औषधीय गुणों से भरपूर है बेर

जौनपुर

 08-07-2019 11:28 AM
साग-सब्जियाँ

फल हमारे दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पाये जाने वाले पोषक तत्व हमारे शरीर का विकास करते हैं तथा हमारे स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रखते हैं। मौसम चाहे कोई भी हो, फलों की आवश्यकता हमारे शरीर को हरदम होती है। बेर भी इन्हीं फलों में से एक है जिसके पोषक तत्व हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं। तो आइये जानते हैं इसके कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में।

बेर का वैज्ञानिक नाम ज़िज़िफस मौरिशियाना (Ziziphus mauritiana) है जो कुछ हद तक खजूर के समान दिखता है और इसलिए दुनिया भर में रेड डेट (Red date - लाल खजूर), चाइनीज़ डेट (Chinese date - चीनी खजूर), कोरियन डेट (Korean date - कोरियाई खजूर) आदि के रूप में भी जाना जाता है। इस फल का पेड़ छोटा तथा सदाबहार झाड़ी के रूप में होता है, जिसकी ऊंचाई 15 मीटर तक हो सकती है। फल का आकार और इसकी आकृति अस्थायी होती है जो थोड़ा पक जाने पर रसदार हो जाता है जिसमें विशिष्ट सुगंध आने लगती है। इसकी त्वचा चिकनी, चमकदार और पतली होती है। बेर के रंग विभिन्न होते हैं किंतु सूखे बेर ज्यादातर गहरे लाल या बैंगनी रंग के होते हैं। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसमें विटामिन सी, ए और बी कॉम्प्लेक्स (Vitamin C, A & B Complex) की मात्रा भरपूर होती है।

माना जाता है कि इस प्रजाति की उत्पत्ति दक्षिण-पूर्व एशिया के इंडो-मलेशियाई क्षेत्र में हुई। बेर की फसल आज दक्षिणी अफ्रीका, भारत, चीन, इंडोमलाया, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में उगायी जाती है। भारत में बेर उत्पादित करने वाले प्रमुख राज्य हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु हैं। भारत में इस फल की कुछ किस्में अक्टूबर के अंत में पकती हैं जबकि कुछ फरवरी के मध्य से मार्च के मध्य तक या मार्च के मध्य से अप्रैल के अंत तक पकती हैं। उत्तर भारत में बेर के पेड़ों की उपज 80 से 200 किलोग्राम होती है। भारत में बेर की लगभग 125 किस्में पाई जाती हैं जिनमें उमरान, गोला, सीओ, मेहरून, कैथली, कांथा आदि महत्वपूर्ण किस्में शामिल हैं।

रैमनेशिया (Rhamnacea) परिवार से संबंधित ज़िज़िफ़स मौरिशियाना लामक (Ziziphus mauritiana lamk) भारतीय बेर की स्वदेशी किस्म है। परिपक्व होने के दौरान यदि किस्म को गर्म-शुष्क जलवायु तथा पर्याप्त नमी प्राप्त हो जाये तो इसकी उन्नत किस्म प्राप्त होती है। अच्छी गुणवत्ता वाले फलों के विकास के लिए वायुमंडल का शुष्क होना बहुत ही आवश्यक है तथा साथ ही साथ अच्छी गुणवत्ता के लिये गहरी रेतीली और दोमट भूमि भी आवश्यक है। अत्यधिक लवणीय मिट्टी इसके लिये उपयुक्त नहीं होती है।

बेर के सेवन से आप निम्नलिखित लाभ प्राप्त कर सकते हैं:
इन छोटे फलों में पोटेशियम (Potassium), फास्फोरस (Phosphorous), मैंगनीज़ (Manganese), लोहा और जस्ता जैसे खनिजों की मात्रा भरपूर होती है जो दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। फल में मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) की मात्रा को बेहतर बनाता है जिससे एनीमिया (Anemia) होने की सम्भावना कम हो जाती है तथा रक्त प्रवाह का विनियमन भी अच्छा होता है।

