शर्कीकाल के दौरान जौनपुर था दुनिया के शीर्ष मदरसों का केंद्र

जौनपुर

 06-02-2019 02:26 PM
मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

एक समय ऐसा भी था जब जौनपुर मुस्लिम शिक्षा और विज्ञान का बहुत बड़ा केंद्र बन गया था जहां पुरे विश्व से लोग ज्ञान लेने आते थे इसी कारण शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान जौनपुर को शिराज़े हिंद के नाम से नवाजा गया। यहां के हर शासक को गर्व था कि वे इस्‍लामिक ज्ञान और दर्शन के संरक्षक हैं। शर्कीकाल में जनपद जौनपुर शि‍क्षा, संस्‍क़ृति‍, संगीत, कला और साहि‍त्‍य के क्षेत्र में अपना महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखता था जिसने भारत के अलावा हेरात और बदख्शां जैसे देशों से भी छात्रों को अपनी ओर आकर्षित किया। उस समय में यहां दुनिया के कुछ शीर्ष मदरसे थे। परंतु अब यहां के मदरसे, शीर्ष 10 मदरसों की सूची में भी नहीं आते हैं। क्या आप जानते है कि इसका कारण क्या था? तो चलिये जानते हैं कि क्यों यहां के शीर्ष मदरसों को ध्वस्त कर दिया गया और आज उनका अस्त‍ित्व केवल इतिहास के पन्नों में मिलता है।

मदरसा शब्द का मतलब है ‘एक ऐसी जगह जहाँ पर शिक्षा दी जाती है और इनकी शुरूआत मस्जिदों से हुई थी।‘ चौथी शताब्दी में मस्जिदों का इस्तेमाल शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाने लगा। इस अवधि के दौरान मदरसों की अगुवाई वाली मस्जिदों की स्थापना सामान्य प्रवृत्ति थी। भारत में यदि इनकी बात की जाए तो उत्तर भारत के मध्य में स्वतंत्र मुस्लिम शासन की स्थापना सातवीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में कुतुब-उद-दीन ऐबक (1209) के शासन काल के दौरान शुरू हुई और मुल्तान में, नासिर अल-दीन कुबाचा, वहां शासक था, जिसने एक मदरसे का निर्माण किया जिसका प्रबंधन प्रसिद्ध विद्वान और लेखक, काजी मिनहाज-ए सिराज (1259) ने किया था। इस दौरन दो और मदरसों के नाम इतिहास में पाए जाते हैं; जिनके नाम मदरसा-ए माइजियो और मदरसा-ए नासिरिया थे।

हिजरी के आठवीं शताब्दी तक भारत में इस्लामिक स्कूलों की स्थापना का रिवाज आम हो गया था, अकेले दिल्ली में सुल्तान मुहम्मद तुगलक (1324) के शासनकाल में एक हज़ार मदरसे थे, जिनमें शिक्षकों के लिए वेतन शाही खजाने से दिया जाता था। यहां पर धर्मों के साथ-साथ तर्कसंगत विज्ञान और गणित को भी पढ़ाया जाता था। मुहम्मद मुग़ल के बाद फिरोज़ शाह तुगलक के शासन काल में उन्होंने पुराने मदरसे पुननिर्मित करवाये और कई नये मदरसों का निर्माण करवाया। उन्होंने गुलामों और बच्चों की शिक्षा तथा प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया एवं लड़कियों के लिए अलग स्कूल भी स्थापित किए।

शर्की सुल्तान पूर्वी भारत में जौनपुर के शासक थे। उन्होंने सैकड़ों मदरसों का निर्माण किया और विद्वानों को आमंत्रित करते हुए उन्हें बहुमूल्य जागीरें प्रदान कीं। जौनपुर की विषयक और शैक्षिक श्रेष्ठता लोदी सुल्तानों के अंतिम काल तक चली। मुहम्मद शाह के शासन काल तक 50 प्रसिद्ध मदरसे जौनपुर में थे जिन्‍हें इस्लामी अध्यात्मवाद में विश्व के सर्वश्रेष्ठ मदरसों में से एक माना जाता था। उस समय जौनपुर शि‍क्षा, संस्‍क़ृति‍, संगीत, कला और साहि‍त्‍य के क्षेत्र में सबसे आगे था। परंतु इन ऐतिहासिक मदरसों में से नाम मात्र के मदरसे ही आज बचे हुए हैं।

