कन्नौज में प्राकृतिक तरीके से कैसे तैयार की जाती है इत्तर

जौनपुर

 17-02-2019 10:00 AM
गंध- ख़ुशबू व इत्र

कन्नौज शहर जिसे हम भारत में इत्तर की राजधानी भी कहते है। पिछले 5000 वर्षों से इस शहर में प्राकृतिक तरीके से फूलों से इत्तर का उत्पादन किया जाता है। इस शहर के लगभग 80% जनसंख्या इत्तर के कारोबार में जुड़ी हुई है। लोगों का कहना है कि प्राचीन काल से ही हमारे आयुर्वेद के ग्रंथों में इत्तर बनाने का उल्लेख है। यहाँ बने इत्तर अंगराग (साज सज्जा) और औषधि बनाने में उपयोग होता है और इन्हें पूरे देश-विदेश में बेचा जाता है।

कन्नौज के सामान ही फ्रांस की एक शहर है ग्रास, इसे विश्व की इत्तर राजधानी भी कहते है। यहाँ 18वी सदी से ही इत्तर बनाया जा रहा है परन्तु ग्रास और हमारे कन्नौज में यह अंतर है कि ग्रास में लोग आधुनिक तरीके से इत्तर का उत्पादन करते है और कन्नौज में आज भी पारम्परिक और प्राकृतिक तरीके से इत्तर का उत्पादन किया जाता है।

कन्नौज के इत्तर के बारे में अधिक जानने के लिए ऊपर दिए गए वीडियो पर क्लिक करें और इसके बारे में अछे से जाने।

सन्दर्भ:

1. https://www.youtube.com/watch?v=MB9_QlCBSb4


RECENT POST

  • नदिया के पार फिल्म से एक होली का गाना
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     21-03-2019 08:00 AM


  • श्मशान घाट की अनूठी और धार्मिक चिता भस्म होली
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-03-2019 11:07 AM


  • प्राचीन भारत में चमड़ा श्रमिकों और मोची की सामाजिक स्थिति
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-03-2019 07:06 AM


  • 164 साल से सभी को ललचाती है जौनपुर की ये खास इमरती
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     18-03-2019 07:45 AM


  • सूर्य ग्रहण का हैरान करने वाला विडियो
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     17-03-2019 09:00 AM


  • भारत का कुल कोयला भंडार और कितने दिन तक चलेगा?
    खदान

     16-03-2019 09:00 AM


  • आनुवांशिक रूप से संशोधित फ्लेवर सेवर टमाटर का सफर
    डीएनए डीएनए

     15-03-2019 09:00 AM


  • अपने ही सेनापति को अकबर द्वारा देश निकाला क्यों दिया गया
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     14-03-2019 09:00 AM


  • गर्मी के मौसम में कीट पतंगे ज्यादा क्यों दिखाई देते हैं
    तितलियाँ व कीड़े

     13-03-2019 09:00 AM


  • वैदिक युग में हुआ था जाति प्रथा का प्रारंभ
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     12-03-2019 09:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.