जौनपुर की एक झलक अहमद जी की कविता में

जौनपुर

 30-04-2019 07:00 AM
ध्वनि 2- भाषायें

साहित्‍य जगत में एक पंक्ति काफी प्रसिद्ध है, ‘जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि’। इस बात में कोई दो राय भी नहीं है, क्‍योंकि वास्‍तव में कवि अपनी कल्‍पना से जीवन और समाज के उन पहलुओं को छू लेते हैं, जहां सामान्‍य मनुष्‍य की पहुंच संभव नहीं है। आज हम उर्दू कविता जगत के एक प्रख्‍यात कवि डॉ. अहमद अली बरकी आज़मी जी द्वारा लिखी कविताओं में से एक कविता चुनकर लाए हैं, जिसका केंद्र बिंदु जौनपुर है। अहमद जी इस कविता के माध्‍यम से जौनपुर के भव्‍य इतिहास और वर्तमान स्थिति दोनों को ही बड़ी खूबसूरती से पेश करते हैं।

है यह बर्की यादगार ऐ जौनपुर
दिलनशीं हैं शाहकार ऐ जौनपुर
था कभी यह मर्ज ऐ अहले नज़र
क्या हुई अब वो बहार ऐ जौनपुर
है निहायत कार अहमद यह ब्लॉग
बाइस ऐ इज्जो वेकार ऐ जौनपुर
मुस्तहक हैं दाद के इस के मुदीर
रूह परवर है दयार ऐ जौनपुर
थे शाफिक ओ कामिल औ मोहसिन रजा
अहद ऐ हाज़िर में वेकार ऐ जौनपुर
कहते थे इस शहर को शिराज़ ऐ हिन्द
है माता ऐ फन निसार ऐ जौनपुर
है मेरी ससुराल भी बर्की यहाँ
खूब हैं गर्द औ गुबार ऐ जौनपुर।

कवि अहमद, मानव की अमूक भावनाओं को अपनी कविता के माध्‍यम से अभिव्‍यक्‍त करने में निपुण हैं, साथ ही वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी लेखनी चलाते हैं। अहमद जी मूलतः उत्‍तर प्रदेश से संबंधित हैं। उर्दू और फ़ारसी में स्‍नातकोत्‍तर की शिक्षा हासिल कर चुके अहमद जी ने अपनी शिक्षा के दौरान ईरान, अफगानिस्तान सहित कई देशों में अध्ययन हेतु दौरा किया। वर्तमान में यह ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio), नई दिल्ली के बाहरी सेवा प्रभाग की फारसी सेवा में अनुवादक-सह-उद्घोषक के रूप में सेवारत हैं। इन्‍हें 2004 की सुनामी, 2011 का जापान भूकंप, वैज्ञानिक अभियान, पोलियो और एड्स जैसे स्वास्थ्य विषयों, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय मुद्दों, ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) और संयुक्त राष्ट्र जैसे मुद्दों पर लिखने के लिए भी जाना जाता है।

क्‍या हम पे गुजरती है उसे हम कहते-कहते कह न सके।
सोचा था रहें खामोश मगर चुप रहते-रहते रह न सके।
हम अर्ज ए तमन्‍ना करते रहे, उस पर न हुआ कोई भी असर।
था इतना ज्‍यादा सदम-ए-गम हम सहते-सहते सह ना सके।

डॉ. अहमद अली बरकी आज़मी

ऊपर दिए गये चित्र के पार्श्व में जौनपुर और केंद्र में कवि डॉ. अहमद अली बरकी आज़मी की पहली उर्दू कविता संग्रह "रूह -ए- सुखन" का मुखपृष्ठ है।

सदर्भ:
1. https://www.jaunpurcity.in/2013/10/a-poetic-tribute-to-jaunpur-city-by-dr.html
2. https://www.hamarajaunpur.com/2015/04/barqi.html
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Ahmad_Ali_Barqi_Azmi
4. https://www.youtube.com/watch?v=KBPtah3hw9Y

चित्र सन्दर्भ :-
1. https://issuu.com/ahmadalibarqiazmi/docs/rooh__e_sukhan_final_book_-_01__3__



RECENT POST

  • अन्नदाता कहे जाते है नोबेल पुरस्कार विजेता- नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग (Norman Ernest Borlaug)
    बागवानी के पौधे (बागान)

     23-05-2019 10:30 AM


  • जौनपुर का एक शानदार वन्य जीव - बारहसिंगा
    स्तनधारी

     22-05-2019 10:30 AM


  • फिजी भेजे गए थे भारत से लाखों गिरमिटिया श्रमिक
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     21-05-2019 10:30 AM


  • संक्षेप में भार‍तीय क्रिकेट का क्रमिक इतिहास
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     20-05-2019 10:30 AM


  • सूरीनाम देश का बैथक गण संगीत है भारतीय
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     19-05-2019 10:00 AM


  • अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन की कुंजी हो सकती है कृषि
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     18-05-2019 09:30 AM


  • कृषि कैसे भारत के आर्थिक विकास में है सहायक?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-05-2019 10:30 AM


  • भारत में उर्दू साहित्य का भविष्य पतन की ओर हो रहा अग्रसर
    ध्वनि 2- भाषायें

     16-05-2019 10:30 AM


  • जौनपुर का एक दुर्लभ पक्षी हरगीला
    पंछीयाँ

     15-05-2019 11:00 AM


  • मुस्लिम देश इंडोनेशिया की डाक टिकटों में रामायण की छाप
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     14-05-2019 11:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.