फल में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट (Antioxidant) कोशिका क्षति को रोकते हैं तथा स्वस्थ और मुँहासे मुक्त त्वचा प्रदान करते हैं।

सूखे बेर कैल्शियम (Calcium) और फॉस्फोरस का एक अच्छा स्रोत हैं जो हड्डियों के घनत्व को विकसित करने और बनाए रखने में मदद करते हैं। अगर आप गठिया से पीड़ित हैं तो बेर का फल आपके लिये अच्छा विकल्प हो सकता है जो जोड़ों में सूजन को कम करता है।

बेर फाइबर (Fibre) और ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है, जो आपके उपापचय को बढ़ावा देने में मदद करता है। इसके खनिज और विटामिन खाना पचाने में मदद करते हैं और कब्ज की समस्या को ठीक करने हेतु लाभदायक हैं।

बीज सहित पूरे फल में एंटीऑक्सिडेंट फाइटोकेमिकल्स (Antioxidant phytochemicals), पॉलीसेकेराइड (Polysaccharide), फ्लेवोनोइड (Flavonoid), सैपोनिन (Saponins) भरे होते हैं, जिन्हें शामक गुण माना जाता है। यह आपकी नसों को शांत करके नींद लाने में मदद करता है।

जहां मानव के लिये बेर स्वास्थ्यवर्धक है, वहीं पशुओं के लिये भी यह बहुत उपयोगी है। इसकी पत्तियों में 5.6% सुपाच्य क्रूड प्रोटीन (Crude protein) और 49.7% कुल सुपाच्य पोषक तत्व होते हैं जिससे यह पशुओं के लिए एक पोषक चारा बन जाता है तथा भेड़ और बकरियों के लिए एक पारंपरिक चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एक तुलनात्मक अध्ययन में यह देखा गया कि बेर के पत्ते तुलनात्मक रूप से पीपल या पकर (Pakar) के पत्तों से अधिक स्वादिष्ट होते हैं जिसे पशु आसानी से खा सकते हैं।

उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि जहां बेर के पत्ते हमारे लिये उपयोगी हैं वहीं पशुओं के पोषण में भी ये अपनी पूरी भूमिका निभाते हैं।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Ziziphus_mauritiana
2. http://vikaspedia.in/agriculture/crop-production/package-of-practices/fruits-1/ber
3. https://bit.ly/2G10NfS
4. https://www.dairyknowledge.in/article/ber-leaves
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://www.flickr.com/photos/asifcae/12571010584



RECENT POST

  • सबसे खतरनाक जानवरों में से एक है बॉक्स जेलीफ़िश, क्या बचा जा सकता है इसके डंक से
    मछलियाँ व उभयचर

     22-09-2021 09:08 AM


  • भारत की रॉक कट वास्तुकला से निर्मित भव्य विशालकाय आकृतियां
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-09-2021 09:46 AM


  • लकड़ी से बनी कुछ चीजें क्यों हैं काफी महंगी?
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     20-09-2021 09:31 AM


  • इतिहास की सबसे भीषण परमाणु दुर्घटना है, चर्नोबिल परमाणु दुर्घटना
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-09-2021 12:48 PM


  • जौनपुर की अनूठी शहर संरचना है यूरोप के प्रसिद्ध शहरों जैसी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     18-09-2021 10:07 AM


  • ओजोन परत के संरक्षण के लिए वैश्विक पैमाने पर उठाए गए कदम
    जलवायु व ऋतु

     17-09-2021 09:48 AM


  • जलवायु को विनियमित करने में महासागर की भूमिका
    समुद्र

     16-09-2021 10:09 AM


  • हाइड्रोपोनिक फार्म जब बिना मिट्टी के उग जाती हैं स्वादिष्ट व् पौष्टिक सब्जियां
    साग-सब्जियाँ

     15-09-2021 10:11 AM


  • मृदा के प्रकार व मृदा स्वास्थ्य का मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     14-09-2021 09:42 AM


  • दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों में बिल्लियां करती हैं विभिन्न प्रतीकों का प्रतिनिधित्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-09-2021 06:55 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id