कैरम का संक्षिप्‍त इतिहास एवं उसका परिचय

जौनपुर

 03-04-2019 07:15 AM
हथियार व खिलौने

शारीरिक रूप से खेले जाने वाले अधिकांश खेल मेल मिलाप और सौहार्द पूर्ण संबंधों का प्रतीक होते हैं। वर्तमान पीढ़ी में इसका स्‍वरूप बदल रहा है, वे आज सामूहिक रूप से खेलने की बजाय फोन, विडियो गेम(Video game), इत्‍यादि में खेलना ज्‍यादा पसंद कर रहे हैं। लेकिन फिर भी आज ऐसे कई खेल हैं जिनका आनंद सामुहिक रूप से खेले जाने में ही आता है। कैरम भी ऐसे ही खेलों में से एक है। कैरम के खेल से कितने ही लोगों की बचपन की यादें जुड़ी होती हैं। छुट्टियों के दिनों में परिवार के साथ कैरम खेलने का आनंद ही कुछ और होता है। यह प्राचीन खेल अपनी सुगम्‍यता के कारण न सिर्फ अस्तित्‍व में बना हुआ है बल्कि विश्‍व स्‍तर पर फैल चुका है। यह महिलाओं और बच्‍चों तक सीमित नहीं है बल्कि इसे प्रतिस्‍पर्धी स्‍तर पर खेला जाता है।

इस लोकप्रिय खेल का उद्भव कहां से हुआ इसके प्रत्‍यक्ष लिखित प्रमाण तो किसी के पास नहीं हैं। परंतु माना जाता है कि इसका उद्भव, लिपि के विकास से भी पूर्व हो गया था, किंतु इस विषय में अलग अलग अवधारणाएं अवश्‍य हैं। कोई इसका स्रोत भारत में मानता है, कोई पुर्तगाल में और कुछ का मानना तो यह है कि इसका उद्भव बर्मा (म्‍यांमार) में हुआ है।

यही स्थिति ‘कैरम’ शब्‍द की भी है। इसके विषय में भी कोई जानकारी उपलब्‍ध नहीं है कि इसे प्रथम बार कब प्रयोग में लाया गया था। इसके विषय में भी कहा जाता है कि इसकी उत्‍पत्ति दक्षिण-पूर्व एशिया में तिमोर में हुयी थी, जिसे पुर्तगालीयों द्वारा प्रसारित किया गया। यदि बात की जाए भारत की, तो माना जाता है कि यहां इसका इतिहास 18वीं शताब्दी से भी पहले का है। प्राचीन काल में महाराजा अपने महलों में यह खेल खेलते थे। पटियाला के एक महल में कांच से बनी सतह वाला एक ऐसा कैरम बोर्ड आज भी उपलब्ध है।

प्रारंभ में पश्चिमी जगत इससे अनभिज्ञ था, किंतु प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद यह खेल बहुत लोकप्रिय हुआ। आज यह विश्‍व स्‍तर पर अपना स्‍थान बना चुका है तथा प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। आज विश्‍व के लगभग 50 देश इस खेल को खेलते हैं तथा इसकी देखरेख ‘अंतर्राष्ट्रीय कैरम फेडरेशन’(International Carrom Federation) द्वारा की जाती है। भारत में इस खेल का नियंत्रण एवं विस्‍तार ‘ऑल इंडिया कैरम फेडरेशन’(All India Carrom Federation) द्वारा किया जाता है।

कैरम खेलने के लिए कुछ नियमावलियों को भी तैयार किया गया है। यह खेल एक चकोर काष्‍ठ बोर्ड में कुछ गोटियों की सहायता से खेला जाता है, जिसमें अधिकतम चार खिलाड़ी तथा न्‍यूनतम दो खिलाड़ी खेल सकते हैं। कैरम बोर्ड में गोटियों को वृत्‍ताकार में रखा जाता है जिसमें केन्‍द्र में लाल गोटी (रानी) तथा अन्‍य रंग (सफेद और काली) की गोटियों को इसके चारों ओर लगाया जाता है। सफेद गोटी को रानी गोटी के इर्द-गिर्द अंग्रेजी वर्णमाला के बड़े ‘Y’ की आकृति के अनुसार लगाया जाता है। बोर्ड के प्रत्येक दो छिद्रो के मध्य एक लंबी पट्टी खींची जाती है| इस प्रकार से ये चार पट्टियां होती है| स्ट्राइकर(Striker) इन पट्टियों की दोनों रेखाओ कों छूकर रखा जाता है| स्ट्राइकर से गोटी पर निशाना लगाकर उसे छिद्र में डाला जाता है| प्रत्‍येक खिलाड़ी अपनी-अपनी साइड पर बैठता है तथा एक खिलाड़ी एक ही साइड से स्ट्राइक कर सकता है।
यह खेल मुख्य रूप से ज्यामिति और भौतिकी पर आधारित है। इसके लिए गहरी एकाग्रता और कौशल की भी आवश्यकता होती है।

