मनोविज्ञान कैसे वस्तुओं की बिक्री में सहायक सिद्ध होता है?

जौनपुर

 04-05-2019 07:00 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

किसी उत्पाद या सेवा के उपभोग (या खरीद) की प्रक्रिया हमारी सोच से कई अधिक जटिल होती है। किसी वस्तु के उपभोग के लिए मनोविज्ञान एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। उपभोग केवल इस चीज पर निर्भर नहीं करता है कि किसी वस्तु को कैसे बेचा जाए, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि कैसे वस्तुओं की बिक्री बार-बार एवं अधिक हो। आज बाजार में लगभग हर उत्पाद को बेचने के लिए प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है। इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सफलता के लिए केवल एक प्रारंभिक खरीद को सुरक्षित करना ही काफी नहीं होता है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि लोग उनके द्वारा खरीदे गए उत्पाद और सेवाओं का उपयोग भी अवश्य और लगातार करें।

अक्सर किसी वस्तु की बिक्री को बढ़ाने के लिए मूल्य और भुगतान प्रक्रिया में छूट दी जाती है, ऐसा करते वक्त सोचा जाता है कि यदि ग्राहक उनके उत्पाद को खरीदें और उपयोग करेंगे, तो वह पुनः उनसे ही उत्पाद लेने आएंगे, लेकिन वास्तव में यह रणनीति हमेशा काम नहीं आती है। सबसे प्रभावी तरीकों में से एक तरीका यह है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई व्यक्ति किसी चीज़ को खरीदने के लिए पैसे खर्च कर रहा है तो वह क्यों कर रहा है? यह तथ्य उसको लगातार याद दिलाना आवश्यक है, इससे उसे यह ध्यान रहेगा कि उसके द्वारा खरीदी गयी वस्तु प्रभावशाली है। प्रारंभिक खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए, उपभोग करने वाले ग्राहक की मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।

प्रारंभिक खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए आज भी वार्षिक सदस्यता, उन्नत भुगतान, और बंडल मूल्य निर्धारण आदि जैसी रणनीति का उपयोग भुगतान को कम करने और ग्राहक को लुभाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा आपने अक्सर देखा होगा कि बाज़ार में और भी बहुत सी रणनीतियां हैं जिनके माध्यम से प्रारंभिक खरीद को प्रोत्साहित किया जाता है।

लोगों को वस्तु के मूल्य भुगतान के लिए नक़द लेनदेन की जगह क्रेडिट कार्ड (Credit card) से लेनदेन अधिक आसान लगता है। कुछ शोधों के अनुसार किसी उत्पाद की खपत वास्तविक लागत से बहुत अधिक नहीं होती है, लेकिन जिस माध्यम से हम उस लागत का भुगतान (और जिस तरीके से हम भुगतान करते हैं) करते हैं यह महत्व रखता है। जैसे कि नक़द लेनदेन में कितना भुगतान करना है, आपको इतने पैसे देने के बाद कितने बचेंगे, बिल कितना आया है आदि बाते हमारे तनाव के स्तर को बढ़ा देती हैं और इस कारण क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना ज्यादा आसान लगने लगता है। हालांकि अधिकांश लोगों को क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने पर कुछ देर बाद यह भी याद नहीं रहता कि उन्होंने कितने रूपए खर्च किये, जबकि यदि वे भुगतान मुद्रा के नोटों से करें तो उन्हें अधिक समय तक यह स्मरण रहता है।

