जौनपुर और लखनऊ में भी स्थित हैं, ताजमहल के प्रतिरूप

जौनपुर

 23-11-2019 11:26 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

यह दुनिया अजूबों से भरी हुयी है यहाँ पर अनेकों अजूबें उपलब्ध हैं उन्ही में से 7 अजूबों का जिक्र दुनिया के शीर्ष में किया जाता है। दुनिया के सात अजूबे दुनिया भर में स्थित 200 प्रमुख स्मारकों में से चुने गए हैं इनका चयन सन 2000 में एक अभियान के तहत किया गया था। यह चयन लोकप्रियता के आधार पर किया गया था जिसका नेतृत्व कनाडा-स्विस के बर्नार्ड वेबर द्वारा न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन जो की ज्यूरिक स्वित्ज़रलैंड में स्थित थी के आधार पर किया गया था तथा इसे 7 जुलाई सन 2007 को लिस्बन में घोषित किया गया था। इन सात अजूबों में चिचेन इत्ज़ा जो की एक पिरामिड है, क्राइस्ट ऑफ़ रिडीमर, चीन की दिवार, माचू पीचू, पेट्रा, ताजमहल और कोलोसियम हैं।

इस सूंची में भारत के ताजमहल का होना एक अत्यंत ही सुखद समाचार है। ताज महल आज दुनिया भर में जाना जाता है और मात्र इसके चित्र से ही लोग यह बता देते हैं की यह किस देश की इमारत है। ताजमहल को अंग्रेजी में क्राउन ऑफ़ पैलेस के नाम से जाना जाता है जो की ताज और महल के कारण आया है। यह इमारत प्रेम की एक मिशाल के रूप में पूरे विश्व भर में जाना जाता है। यह इमारत एक पूर्ण सफ़ेद संगमरमर के टाइलों से बनाया गया है जो की अन्दर से लखौरी ईंट और चूने, गुड, सन आदि जैसे सीमेंट से बनायी गयी है। यह इमारत यमुना नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है यह जिस जमीन पर बना है वह जमीन मुग़ल शहंशाह ने राजा जय सिंह से खरीदी थी। 1632 में मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी पसंदीदा पत्नी या बेगम मुमताज महल की याद में बनाने की योजना बनाया था।

ताजमहल में स्वयं शाहजहाँ का भी मकबरा है यह एक 17 एकड़ के क्षेत्र के केंद्र में बना हुआ है जिसमे एक मस्जिद और एक मुसाफिरखाना भी मौजूद है। इस मकबरे के आस पास बड़ी ही बेहतरीन तरीके से बागों का और फव्वारों का निर्माण किया गया है जो की इस इमारत की खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं। इस मकबरे का निर्माण 1643 में पूरा हुआ था और इसके आस पास के इमारतों को पूरा करने के कार्य अगले 10 वर्षों तक चलता रहा था। यह माना जाता है की ताजमहल का परिसर सन 1653 में करीब 32 मिलियन रूपए के खर्च से बना था। इस निर्माण परियोजना शाहजहाँ के वास्तुविद उस्ताद अहमद लाहौरी के नेतृत्व में कुल 20000 कारीगरों द्वारा पूर्ण कराया गया था। ताजमहल सन 1983 में यूनिस्को विश्व धरोहर के श्रेणी में नामित किया गया था। इसे देखने सालाना करीब 8 मिलियन पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता है।

सम्पूर्ण भारत में इस इमारत के तर्ज पर अनेकों और इमारतों का निर्माण प्राचीन काल और वर्तमान काल में किया गया था जिसे निम्नलिखित रूप से देखा जा सकता है-
बीबी का मकबरा जो की औरंगाबाद में स्थित है को ताजमहल का ही प्रतिरूप माना जाता है यह 1651-61 के दौर में राजकुमार आजम शाह जो की औरंगजेब का सबसे बड़ा बीटा था द्वारा अपनी माँ के लिए बनवाया गया था। इस इमारत को दक्कन का ताज भी कहा जाता है। यह अता उल्ला द्वारा तैयार कराया गया था जो की उस्ताद अहमद लाहौरी का पुत्र था। छोटा ताजमहल दूसरा ताजमहल का प्रतिरूप है इसे 2011 में बुलंदशहर में फैजुल हसन कादरी द्वारा अपनी पत्नी के लिए बनवाया गया है।

शहजादी का मकबरा तीसरी इमारत है जिसे की लखनऊ के छोटा इमामबाड़ा परिसर में बनवाया गया है। इसे राजकुमारी जीनत आसिया की याद में अवध के तीसरे नवाब मुहोम्मद अली शाह बहादुर द्वारा बनवाया गया था। राजस्थान के कोटा शहर में दुनिया के सात अजूबों को बनाया गया है जिसमे ताजमहल का भी प्रतिरूप बनाया गया है।

जौनपुर में स्थित बारह दुअरिया या कालीच खान के मकबरे को भी ताजमहल के प्रतिरूप के रूप में जाना जाता है। कालीच खान मुग़ल साम्राज्य में अलाहाबाद का गवर्नर था जिसे यह जमीन अपना मकबरा बनाने के लिए मिली थी और जिस स्थान पर यह मकबरा बना है उसके पास के गावं को भी कलीचाबाद के नाम से जाना जाता है। कालीच खान अकबर द्वारा नियुक्त किया गया था। इसके बारे में शिवम् दुबे पुराविद ने अपने लेखों में वृहत रूप से जिक्र किया है।

सन्दर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Taj_Mahal
2. https://bit.ly/33cImOb
3. https://en.wikipedia.org/wiki/New7Wonders_of_the_World
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Origins_and_architecture_of_the_Taj_Mahal
5. https://www.facebook.com/search/top/?q=shivam%20dubey%20kaleech%20khan%20



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