लंदन के क्यू गार्डन (Kew Garden) में हिन्दुओं के धार्मिक पौधों का चित्रण

जौनपुर

 30-03-2019 09:30 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

जौनपुर अपने रोचक इतिहास के साथ-साथ अपने वनस्पति संग्रहालय के लिये भी प्रसिद्ध है। यह उन कुछ चुनिंदा संग्रहालयों में से एक है जिसमें जन सामान्य को भी जाने और अध्ययन की अनुमति होती है। इस संग्रहालय की स्थापना जौनपुर के तिलक धारी कॉलेज (टी.डी. कॉलेज) में वनस्पति विज्ञान के छात्रों के अध्ययन करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके बारे में आप हमारे एक अन्य लेख (https://jaunpur.prarang.in/posts/2163/botany-museum-in-jaunpur) में जान सकते है। परंतु क्या आप जानते है, लंदन में दुनिया का सबसे शानदार परिसर है जिसमें कई बाग़ हैं और उनमे कई बहुमूल्य वनस्पतियां हैं, इस परिसर को क्यू(Kew) के रॉयल बॉटनिक गार्डेंस के नाम जाना जाता है।

यह लंदन के शीर्ष पर्यटक आकर्षणों में से एक है और एक विश्व धरोहर स्थल भी है। इस संग्रहालय में विभिन्न प्रकार के पौधे शामिल हैं और इसके वनस्पति संग्रह में सैकड़ो संरक्षित पौधों के नमूने हैं। इसके आलावा यहां मारियन नॉर्थ द्वारा बनायी गयी एक गैलरी(Gallery) भी मौजूद है जिसमें कई पौधों के चित्रों का संग्रह शामिल हैं। आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि इस गैलरी में "हिंदुओं के धार्मिक पौधों" के नाम से एक बड़ा संग्रह भी मौजूद है। ये सभी चित्र प्रकृति के अध्ययन के लिये अपरंपरागत कलाकार द्वारा चित्रित किये गये हैं। इन चित्रों को सड़कों के किनारे तथा मंदिर के मैदानों जैसी जगहों पर तेल रंग से चित्रित किया गया है और स्वर्ण अक्षरों के शीर्षक से पता चलता है कि इन दृश्यों को कहां खींचा या चित्रित किया गया है।

इस संग्रह के अट्ठाईस अंडाकार चित्रों को नीचे लगाया गया है जिससे एक मेहराब के दो किनारे भरे हुए हैं। ये चित्र मारियन नॉर्थ (1830-90, कलाकार) तथा आर्थर कोक बर्नेल (1840-82, संस्कृत विद्वान और दक्षिणी भारतीय भाषा और साहित्य के विशेषज्ञ) के बीच एक प्रस्तावित संयुक्त परियोजना का परिणाम हैं। बर्नेल और नॉर्थ ने अपनी यात्रा के दौरान फरवरी 1878 की शुरुआत में, विलियम रॉक्सबर्ग के खंड ‘फ्लोरा इंडिया’ (1820-1824) का उपयोग करते हुए अधिकांश सूचीबद्ध पौधों की पहचान की पुष्टि की और इन्होनें चित्र को बनाने के लिये फूल आने का इंतजार किया और अपने काम को अनजाम दिया। नॉर्थ ने केरल से बॉम्बे और लोनावाला की यात्रा की, वहां उन्होनें कार्ली(Karli) गुफाओं को देखने की इच्छा जताई। इन्होनें यहां जेम्स फर्ग्यूसन द्वारा लिखी “हिस्ट्री ऑफ इंडियन आर्किटेक्चर” पुस्तक पढ़ी जिसके बाद नॉर्थ ने अपनी गैलरी डिज़ाइन की।

कारली में नॉर्थ ने अशोक अथवा सराका-इंडिका (Saraca Indica) के एक फूल से लदे हुए वृक्ष का चित्रित किया, उन्होने इस चित्र में एक छत्ते से अशोक के फूलों को बाहर निकलते हुए दिखाया है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होनें शिमला में एक फूल और फलदार पौधें का भी चित्रण किया। इसके बाद अपनी सूची के बचे हुए दो पौधों के लिए वे कलकत्ता की यात्रा की तैयारी करने लगी। लेकिन भारी बारिश के कारण वे सितंबर तक कलकत्ता नहीं पहुंच पाई। फिर वे अक्टूबर के अंत में कलकत्ता लौटकर गई और अपने संग्रह को पूरा किया। फिर इन चित्रों की सफल प्रदर्शनी के बाद उन्होंने अपने संग्रह को स्थायी तौर पर लंदन के क्यू(Kew) परिसर में एक गैलरी का निर्माण किया। आज भी आप यहां उन चित्रों को देख सकते है।

संदर्भ:
1. किताब का नाम: मार्ग ए मेगजीन ऑफ द आर्ट्स ( The Magazine of Art), दिसम्बर 2018-मार्च 2019 VOL. 70 NO. 2
2. https://jaunpur.prarang.in/posts/2163/botany-museum-in-jaunpur



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