अपोलो मिशन के कंप्यूटरों से तेज़ हैं आज के स्मार्टफोन

जौनपुर

 24-07-2019 12:12 PM
संचार एवं संचार यन्त्र

20 जुलाई 2019 को पूरे विश्व ने चंद्रमा पर कदम को रखने की 50वीं वर्षगांठ मनाई तथा उस ऐतिहासिक पल को याद किया जब 20 जुलाई 1969 को एक मानव (नील आर्मस्ट्रॉन्ग) ने चंद्रमा की धरती पर अपना पहला कदम रखा। अपोलो-11 (Apollo-11) नाम से प्रसिद्ध नासा (NASA) का यह मिशन (Mission) संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के लिये एक बहुत बड़ी योजना थी। पांच दशक से भी अधिक समय पहले ऐसे विशाल प्रोजेक्ट के लिये तकनीकी चुनौतियों की कल्पना करना बहुत कठिन था। किंतु फिर भी उस मिशन को सफल बनाने में नासा के कंप्यूटरों (Computers) ने एक मूलभूत भूमिका निभाई। जहां उनकी सहायता से अंतरिक्ष में मनुष्यों का मार्गदर्शन किया गया वहीं उन्हें पुनः सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस भी लाया गया।

यह जानना आपके लिये बहुत रोचक होगा कि आज का एक स्मार्टफोन (Smartphone) नासा के इस मिशन में उपयोग किये गये कंप्यूटरों की तुलना में लाखों गुना उन्नत और तेज़ है। नासा के उन कंप्यूटरों की कीमत लगभग 3.5 मिलियन डॉलर थी जो कि प्रति सेकंड में कई सौ हज़ार ऑपरेशनों (Operations) को संचालित कर सकते थे। उनकी कुल मेमोरी (Memory) क्षमता मेगाबाइट रेंज (Megabyte Range) में थी। अंतरिक्ष यान के पर्यावरण संबंधी डेटा (Data) और अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की निगरानी करने के लिये विशिष्ट सॉफ्टवेयर (Software) विकसित किए गए थे जो उस समय के सबसे जटिल सॉफ्टवेयर थे। आज का IPhone 6, एप्पल (Apple) के बनाए गए 64 बिट कोर्टेक्स A8 ARM आर्किटेक्चर का उपयोग करता है, जो कि लगभग 1.6 अरब ट्रांसिस्टरों (Transistors) से बना होता है। यह 1.4 GHZ पर काम करता है। आईफोन-6 अपोलो युग के कंप्यूटरों की तुलना में 32,600 गुना तेज़ है जोकि निर्देशों को 120,000,000 गुना तेज़ी से प्रदर्शित कर सकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि एक iPhone का उपयोग एक ही समय में चंद्रमा पर 120,000,000 अपोलो अंतरिक्ष यान का मार्गदर्शन करने के लिए किया जा सकता था।

अपोलो के इस मिशन की बदौलत ही कई नवाचारों की उत्पत्ति भी हुई जिन्होंने आज पृथ्वी पर मानव जीवन को बदल दिया है। इनमें से कुछ नवाचार निम्नलिखित हैं:

रॉकेट: अपोलो-11 में सैटर्न वी रॉकेट (Saturn v rocket) का उपयोग किया गया था जो अभी भी सबसे शक्तिशाली रॉकेट के रूप में जाना जाता है। रॉकेटों के माध्यम से उपग्रह, अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष यान पृथ्वी की सतह से बाहर निकलते हैं ताकि वे दुनिया के बारे में अन्य जानकारियों को पृथ्वी पर उपलब्ध कराते रहें।

उपग्रह: मानवनिर्मित ऐसे उपकरण जो पृथ्वी की निश्चित कक्षा में परिक्रमा करते हैं कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। अपने संतुलन को बनाए रखने के लिए इन्हें अपने अक्ष पर घूमना आवश्यक है। उपग्रह अंतरिक्ष में कुछ प्रमुख उद्देश्यों के लिए प्रक्षेपित किए जाते हैं जिनका उपयोग दूरसंचार, मौसम विज्ञान संबंधी अध्ययन आदि के लिये किया जाता है।

ग्राउंड स्टेशनों का (Ground Stations) वैश्विक नेटवर्क (Network): अंतरिक्ष में वाहनों और लोगों के साथ संचार करना उतना ही महत्वपूर्ण था जितना कि उन्हें वहां पहुंचाना। 1969 चंद्र लैंडिंग (Landing) के साथ जुड़ी एक महत्वपूर्ण सफलता थी ग्राउंड स्टेशनों के वैश्विक नेटवर्क का निर्माण। इसे डीप स्पेस नेटवर्क (Deep Space Network) भी कहा जाता है जिसका उपयोग अपोलो-11 पर अंतरिक्ष यात्रियों के साथ संवाद करने के लिए किया गया था। चंद्रमा पर कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग के पहले टीवी चित्रों को इसी नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित किया गया था।

अंतरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें:
अपोलो कार्यक्रम की तैयारी में अगस्त 1959 में मानव रहित उपग्रह एक्सप्लोरर VI (Explorer- VI) ने ऊपरी वायुमंडल पर शोध करने वाले मिशन पर अंतरिक्ष से पृथ्वी की पहली तस्वीरें लीं। इसके लगभग एक दशक बाद अपोलो-8 के अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्र परिदृश्य से पृथ्वी की एक प्रसिद्ध तस्वीर ली, जिसे "अर्थराइज़" (Earthrise) नाम दिया गया।

अपोलो की इस सफलता ने अमेरिका की तकनीकी, आर्थिक और राजनीतिक श्रेष्ठता का प्रदर्शन करते हुए सोवियत संघ, रूस के साम्यवाद के ऊपर विजय प्राप्त की। लेकिन अपोलो का यह हिस्सा किसी देश विशेष के लिये नहीं वरन पूरे वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समर्पित था। अपोलो ने जहां चंद्रमा पर उतरने की बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की वहीं पूरे विश्व को बहुत कुछ सिखाया। अपोलो मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष यात्री 800 पाउंड से अधिक चट्टानों की एक विस्तृत विविधता पृथ्वी पर लाये जिनके संघटकों का निर्माण 400 करोड़ साल से भी पहले हुआ था। इनके ज़रिए वैज्ञानिकों को सौर मंडल के शुरुआती दिनों के बारे में जानकारी मिली। एनोर्थोसाइट (Anorthosite) नामक चट्टान की खोज से पता चला है कि एक समय में चंद्रमा बहुत जटिल भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का स्थल था। इस मिशन के माध्यम से चंद्रमा और स्थलीय चट्टानों की संरचना में तुलना करके इस सिद्धांत की पुष्टि हुई कि 4.5 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी से किसी बड़ी वस्तु के टकराव से चंद्रमा उत्पन्न हुआ तथा वह पृथ्वी से दूर चला गया। अपोलो मिशन 1972 में समाप्त कर दिया गया किंतु जो ज्ञान वे धरती पर लाये उसे अभी भी लागू किया जा रहा है।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2kg8YNx
2. https://bit.ly/2GrgzRo
3. https://www.nasa.gov/specials/apollo50th/learn.html



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