क्यों मनाई जाती है दक्षिण अमरीका के इस राष्ट्र में जन्माष्टमी?

जौनपुर

 24-08-2019 12:02 PM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

विश्‍व के शीर्ष दस धर्मों में हिन्‍दू धर्म चौथे स्‍थान पर है। हिन्‍दू धर्म के अनुयायी लगभग संपूर्ण विश्‍व में देखने को मिल जाएगें। दक्षिण अमेरिका के दो राष्‍ट्र गुयाना और सूरीनाम में अन्‍य पश्चिमी राष्‍ट्रों की अपेक्षा हिदुओं की संख्‍या सबसे अधिक है। सूरीनाम की 2012 की जनगणना के अनुसार हिन्‍दू धर्म सूरीनाम में 22.3% है तथा इसके अनुयायियों की संख्‍या तीव्रता से बढ़ती जा रही है। सूरीनाम में हिन्‍दू धर्म के अंतर्गत सनातन धर्म (18%), आर्य समाज (3.1%) और हिन्‍दू धर्म के अन्‍य रूपों (1.2%) के अनुयायी मौजूद हैं। सनातन धर्म ब्राह्मण पुजारियों और विष्णु और उनके अवतारों जैसे शास्त्रीय हिंदू देवताओं, और साथ ही शिव और देवी की छवि आधारित भक्ति पूजा की केंद्रीय अनुष्ठान भूमिका पर ज़ोर देता है जबकि आर्य समाज एक सुधारवादी आंदोलन को बढ़ावा देता है जो ब्राह्मणवादी सत्ता और मूर्ति पूजन को अस्वीकार करते हैं। 2012 की जनगणना के अनुसार, सूरीनाम में 1,20,623 हिंदू थे, जो कुल जनसंख्या का 22.3% है। अधिकांश सूरीनामी हिंदू, सरनामी हिंदुस्तानी बोलते हैं, जो भोजपुरी की बोली है।

सूरीनाम और गुयाना दोनों में हिन्‍दू धर्म की शुरूआत एक साथ ही हुयी थी। 1873 और 1916, के बीच 34,304 ब्रिटिश भारतीय गिरमिटिया मजदूर सूरीनाम पहुंचे, जिनमें से 80% हिंदू थे। इनमें से 21,500 ने भारत लौटने की बजाय वहीं रहने का निर्णय लिया। यह गिरमिटिया मजदूर उत्‍तर प्रदेश और बिहार से थे। डच गुयाना में औपनिवेशिक अधिकारियों ने अपने गिरमिटिया मजदूरों को अपनी धार्मिक गतिविधियों का अनुसरण करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया।

हिंदू धर्म सूरीनाम के समाज को परिभाषित करने में एक प्रभावशाली भूमिका निभाता है क्योंकि सूरीनाम में हिंदू धर्म दूसरा सबसे बड़ा धर्म है। 1975 में सूरीनाम के स्वतंत्र होने के बाद सूरीनाम की लगभग एक चौथाई आबादी नीदरलैंड चली गई थी। नीदरलैंड जाने वाले लोगों में सबसे बड़ा हिस्सा हिंदुस्तानी हिंदुओं का था। परिणामस्वरूप सूरीनाम के कई उच्च सम्मानित पंडित और अन्य हिंदू बुद्धिजीवी नीदरलैंड में रहते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के निरंतर विस्तार का प्रभाव सूरीनाम पर भी पड़ा जिस कारण ये दोनों इस प्रकार जुड़े जैसे पहले कभी नहीं जुड़े थे। वर्तमान में सूरीनाम जनसांख्यिकीय परिवर्तन से गुज़र रहा है। आने वाले वर्षों के लिए हिंदू धर्म सूरीनाम के जीवन में एक शक्तिशाली प्रभाव बनायेगा।

अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ या इस्कॉन (ISKCON) जो कि एक कृष्‍ण आन्‍दोलन था, के प्रभाव सूरीनाम में भी देखे गए। सूरीनाम जाने वाले पहले कृष्‍ण भक्‍त 1980 के दशक की शुरुआत में गुयाना के रास्ते से यहां पहुंचे। सूरीनाम में इस्कॉन का पहला केंद्र लगभग दो दशक पहले स्थापित किया गया था, और सूरीनाम के न्यू निकरी में अभी भी इसका एक सक्रिय प्रचार केन्‍द्र मौजूद है। सूरीनाम में जन्‍माष्टमी महोत्‍सव को बड़े ही हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/33SQAfZ
2. https://bit.ly/2NrCV9R
3. https://bit.ly/2TYTUBO
4. https://bit.ly/2zjhWOk



RECENT POST

  • क्षमतानुसार दान देने पर केंद्रित है, पीटर सिंगर का विचार प्रयोग ‘द लाइफ यू कैन सेव’
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-08-2020 06:45 PM


  • भारत में सबसे बड़ी ताजे पानी की झील
    नदियाँ

     09-08-2020 03:34 AM


  • क्या पक्षियों को पालतू बनाना उचित है?
    पंछीयाँ

     08-08-2020 06:05 PM


  • महाभारत और मुगल काल का लोकप्रिय खेल है चौपड़ या चौसर
    हथियार व खिलौने

     07-08-2020 06:25 PM


  • क्या रहा मनुष्य और उसकी इन्द्रियों के अनुसार, अब तक प्रारंग और जौनपुर का सफर
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     07-08-2020 06:27 PM


  • क्या है, कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण का मतलब ?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     06-08-2020 09:30 AM


  • गोमती नदी के ऊपर बने शाही पुल का इतिहास
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     05-08-2020 09:30 AM


  • तंदूर का इतिहास
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     04-08-2020 08:45 AM


  • दुनिया में सबसे अलग जनजाति है
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     02-08-2020 05:36 PM


  • क्या रहा जौनपुर के जीव-जंतुओं के आधार पर, अब तक प्रारंग का सफर
    शारीरिक

     31-07-2020 08:30 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id