अधिकतर अनुष्ठानों में उपयोग किये जाते हैं खील, बताशे, और खिलौने

जौनपुर

 15-10-2019 12:29 PM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

दीपावली का त्यौहार पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी और गणेश भगवान की पूजा की जाती है। इनकी पूजा में खील, बताशे और खिलौने अवश्य रखे जाते हैं। बताशा एक अखिल भारतीय मिठाई है जिसे चीनी और गुड़ से बनाया जाता है। इस मिठाई का सेवन हर वर्ग के लोगों द्वारा किया जाता है और साथ ही इसे रोज़मर्रा के अनुष्ठानों में भी पेश किया जाता है। सिक्के के आकार के ये बताशे समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। यही कारण है कि बताशे से बनी माला से वर-वधुओं को सुशोभित भी किया जाता है।

मंदिरों, गुरुद्वारों और यहां तक कि घरों में पूरे वर्ष बताशों को पूजा पाठ के बाद आशीर्वाद के रूप में दिया जाता है, क्योंकि चीनी की मिठाई न केवल बनाने के लिए सस्ती होती है, साथ ही उसे लगभग अनिश्चित समय के लिए संग्रहित किया जा सकता है। हालांकि इस मिठाई को वर्तमान समय में इसके लंबे समय तक संग्रहित रखने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन मध्ययुगीन युगों में बताशे को इसके स्वाद और हल्की बनावट के लिए काफी महत्व दिया जाता था। उस समय चीनी सस्ती नहीं हुआ करती थी इसलिए उस समय बताशे काफी महंगे दामों में बिकते थे।

खील-बताशों के साथ-साथ दीवाली में खाद्य चीनी को विभिन्न जानवरों की आकृतियों में ढाल कर खिलौनों को बनाया जाता था। खाद्य चीनी के खिलौने विशेष रूप से बच्चों के लिए दिवाली के लिए सबसे बड़े उत्सव में से एक रहे हैं, जो उन्हें खेलते हुए बड़े स्वाद से खाते हैं। इन खिलौनों को बनाना कोई आम बात नहीं है और इसके लिए किसी विशेषज्ञ के कौशल और महारथ की आवश्यकता होती है। इसे बनाने के लिए चीनी और पानी को पहले अच्छी तरह मिलाया जाता है और एक बड़े बर्तन में गर्म किया जाता है और एक उपयुक्त गाढ़ापन ना आने तक इसे अच्छे से हिलाया जाता है। जब मिश्रण संपूर्ण रूप से गाढ़ा हो जाता है और इसमें चिपचिपाहट आ जाती है, तो इसे सावधानी से एक विशेष रूप के लकड़ी से बने साँचे में डाला जाता है, जो विभिन्न जानवरों जैसे घोड़े, खरगोश, हाथी और मछली आदि की आकृति के होते हैं।

लेकिन वर्तमान समय में खील, बताशे और खिलौनों को महज़ एक परंपरा के रूप में उपयोग किया जाता है। इन्हें अब पहले की तुलना में उतने उत्साह के साथ नहीं देखा जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अब इन पारंपरिक मिठाइयों के निर्माता भी मुट्ठी भर ही बचे हुए हैं। क्योंकि या तो लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं और चीनी के सेवन से होने वाली हानियों के चलते इन खिलौनों को बड़ी मात्रा में खरीदने से कतराते हैं या बज़ारों में उपलब्ध अन्य मिठाइयों को खरीदने को ज़्यादा मान्यता देने लगे हैं।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/2VmgAwm
2. https://bit.ly/2Ge9OBd
3. https://bit.ly/2nQjRru
4. https://bit.ly/2qaGXK1
5. https://bit.ly/32inGVf
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://www.indiamart.com/proddetail/sugar-batasha-14799877291.html
2. https://www.flickr.com/photos/soulofindia/179049237
3. https://in.pinterest.com/pin/337136722079930837/?autologin=true&nic=1
4. https://www.picbear.org/media/BacA1N8D1Kv



RECENT POST

  • स्वास्थ्य व पर्यावरण समस्याओं से निपटने में सहायक सिद्ध हो सकती है कॉकरोच फार्मिंग
    तितलियाँ व कीड़े

     18-01-2020 10:00 AM


  • जौनपुर में प्रचलित है शीतला माता की पूजा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-01-2020 10:00 AM


  • क्या हैं, वर्तमान में भारतीय सेना की रक्षा क्षमताएं?
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     16-01-2020 10:00 AM


  • किस प्रकार मनाया जाता है भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति का उत्सव
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     15-01-2020 10:00 AM


  • जौनपुर में भी दिखाई देता है काली गर्दन वाला सारस
    पंछीयाँ

     14-01-2020 10:00 AM


  • ब्रह्मांड की कई आश्चर्यचकित चीजों में से एक है क्वेसर (Quasar)
    शुरुआतः 4 अरब ईसापूर्व से 0.2 करोड ईसापूर्व तक

     13-01-2020 10:00 AM


  • क्या होता है, विभिन्न धर्मों में प्रयुक्त होने वाले मण्डल (Mandala)
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-01-2020 10:00 AM


  • भारतीय वन सेवा है एक अच्छा विकल्प
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     11-01-2020 10:00 AM


  • क्यों छोड़ना चाहते हैं भारतीय किसान खेती को?
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     10-01-2020 10:00 AM


  • बॉलीवुड फिल्मों ने निभाई भारतीय प्रवासी पहचान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     09-01-2020 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.