कैरम खेलने के नियम निम्न हैं :-
1. यदि स्‍ट्राइकर छिद्र में गिर जाता है तो आपको एक गोटी तथा अपनी एक बारी छोड़नी पड़ेगी। यदि गोटी सहित स्‍ट्राइकर छिद्र में गिरता है तो आपको गोटी वापस रखनी पड़ेगी तथा दुबारा शोट मारने का अवसर दिया जाएगा।
2. यदि आपके प्रतिद्वंद्वी का स्‍ट्राइकर छिद्र में गिर जाता है तो उसे एक गोटी देनी पड़ेगी और यदि आपके साथ अब तक एक बार भी ऐसा नहीं हुआ है तो आपको एक अतिरिक्‍त अंक प्राप्‍त होगा।
3. यदि रानी के साथ एक अतिरिक्‍त गोटी छिद्र में चली जाती है, तो रानी आपकी हो जाएगी। इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता कौन सी गोटी पहले गयी।
4. कैरम बोर्ड से यदि कोई गोटी उछल कर बाहर चली जाती है, तो गोटी को पुनः बोर्ड में रख दिया जाता है और यदि वह आधी बोर्ड के अंदर और आधी बोर्ड से बाहर रहती है तो उसे यथा स्थिति छोड़ दिया जाता है।
5. यदि आप अपनी विपक्षी की गोटी को छिद्र में डाल देते हैं तो आपको अपना एक अवसर खोना पड़ेगा। यदि आप उसकी अंतिम गोटी को छिद्र में डाल देते हैं तो आपको बोर्ड सहित अपने तीन अंक छोड़ने पड़ेंगे।
6. यदि आप रानी से पूर्व अपनी अंतिम गोटी को छिद्र में डालते हो तो आपको बोर्ड सहित अपने तीन अंक छोड़ने पड़ेंगे।

संदर्भ:
1. http://www.carrom.co.uk/history-of-carrom/
2. https://www.indianetzone.com/58/history_carrom_india.htm
3. https://www.carrom.co.uk/carrom-rules/



RECENT POST

  • ईस्टर (Easter) के दिन ईश्वर को समर्पित संगीत
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     20-04-2019 06:32 PM


  • क्या सच में अकबर द्वारा सुनाई गयी थी जौनपुर के काजी को मौत की सजा?
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     20-04-2019 10:00 AM


  • क्यों मनाया जाता है ईसाई त्यौहार ईस्टर (Easter)?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-04-2019 09:29 AM


  • श्रमण परंपरा: बौद्ध और जैन धर्म में समानताएं और मतभेद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-04-2019 11:08 AM


  • जौनपुर का काजी और जुम्मन की मनोरंजक लोककथा
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-04-2019 12:27 PM


  • जाने सल्तनत काल में किस प्रकार संगठित की जाती थी जौनपुर सरकार
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     16-04-2019 04:08 PM


  • शास्त्रीय संगीत जगत में ख्‍याल शैली का विकास
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     15-04-2019 02:09 PM


  • मुस्लिम समुदाय के बुनियादी मूल्यों को व्यक्त करता त्यौहार, ईद-उल-फित्तर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-04-2019 07:30 AM


  • थाईलैंड में अयुत्या (Ayutthaya) और भारत में अयोध्या
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-04-2019 07:15 AM


  • जलियांवाला बाग हत्याकांड का गांधी जी पर प्रभाव
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     12-04-2019 07:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.