164 साल से सभी को ललचाती है जौनपुर की ये खास इमरती

जौनपुर

 18-03-2019 07:45 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

शिराज ए हिन्द की सरजमी जौनपुर एक जमाने में अपने इत्र और सुगंधित तेलों के लिए मशहूर था लेकिन आज जौनपुर शहर की 164 वर्ष पुरानी प्रसिद्ध और लजीज बेनीराम की इमरती देश-विदेश में धूम मचा रही है। शहर के ओलंदगंज के नक्खास मोहल्ले के निवासी बेनीराम देवी प्रसाद ने अपने दो सगे भाईयों के साथ सन 1855 से अपनी दुकान पर देशी घी की ‘इमरती’ बनाना शुरू किया था। उस समय देश गुलाम था फिर भी बेनीराम देवीप्रसाद ने अपनी इमरती की श्रेष्ठता एवं स्वाद बरकरार रखा। जिसे आज 164 साल बाद भी लोग दूर-दराज से खाने आते हैं।

जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की खासियत यह है कि यह हरी उड़द, देशी चीनी और देशी घी से लकड़ी की आंच पर ही बनाई जाती है। इसके जायके के दिवाने 9वें पूर्व प्रधानमंत्री स्व० चन्द्रशेखर से लेकर कई बड़ी हस्तियां रही है। इसकी खुशबू जौनपुर ही नहीं बल्कि देश के कोने कोने तक फैली है। इस आधुनिक युग में भी इस इमरती को बनाने के लिये उड़द की दाल को सिल बट्टे पर पीसा जाता है। जिसके कारण आज भी उसका स्वाद जस की तस बरकरार है। इसी खास विधि के कारण इमरती के स्वाद में चार चांद लग जाते है। इस विडियो में आप इस विश्व प्रसिद्ध इमरती को बनते हुए देख सकते है।


बेनीराम देवी प्रसाद के बाद उनके लड़के बैजनाथ प्रसाद, सीताराम व पुरषोत्तम दास ने अपना कारोबार बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद अब तीसरी पीढ़ी में विष्णु चन्द, प्रेमचन्द एवं जवाहरलाल ने इस इमरती की विदेशी लोगों तक पहचान कराई। अब जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को बेनीराम देवी प्रसाद की चौथी पीढ़ी के वंशजों रवीन्द्रनाथ, गोविन्द, धर्मवीर एवं विशाल ने संभाल लिया है और इसे विदेश भी भेजा जाने लगा है। जौनपुर से जो भी व्यक्ति अपनी रिश्तेदारी या मित्रों से मिलने जाता है वह यहां की प्रसिद्ध बेनीराम की इमरती जरूर ले जाता है, उसका स्वाद और गुणवत्ता अभी भी बरकरार है। देशी चीनी और देशी घी से बनने के कारण इमरती ठंडी रहने पर भी मुलायम रहती है। ये इमरती कम से कम दस दिन तक फ्रिज में रखे बिना खाने योग्य बनी रह सकती है।

लगभग 164 सालों से अपने स्वाद के लिए मशहूर इस इमरती के बारे में सोचते ही मुंह में पानी आ जाता है। लोग आजादी से लेकर इस इमरती के दीवाने हैं। गरम गरम, मुलायम इमरती के बिना जौनपुरियों का हर त्योहार अधूरा होता है।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2W3l1eK
2. https://www.hamarajaunpur.com/2014/08/blog-post_20.html
3. https://bit.ly/2UCi2JJ
4. https://bit.ly/2TD7jlT



RECENT POST

  • जौनपुर में जल संकट से निजात दिलाने में सहायक है वर्षा जल संचयन
    जलवायु व ऋतु

     27-06-2019 10:36 AM


  • जनसँख्या वृद्धि नियंत्रण में महिलाओं का योगदान
    व्यवहारिक

     26-06-2019 12:19 PM


  • हाथीदांत पर प्रतिबंध लगने के बाद हुई ऊँट की हड्डी लोकप्रिय, परन्तु अब ऊँट भी लुप्तप्राय
    स्तनधारी

     25-06-2019 11:10 AM


  • भारतीय डाक और भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी पाने के लिए युवाओं ने क्यों लगाई है होड़?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     24-06-2019 12:02 PM


  • अन्तराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में भारतीयों ने जड़े हैं पांच दोहरे शतक
    हथियार व खिलौने

     23-06-2019 09:00 AM


  • भारत के पांच अद्भुत जंतर मंतर में से एक है हमारे जौनपुर के पास
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-06-2019 11:27 AM


  • प्राणायाम और पतंजलि योग के 8 चरण
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     21-06-2019 10:16 AM


  • जौनपुर के पुल पर आधारित किपलिंग की कविता ‘अकबर का पुल’
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-06-2019 11:15 AM


  • डेनिम जींस का इतिहास एवं भारत से इसका सम्बन्ध
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-06-2019 11:02 AM


  • क्या हैं नैनो प्रौद्योगिकी वस्त्र?
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     18-06-2019 11:02 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.