रक्त में प्लेटलेट्स की पर्याप्त मात्रा का होना है आवश्यक

जौनपुर

 30-07-2019 12:09 PM
कोशिका के आधार पर

आपने प्राय: कई बार यह सुना होगा कि डेंगू (Dengue) से पीड़ित व्यक्तियों में कभी-कभी प्लेटलेट्स (Platelets) की कमी हो जाती है। किंतु क्या आप जानते हैं कि आखिर ये प्लेटलेट्स होती क्या हैं और हमारे शरीर में इनका क्या महत्व है?

प्लेटलेट्स जीवित प्राणियों के खून का एक बड़ा हिस्सा हैं। दिखने में इनकी संरचना नुकीली और अंडाकार होती है। प्लेटलेट्स अस्थि-मज्जा में मौजूद मेगाकार्योसाइट्स (Megakaryocyte) कोशिकाओं के काफी छोटे कण होते हैं। प्लेटलेट्स थ्रोम्बोपीटिन हार्मोन (Thrombopoietin Hormone) की वजह से विभाजित होकर खून में समाहित हो जाते हैं तथा बाद में स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो प्लेटलेट्स हमारे रक्त में प्रवाहमान सबसे छोटे माप की कोशिकाएं हैं जो किसी रुधिर वाहिनी के क्षतिग्रस्त होने पर वहां पहुंच कर थक्का बना लेती हैं और रक्तस्राव को बंद कर देती हैं। इन कोशिकाओं को केवल सूक्ष्मदर्शी द्वारा ही देखा जा सकते सकता है। रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या सामान्यत: 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर (Microlitre) होती है। अर्थात स्वस्थ रहने के लिये शरीर में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर प्लेटलेट्स का होना अनिवार्य है।

रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या का मापन सामान्यत: पूर्ण रक्त गणना (Complete blood count -सीबीसी) नामक जांच द्वारा किया जाता है। ये देखने में छोटी-छोटी प्लेटों (Plates) के आकार की होती हैं और इसीलिए इन्हें प्लेटलेट्स कहा जाता है। जब कोई रक्तवाहिनी क्षतिग्रस्त हो जाती है तो ये तुरंत रक्तवाहिनी में पहुंचती हैं तथा परिवर्धित होने लगती हैं। इन परिवर्धित प्लेटलेट्स के एकत्रीकरण और फाइब्रिन (Fibrin) नामक अघुनशील रसायन के निर्माण के द्वारा थक्कों का निर्माण होता है जो रक्त स्राव को बंद कर देते हैं।

यदि रुधिर में प्लेटलेट्स की संख्या 4.5 लाख से अधिक हो जाए तो इस अवस्था को थ्रोम्बोसाइटोटिस (Thrombocytosis) कहा जाता है। इस अवस्था में हाथ-पैरों में रक्त के थक्के बनने लगते हैं, जिनका उपचार न होने पर दिल का दौरा पड़ सकता है। यह कुछ बाह्य कारकों जैसे रक्ताल्पता, कैंसर (Cancer) आदि के कारण होता है। कभी-कभी प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से कम भी हो जाती है जिसे थ्रोम्बोसाइटोपीनिया (Thrombocytopenia) कहा जाता है। इसमें त्वचा पर नीले निशान पड़ जाते हैं। मसूड़ों, नाक आदि से अक्सर खून निकलने लगता है। थ्रोम्बोसाइटोपीनिया के अनेक कारण हो सकते हैं जिनमें दवाइयों का साइड इफेक्ट (Side effect) यानि पार्श्वप्रभाव, कैंसर, कीमोथेरैपी (Chemotherapy), गुर्दे का संदूषण, अधिक शराब का सेवन आदि शामिल हैं।

अक्सर बरसात के मौसम में लोग डेंगू, मलेरिया (Malaria) आदि बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं किंतु इनका असर हमारी रक्त कोशिकाओं में मौजूद प्लेटलेट्स पर भी होता है। दरसल डेंगू का विषाणु प्लेटलेट्स का निर्माण करने वाली कोशिकाओं को क्षति पहुंचाता है जिस कारण प्लेटलेट्स का निर्माण करने वाली कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स नहीं बना पाती तथा रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है और व्यक्ति थ्रोम्बोसाइटोपीनिया का शिकार होने लगता है। प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी क्षीण हो जाती है और शरीर का अन्य रोगों से संक्रमित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में रूधिर में प्लेटलेट्स की संख्या को बनाये रखना बहुत आवश्यक है।

निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन से रूधिर में प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाया जा सकता है:
शुद्ध दूध: शुद्ध दूध में कैल्शियम (Calcium) की भरपूर मात्रा हड्डियों को मज़बूत बनाती है। इसमें विटामिन K (Vitamin K) की भी भरपूर मात्रा होती है जो प्लेटलेट्स के निर्माण में सहायक है।
विटामिन K से भरपूर खाद्य पदार्थ: प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिये ब्रोकली (Broccoli), भिन्डी, पत्तागोभी आदि का सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमें विटामिन K की भरपूर मात्रा होती है।
गाजर: गाजर रक्त प्लेटलेट्स की संख्या को बनाए रखने के लिए उत्कृष्ट उपाय है।
किशमिश: किशमिश आयरन (Iron) से भरपूर होते हैं और रक्त प्लेटलेट्स संख्या को सामान्य करने के साथ शरीर को मज़बूती प्रदान करते हैं।
अनार: अनार में पाए जाने वाले पोषक तत्व और खनिज शरीर में ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं तथा प्लेटलेट्स संख्या को सामान्य रखते हैं।
लहसुन: लहसुन जहां उत्कृष्ट रक्त शोधक है वहीं यह स्वाभाविक रूप से रक्त प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में भी मदद करता है।
पपीता: प्लेटलेट्स संख्या को जल्दी बढ़ाने के लिए एक और घरेलू उपाय पपीते के पत्तों को पानी में उबालकर पीना है। यह विधि डेंगू और मलेरिया के मामले में विशेष रूप से प्रभावी है।
हालांकि प्लेटलेट्स का आकार छोटा होता है किंतु ये एक स्वस्थ शरीर के लिए अति आवश्यक हैं और डॉक्टर की सलाह से उपयुक्त समय पर इनका उपयुक्त उपचार किया जाना आवश्यक है।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2rKq6Lf
2. https://bit.ly/2LLhdhb
3. http://www.bloodjournal.org/content/126/3/286?sso-checked=true
4. https://bit.ly/2Yao0Hy



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