भी बनाया गया है। इस मस्जिद का प्रवेश द्वार खुला हुआ नहीं है जो कि यह प्रदर्शित करता है कि प्रवेश द्वार के सामने बने बगीचे में प्रार्थना करने वाले बैठा करते थे। आज भी यह मस्जिद यहाँ पर उपस्थित अपने गौरव का गान कर रही है।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/2Ofz4wE
2. https://bit.ly/2QMPbn1



RECENT POST

  • शाश्वत प्रतीक्षा का प्रतीक है नंदी (बैल)
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-07-2020 11:09 AM


  • शिल्पकारों के कलात्मक उत्साह को दर्शाती है पेपर मेशे (Paper mache) हस्तकला
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     01-07-2020 11:53 AM


  • इत्र उद्योग में जौनपुर का गुलाब
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     01-07-2020 01:18 PM


  • अंतरिक्ष की निरंतर निगरानी के महत्व को रेखांकित करते हैं, क्षुद्रग्रह हमले
    खनिज

     30-06-2020 06:59 PM


  • परी कथा से कम नहीं है- भारतीय आभूषणों का इतिहास
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     29-06-2020 10:20 AM


  • क्या है, फिल्म शोले के गीत महबूबा से जुड़ा दिलचस्प तथ्य
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     28-06-2020 12:15 PM


  • जौनपुर की अपनी प्राचीन पाक कला
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     27-06-2020 09:25 AM


  • भाषा का उपयोग केवल मानव द्वारा ही क्यों किया जाता है?
    व्यवहारिक

     26-06-2020 09:25 AM


  • कांटो भरी राह से डिजिटल स्वरूप तक सूप बनाने की पारंपरिक हस्तकला का सफर
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     25-06-2020 01:30 PM


  • धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व रखता है, आंवला
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-06-2020 11:55 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.