कीटनाशकों और मानव गतिविधियों की चपेट में आ रहे हैं हरियल कबूतर

जौनपुर

 09-09-2019 12:14 PM
पंछीयाँ

कई वर्षों से मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ करता आ रहा है। जिसके दुष्परिणाम भी हमें दिखाई देने लगे हैं। हम सब इस बात से तो अच्छी तरह परिचित हैं कि पर्यावरण को संतुलित रखने में पेड़-पौधों के साथ ही पशु-पक्षियों की भूमिका भी अहम होती है। लेकिन मनुष्य के अत्यधिक हस्तक्षेप के चलते इन सबकी संख्या कम होती जा रही है। ऐसी ही कुछ स्थिति महाराष्ट्र के राज्य पक्षी, हरियल कबूतर (ट्रेरन फॉनीकॉप्टेरा (Treron phoenicoptera)) की है।

आमतौर पर, हरियल कबूतर झुंड में सड़क के किनारे पीपल और बरगद के पेड़ों पर पाए जाते हैं, लेकिन भोजन की तलाश में ये उड़ते हुए शहरों के बगीचों में भी देखे जाते हैं।
ये पक्षी अधिकतर फलों का सेवन करते हैं, लेकिन कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग, सड़क चौड़ीकरण में फल-फूल वाले पेड़ों की कटाई और शहर में व्यापक निर्माण गतिविधियों के कारण ये पक्षी विलुप्त होने की स्थिति में आ सकते हैं। वैसे तो इन्हें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के अंतर्गत अनुसूची – IV (यानी कम चिंताजनक स्थिति) में वर्गीकृत किया गया है।

हरियल कबूतर सामाजिक पक्षी होते हैं और ये कई पक्षियों के झुंड में रहते हैं और इन का सबसे छोटा समूह 5 से 10 पक्षियों का होता है। ये पक्षी ज़मीन पर बहुत कम उतरते हैं तथा अक्सर पेड़ों पर और ऊंचे स्थानों पर ही बैठते हैं।

हरियल कबूतर का आकार 29 से 33 सेंटीमीटर तक होता है तथा इसका वज़न मात्र 225 से 260 ग्राम के बीच होता है। इनके पंखों का फैलाव 17 से 19 सेंटीमीटर लंबा होता है और इनके शरीर का रंग हल्का पीला-हरा होता है। वहीं इनके सर के ऊपर हल्के नीले भूरे रंग के बाल होते हैं, उनके कंधों पर बैगनी रंग का पैच (Patch) और पंखों में एक विशिष्ट पीले रंग की पट्टी होती है। हरियल कबूतर के पैर चमकीले पीले रंग के होते हैं जिसकी वजह से इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। हरियल कबूतर अपना घोंसला तिनकों और पत्तियों से पेड़ों और झाड़ियों में बनाते हैं और यह एक प्रजनन काल में एक से दो अंडे ही देते हैं, इन अंडो का रंग चमकीला सफेद होता है। अंडे से बच्चे 21 से 25 दिनों में बाहर आते हैं। इस अवधि के दौरान नर भोजन की व्यवस्था करता है और घोंसले के पास रहता है। वहीं मादा भी केवल सुबह धूप लेने के लिए घोंसले से बाहर निकलती है।

हरियल कबूतर हमारे भारत के अलावा श्रीलंका, बर्मा, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, चीन, थाईलैंड, कंबोडिया आदि देशों में भी पाया जाता है। यह केवल सिंध, बलूचिस्तान और रेगिस्तानी इलाकों को छोड़कर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/316tNMq
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Green_pigeon
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Yellow-footed_green_pigeon
4. https://bit.ly/2m7WDvN



RECENT POST

  • स्वास्थ्य व पर्यावरण समस्याओं से निपटने में सहायक सिद्ध हो सकती है कॉकरोच फार्मिंग
    तितलियाँ व कीड़े

     18-01-2020 10:00 AM


  • जौनपुर में प्रचलित है शीतला माता की पूजा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-01-2020 10:00 AM


  • क्या हैं, वर्तमान में भारतीय सेना की रक्षा क्षमताएं?
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     16-01-2020 10:00 AM


  • किस प्रकार मनाया जाता है भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति का उत्सव
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     15-01-2020 10:00 AM


  • जौनपुर में भी दिखाई देता है काली गर्दन वाला सारस
    पंछीयाँ

     14-01-2020 10:00 AM


  • ब्रह्मांड की कई आश्चर्यचकित चीजों में से एक है क्वेसर (Quasar)
    शुरुआतः 4 अरब ईसापूर्व से 0.2 करोड ईसापूर्व तक

     13-01-2020 10:00 AM


  • क्या होता है, विभिन्न धर्मों में प्रयुक्त होने वाले मण्डल (Mandala)
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-01-2020 10:00 AM


  • भारतीय वन सेवा है एक अच्छा विकल्प
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     11-01-2020 10:00 AM


  • क्यों छोड़ना चाहते हैं भारतीय किसान खेती को?
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     10-01-2020 10:00 AM


  • बॉलीवुड फिल्मों ने निभाई भारतीय प्रवासी पहचान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     09-01-2020 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.