कैसे होता था गोह का प्रयोग किला चढ़ाई में?

जौनपुर

 02-09-2019 02:38 PM
रेंगने वाले जीव

जौनपुर के इतिहास के शुरूआती दौर की बात की जाए तो यहाँ पर बने दो किले, पहला, जाफराबाद का किला और दूसरा, शाही किला ने जौनपुर को एक पहचान दी। जौनपुर के किले को अभेद्य किले के रूप में भी जाना जाता है और ऐसा इस लिए कहा जाता है क्यूंकि शर्की सल्तनत इसी किले से भारत की सबसे बड़ी सल्तनतों में से एक सिद्ध हुई।

क्या किसी ने सोचा है कि किसी जानवर को किला फतह के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है? हाथी और घोड़े को यदि इस सारणी से निकाल दिया जाए तो शायद ही कोई ऐसा जीव होगा जो सामने आये। परन्तु भारतीय इतिहास में एक ऐसे जीव का ज़िक्र है जिसने युद्ध में मदद ही नहीं की बल्कि एक बड़ी आबादी को युद्ध तक पहुँचाया भी। यह जीव जौनपुर में आराम से देखा जा सकता है जिसे हम आम भाषा में गोह, गोहटा या मगरगोहटा नाम से जानते हैं।

कहा जाता है कि सन 1670 में मुग़ल और मराठाओं का युद्ध अपने चरम पर था। ऐसे में एक तरफ मुग़ल सल्तनत का बादशाह औरंगज़ेब था और दूसरी ओर मुट्ठी भर जांबाज़ों के साथ शिवाजी। मराठाओं ने यह निर्णय लिया कि वे कोंधाना का किला मुगलों से छीनेंगे और इस घटना को अनजाम देने के लिए तानाजी आगे आये। वह किला चारों तरफ से तोपों से सुरक्षित किया हुआ था और साथ ही साथ वह एक दम सीधी चाढाई पर स्थित था। ऐसे में तानाजी ने शिवाजी के पालतू गोह (मराठी में घोरपड) जिसका नाम ‘यशवंती’’ था, की कमर पर एक रस्सी बाँधी और उसकी सहायता से किले की दीवार की चढ़ाई की। इस लड़ाई में मराठाओं की विजय हुयी परन्तु तानाजी की मृत्यु हो गयी। वर्तमान में उस किले को तानाजी को ही समर्पित कर ‘सिंहगढ़’ के नाम से जाना जाता है। अब दिए गए कथन में कितनी सच्चाई है इसका कोई ठोस प्रमाण हमें प्राप्त नहीं हुआ है।

गोहों को बंगाल मोनिटर (Bengal Monitor) के नाम से भी जाना जाता है। यह आम भारतीय जीव है जो कि विशाल छिपकली की श्रेणी में आता है। यह आमतौर पर पूरे भारत में पाया जाता है तथा साथ ही साथ दक्षिण पूर्व एशिया महाद्वीप और पश्चिमी एशियाई देशों में भी पाया जाता है। यह विशाल छिपकली या गोह मुख्य रूप से स्थलीय प्राणी है जो कि पेड़ पर अधिक दिखते हैं और जल में ज़्यादा नहीं जाते। यदि इनके आकार की बात की जाए तो ये जीव 61 से 175 सेंटीमीटर के आकार के हो सकते हैं। गोहों में युवा गोह पेड़ों पर शिकार करने में सक्षम होते हैं तो वहीं वयस्क ज़मीन पर ही शिकार करना पसंद करते हैं। ये मुख्य रूप से पंछी, अंडे और मछली खाते हैं। ये जीव सरीसृप की श्रेणी में आते हैं। युवा गोह कई शिकारियों द्वारा मारे जाते हैं जिनमें पंछी आदि आते हैं और वहीं मानव आबादी भी इस जीव का शिकार बड़े पैमाने पर अपने भोज्य पदार्थ के रूप में करती है। इन जीवों का वज़न करीब 7 किलो के आस पास होता है। ये जीव किसी भी प्रकार की विलुप्त श्रेणी में नहीं आता है।

हांलाकि इन जीवों का शिकार मनुष्यों द्वारा बड़ी संख्या में किया जाता है। लोग इन जीवों से डर कर भी इन्हें मार देते हैं जबकि गोह एक शांत स्वभाव का जानवर होता है तथा यह मनुष्य के लिए हानिकारक भी नहीं होता है।

संदर्भ:
1.
https://www.salon.com/2007/04/17/monitor_lizards/
2. https://bit.ly/2jYlXDO
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Bengal_monitor



RECENT POST

  • उत्तम गुणों से भरपूर है पेरेन्काइमा (Parenchyma) में पाया जाने वाला लिग्निन (Lignin)
    कोशिका के आधार पर

     11-11-2019 12:43 PM


  • पुनर्जागरण काल में इटली के कुछ महत्वपूर्ण कलाकार और उनकी कृतियाँ
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     10-11-2019 02:51 AM


  • जौनपुर में हर्षोल्लास से मनाया जाता है, ईद मिलाद उल नवी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-11-2019 11:26 AM


  • कैसे करें ई-कॉमर्स के मंच पर अपना व्यवसाय शुरू
    संचार एवं संचार यन्त्र

     08-11-2019 11:13 AM


  • वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है अपार मुफ्त पानी और बिजली
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     07-11-2019 11:30 AM


  • मौत से मेल करा सकता है शराब का व्यसन?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     06-11-2019 12:54 PM


  • सुनामी के प्रति जागरुकता है ज़रूरी
    जलवायु व ऋतु

     05-11-2019 11:23 AM


  • क्या वास्तव में फसलों के लिए उपयोगी हो सकते हैं कीट?
    तितलियाँ व कीड़े

     04-11-2019 12:33 PM


  • क्या होता है एक स्पूफ या पैरोडी चलचित्र
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     03-11-2019 10:00 AM


  • असंगठित श्रम रोजगार के श्रमिकों की स्थिति
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     02-11-2019 11:30 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.