जब दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी ने जौनपुर पर आक्रमण कर अपना कब्जा किया तो उसने सभी मस्जिदों और मदरसों को नष्ट करवा दिया। इसी कारण आज यहां पुराने ऐतिहासिक मदरसे नहीं हैं। लेकिन अभी भी कई मस्जिदें जैसे कि अटाला मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद और जामा मस्जिद मौजूद हैं जिनकी गंध आज भी यहां विद्यमान है। अटाला मस्जिद को शर्की राजवंश के इब्राहीमशाह (1402-1438 ई.) ने 1408 ई. में बनवाया। हालांकि इसकी आधारशिला 1377 में दिल्ली के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक तृतीय के शासनकाल में रखी गई थी। इस मस्जिद के साथ जौनपुर का सबसे पुराना मदरसा भी जुड़ा हुआ है। मस्जिद से लगी मदरसे की इमारत आज तक मौजूद है। जिसके बारे में कहा जाता है कि भारत के प्रसिद्ध और चतुर शहेंशाह शेरशाह सूरी ने इस मस्जिद-मदरसा से शिक्षा ग्रहण की थी। इस मदरसे को ‘मदरसा दीन दुनिया’ के नाम से जाना जाता है। इसके अंदर की वास्तुकला अभी भी पुराने अताला देवी मंदिर को दिखाती है, जिसे राजा पृथ्वीराज चौहान के ससुर राजा विजया चंद्र ने बनाया था। इसके अलावा बीबी राजी ने सभी स्थानीय मुस्लिम निवासियों के लिए जौनपुर में लाल दरवाजा के आस-पास के इलाके में एक धार्मिक विद्यालय की स्थापना की, जिसका नाम जामिया हुसैनिया रखा गया था और यह आज तक मौजूद है। लाल दरवाजा मस्जिद (लाल पोर्टल मस्जिद या रूबी गेट मस्जिद) का निर्माण 1447 में रानी राजे बीबी ने किया था। यह मस्जिद जौनपुर के एक मुस्लिम संत मौलाना सैय्यद अली दाऊद कुतुबुद्दीन को समर्पित है।

संदर्भ:
1.https://archive.org/stream/historyofdeoband/HistoryOfTheDarAlUlumDeoband-Volume11980_djvu.txt
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Lal_Darwaza_Masjid,_Jaunpur
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Atala_Mosque,_Jaunpur



RECENT POST

  • शर्की सल्तनत के समय में जौनपुर और ज़फ़राबाद की शिक्षा प्रणाली और विद्वान
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     22-04-2019 07:39 AM


  • ईस्टर (Easter) के दिन ईश्वर को समर्पित संगीत
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     20-04-2019 06:32 PM


  • क्या सच में अकबर द्वारा सुनाई गयी थी जौनपुर के काजी को मौत की सजा?
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     20-04-2019 10:00 AM


  • क्यों मनाया जाता है ईसाई त्यौहार ईस्टर (Easter)?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     19-04-2019 09:29 AM


  • श्रमण परंपरा: बौद्ध और जैन धर्म में समानताएं और मतभेद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-04-2019 11:08 AM


  • जौनपुर का काजी और जुम्मन की मनोरंजक लोककथा
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-04-2019 12:27 PM


  • जाने सल्तनत काल में किस प्रकार संगठित की जाती थी जौनपुर सरकार
    मघ्यकाल के पहले : 1000 ईस्वी से 1450 ईस्वी तक

     16-04-2019 04:08 PM


  • शास्त्रीय संगीत जगत में ख्‍याल शैली का विकास
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     15-04-2019 02:09 PM


  • मुस्लिम समुदाय के बुनियादी मूल्यों को व्यक्त करता त्यौहार, ईद-उल-फित्तर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-04-2019 07:30 AM


  • थाईलैंड में अयुत्या (Ayutthaya) और भारत में अयोध्या
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-04-2019 07:15 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.