मांसाहारियों को आवश्‍यकता है एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति जागरूक होने की

जौनपुर

 15-02-2019 10:50 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

भारत में वर्ष दर वर्ष मांस की खपत तीव्रता से बढ़ती जा रही है। ग्रामीण भारत में, मटन, चिकन, मछली आदि की खपत वर्ष 2004 से वर्ष 2011 के बीच दोगुनी से अधिक हो गई है। यदि मांग बढ़ रही है तो सामान्‍य सी बात है उत्‍पादन भी बढ़ेगा। उत्‍पादन को बढ़ाने के लिए खाद्य पशु पालकों द्वारा विभिन्‍न हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, जिससे वे अपने व्यवसाय में कम मेहनत और लागत में अधिक मुनाफा कमा सकें। भारत में खाद्य पशुओं में एंटिबायोटिक (Antibiotic) का उपयोग भी इनमें से एक है। विकास को बढ़ाने और रोगों को रोकने के लिए खाद्य पशुओं को उनके खाद्य में एंटीबायोटिक दवाओं की एक छोटी मात्रा दी जाती है। किंतु मानव स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से यह बहुत हानिकारक होती है। टेट्रासायक्लिन (Tetracyclines) एंव फ्लुरोक्युनोलोन्स (fluoroquinolones) एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग मानव में हैजा, मलेरिया, श्वसन आदि के संक्रमण के उचार हेतु किया जाता है, जो पशुओं में सर्वाधिक रोगाणुरोधी के रूप में उपयोग किये जा रहे हैं। भारत में क्युनोलोन्स का उपयोग सर्वाधिक देखा गया है।

एक अनुमान के अनुसार पशु पालन केंद्रों में एंटीबायोटिक के उपयोग के उच्‍च स्‍तर वाले दस देशों में भारत चौथे स्‍थान पर है। इस एंटीबायोटिक उपयोग की उच्चतम वृद्धि दर 2030 तक निरंतर रहने वाली है। भारत में खाद्य पशुओं में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग में अनुमानित वृद्धि कुछ इस प्रकार है:

‘जर्नल साइंस’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यदि विनियामक प्राधिकरण कोई कदम नहीं उठाता है तो वर्ष 2030 तक खाद्य पशुओं के भोजन में एंटीबायोटिक दवाओं में 82 फीसदी की वृद्धि (4,796 टन एंटीबायोटिक दवाएं) हो सकती है। 2013 में खाद्य पशुओं को 2,633 टन एंटीबायोटिक दवाएं खिलाई गई थी। जो अप्रत्‍यक्ष रूप में हमारे शरीर में प्रवेश कर रही है जिसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।

एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को पूर्णतः अभी प्रतिबंधित तो नहीं किया जा स‍कता किंतु कुछ सख्‍त कदम उठाकर इनके उपयोग पर नियंत्रण लगाया जा सकता है, जैसे इनके उपयोग की सीमा निर्धारित करना तथा पशु चिकित्सा एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों में वृद्धि करना। नए अध्ययन में विश्व स्तर पर 50 मिलीग्राम / पीसीयू (PCU) पर फार्म के पशुओं में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को रोकने का सुझाव दिया गया है। यदि भारत में इस सीमा को अपनाया जाता है तो खाद्य पशुओं में एंटीबायोटिक का उपयोग 15% या 2036 तक 736 टन कम हो जाएगा। भारत में उच्‍च मात्रा में इनके उपयोग का एक सबसे बड़ा कारण एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों का कम होना भी है। यदि भारत में पशु चिकित्सा एंटीबायोटिक दवाओं के मूल्य पर 50 फीसदी उपयोगकर्ता शुल्क लगाया जाता है तो 2030 तक 46 फीसदी या 2,185 टन तक एंटीबायोटिक उपयोग को घटाया जा सकता है। यदि भारत यह दोनों कदम उठाता है तो खाद्य पशुओं में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को 61 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को यदि वास्‍तव में कम करना है तो सर्वप्रथम उत्‍पादक और उपभोक्‍ताओं को इसके दुष्‍परिणाम के विषय में जागरूक करना अत्‍यंत आवश्‍यक हैं। यह देखा भी गया है जिन क्षेत्रों में लोग इसके लिए जागरूक हुए हैं उन क्षेत्रों में स्‍वतः ही इनका उपयोग घटा है।

संदर्भ:
1.https://bit.ly/2WXzmuk



RECENT POST

  • मुगलकालीन प्रसिद्ध व्‍यंजन जर्दा
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     20-10-2020 08:47 AM


  • नौ रात्रियों का पर्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-10-2020 07:21 AM


  • कोविड-19 से लड़ रहे रोगियों के लिए आशा का स्रोत बना है, गीत ‘येरूशलेमा’
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     18-10-2020 10:10 AM


  • भारत में मिट्टी के स्वस्थ्य के प्रशिक्षण में नहीं बना कोविड-19 रुकावट
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     16-10-2020 10:22 PM


  • मनुष्य के अच्छे दोस्त- फायदेमंद कीट
    तितलियाँ व कीड़े

     16-10-2020 05:44 AM


  • महामारी प्रसार का मुख्य कारण माने जाने वाले चूहे, टीके के विकास में अब बन गए हैं
    स्तनधारी

     14-10-2020 04:15 PM


  • क्या है आल्हा रामायण का इतिहास और क्यूँ है वो इतनी ख़ास?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-10-2020 03:03 PM


  • विकास या पतन की और ले जाती सड़कें
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     12-10-2020 03:10 PM


  • रोजगार उत्पन्न करने में सहायक है, जौनपुर निर्मित दरियों का निर्यात
    घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

     12-10-2020 02:04 AM


  • जलवायु परिवर्तन के एक संकेतक के रूप में कार्य करता है, नोक्टिलुका स्किन्टिलन
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     11-10-2020 03:29 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id