क्‍यों है जमात-उल-विदा इतना महत्‍वपूर्ण

जौनपुर

 31-05-2019 11:00 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

इस्‍लाम धर्म में शुक्रवार का विशेष महत्‍व है। इस दिन की नमाज़ प्रत्‍येक मुसलमान (महिलाओं, बच्‍चों, बुजुर्गों और दिव्‍यांग को छोड़कर) के लिए अनिवार्य मानी जाती है। पवित्र रमज़ान माह के अंतिम शुक्रवार को संपूर्ण विश्‍व के मुस्लिमों द्वारा जमात-उल-विदा के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो रमज़ान के महीने का एक-एक रोजा बहुत महत्‍वपूर्ण होता है, किंतु जमात-उल-विदा के अवसर पर रखा गया रोज़ा इस्‍लाम धर्म में विशेष महत्‍व रखता है। अब प्रश्‍न उठता है कि यह जमातुल विदा है क्‍या और क्‍यों यह इस्‍लाम धर्म में इतनी अहमियत रखता है?

‘जमात-उल-विदा’ अरबी भाषा का शब्द है। जुमा का अर्थ है ‘एकत्रित करना’ और विदा का ‘विदाई’। जमात उल विदा को अल-जुमा अल-यतीमाह अर्थात अनाथ शुक्रवार भी कहा जाता है। प्राचीन भाषाओं में, इस दिन को अरुबा के नाम से भी जाना जाता है। इसकी पवित्रता के कारण इसे अन्य सभी दिनों के ऊपर एक दिन के रूप में दर्शाया गया है।

इस्लाम में इस दिन की विशेषताएं:
1. पैगम्‍बर मोहम्‍मद ने बताया कि शुक्रवार के दिन ही अल्लाह ने स्वर्ग, पृथ्वी और संपूर्ण सृष्टि की रचना की। और साथ ही आदम को इसी दिन स्‍वर्ग में प्रवेश की अनुमति दी।
2. आदम को भी अल्‍लाह ने शुक्रवार के दिन ही बनाया और इसी दिन उसकी मृत्‍यु भी हुयी।
3. पवित्र कुरान की पहली सूरह इसी दिन बताई गयी।
4. शुक्रवार को इस्लाम के इतिहास में पहली मस्जिद, क़ुबा, पैगंबर मुहम्मद द्वारा बनाई गई थी और वहां पहली जुम्मे की नमाज़ अदा की गई थी।
5. मान्‍यता है कि इस दिन की गयी सभी दुआएं कुबूल होती हैं।

अपनी इन्‍हीं विशेषताओं के कारण शुक्रवार आज प्रत्‍येक मुसलमान के जीवन में विशेष अहमियत रखता है और माना जाता है कि इस दिन लोग सामाजिक कार्य जैसे गरीबों और असहाय लोगों को दान इत्‍यादि, भी करते हैं। हर घर और मस्जिद में नमाज़ अदा की जाती है तथा कुरान पढ़ी जाती है। इस दिन का उल्‍लेख कुरान में भी किया गया है। इस दिन प्रत्‍येक मुसलमान के लिए नहाना अनिवार्य होता है। मान्यता है कि इस दिन नहाने से सभी पाप धुल जाते हैं।

संदर्भ:
1.https://blog.24hours.pk/glory-jumuatul-wida/
2.https://www.indiacelebrating.com/festivals/jamat-ul-vida/
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Jumu%27atul-Wida



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