उत्पाद के मूल्यों का भी उपभोग की दर पर प्रभाव पड़ता है। आपने अक्सर देखा होगा कि उत्पाद के मूल्यों को हमेशा 1,995 या 1,999 इस प्रकार रखा जाता है, यह एक आकर्षक मूल्य है और सीधे तौर पर 2,000 से देखने में कम ही लगता है। इस प्रकार उत्पाद का मूल्य ग्राहक को थोड़ा कम डराने वाला लगता है। इसके अलावा मूल्य निर्धारण भी इसमें महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्पादों और सेवाओं की मांग को बढ़ाने के लिए कपनियाँ अक्सर कीमतों में वृद्धि करती हैं। परंतु ये लागत बहुत लंबे समय के बाद बढ़ाई जाये तो ये रणनीति लागत पर ध्यान कम कर देती है और साथ ही साथ लोगों को लागतों के बदलाव के विषय में अवगत भी कराते रहना चहिये।

मनोवैज्ञानिक कारकों का उपयोग करके रूपांतरण दर को निम्न प्रकार अनुकूलित किया जा सकता है:
• संभावित ग्राहकों के साथ प्रारंभिक संचार में अपनी मासिक योजनाओं की लागत को बढ़ावा दें। और जब वे इसे समझने लगे तब ग्राहकों को वार्षिक योजना से संबंधित छूट के बारे में बताने से रूपांतरण दर को अनुकूल किया जा सकता है।
• अपनी एजेंसी और कॉर्पोरेट व्यापारियों के साथ रीफ्रैमिंग (Reframming) मूल्य का परीक्षण करना चाहिये, क्योंकि वे आपके प्रतिद्वंद्वियों के मूल्य निर्धारण संरचनाओं से अधिक परिचित हो सकते हैं।
“तीन-आसान-भुगतान” रणनीति को केवल ई-कॉमर्स (E-commerce) या व्यवसाय से उपभोक्ता तक (business-to-consumer) संचार में लागू किया जाना चाहिए।

उपभोग का मूल्य निर्धारण और मनोविज्ञान
मूल्य निर्धारण किसी वस्तु के उपभोग को प्रभावित करता है। लोग किसी उत्पाद का उपभोग अधिकतर तब ही करते हैं जब वे इसकी लागत से अवगत होते हैं। वस्तुओं के अधिक उपभोग का मतलब है वस्तुओं की उच्च बिक्री। दीर्घकालिक संबंधों के निर्माण के लिए कंपनी को अपने ग्राहकों को उन उत्पादों का उपभोग करने के लिए प्रेरित करना होगा जो उन्होंने पहले भी खरीदे हैं। खपत स्विचन (Switching) भी लागत स्थापित करने में मदद करती है। उदाहरण के लिए सॉफ्टवेयर व्यवसाय में, कंपनियां अक्सर शुरुआती एप्लिकेशन को बेचने की तुलना में अपग्रेडेड एप्लिकेशन (upgraded application) से अधिक पैसा कमाती हैं। एक बार जब ग्राहक किसी एप्लिकेशन का उपयोग करना शुरू कर देते हैं, तो उन्हें बाद में अपग्रेडेड एप्लिकेशन भी खरीदना पड़ता है। अतः किसी भी व्यवसाय के लिए वस्तुओं का उपभोग महत्वपूर्ण है जो वस्तुओं की बार-बार सकारात्मक बिक्री को बढ़ाता है।

खपत की दर उन व्यवसायों के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं है जिनमें दो आय के साधन होते है जैसेकि मूवी थिएटर (movie theaters), स्पोर्ट्स एरेनास (sports arenas), और कॉन्सर्ट हॉल (concert halls)। इन व्यवसायों में टिकट बिक्री आय का एक स्रोत है और पार्किंग, भोजन और पेय आदि बिक्री आय का दूसरा लाभदायक स्रोत है।

संदर्भ:
1. https://tactics.convertize.com/definitions/psychology-of-consumption
2. https://blog.wishpond.com/post/115675436070/conversion-rate-optimization-chapter-7
3. https://bit.ly/2vAROMS
4. https://hbr.org/2002/09/pricing-and-the-psychology-of-consumption

चित्र सन्दर्भ:
1. https://bit.ly/2Wo43rO
2. https://bit.ly/2PJMEYi
3.
https://bit.ly/2Y3y2Wv


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