रामायण और महाभारत में उल्लेखित वर्तमान मल्लाह जनजाति

जौनपुर

 25-01-2019 02:11 PM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

विभिन्न और जनजाति दृष्टि से भी काफी समृद्ध राष्ट्र रहा है, वर्तमान समय में यहाँ रहने वाली अनेक जनजातियाँ कुछ समय पूर्व से नहीं वर्ण आदिकालीन समाज से रहती हुई आ रही हैं। जिनका उल्लेख हमारे धार्मिक ग्रंथों रामायण और महाभारत में भी देखने को मिलता है। जिनमें से एक है मल्लाह जाति, मल्लाह भारतवर्ष में रह रहे आदिकालीन मछुआरों की एक जाति है।

ऐसा माना जाता है कि मल्लाह जाति राजा निषाद राज की वंशक है। निषादों का मुख्य पेशा मछली पकड़ना और शिकार करना था। जब एक निषाद द्वारा पक्षी जोड़ों में से एक को मार दिया गया था तो दूसरा पक्षी उसे खोने के दर्द से पीड़ित था, इस गहरे दर्द ने ऋषि वाल्मीकि को अयोध्या के राजा राम और उनकी धर्मपत्नी रानी सीता के जीवन के इतिहास को लिखने के लिए प्रेरित किया था। वहीं निषादों के राजा गुहा भगवान राम के बहुत करीबी मित्र थे। इन्होंने भगवान राम और सीता माता को गंगा नदी पार कराने में मदद की थी।

महाभारत में निषादों को वन शिकारी और मछुआरों के रूप में वर्णित किया गया है। निषादों का उल्लेख उन जनजातियों के रूप में किया गया है जिनके पास उनके निवास के लिए पहाड़ियाँ और जंगल हैं और उनके मुख्य व्यवसाय हैं। वे विणा नामक राजा से जुड़े हुए थे।

मानवविज्ञानी विलियम क्रुक के अनुसार, मल्लाह शब्द एक अरबी शब्द से आया है जिसका अर्थ है ‘नमक होना’ या ‘एक पक्षी के रूप में पंखों को हिलाना’ ऐसा माना जाता है कि जब पहले परिवहन का कोई अन्य साधन नहीं था, तब मालों को नावों द्वारा ले जाया जाता था और नाविकों को मल्लाह, या माल-ला के रूप में संदर्भित किया जाता था। (जिसका शाब्दिक अर्थ हिन्दी में है, ‘माल या माल लाने वाला’)

वर्तमान में मल्लाह उत्तर भारत, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत और पाकिस्तान के आदिवासी पारंपरिक नाविक और मछुआरे जनजातियाँ या समुदाय है। जौनपुर में भी मल्लाह समुदाय व्यापक रूप से मौजूद है। मल्लाह एक अच्छी मात्रा में नेपाल और बांग्लादेश में भी पाए जाते हैं। उत्तर भारत में कई मल्लाह खेती और अन्य व्यवसाय भी करते हैं। उत्तर प्रदेश में, वे खड़ी बोली, अवधी और हिंदी बोलते हैं। अधिकांश समुदाय हिंदू हैं, हालांकि मुस्लिम मल्लाह की संख्या कम है। बिहार में, वे आमतौर पर कृषक और नाविक हैं। साथ ही वे हिंदू देवता निषाद के वंशक होने का दावा करते हैं। इस समुदाय को मंडलजी या मछुआ के नाम से भी जाना जाता है। वे मैथिली की अंगिका बोली और हिंदी की भोजपुरी बोली बोलते हैं। समुदाय में तीन उप-जातियां शामिल हैं, ढोर, परबटिकुरिन और सेमरी। उत्तर भारत में, मल्लाह द्वारा एक जाति संघ, अखिल भारतीय निषाद सभा (अखिल भारतीय निषाद संघ) की स्थापना की गयी, जो एक सामुदायिक कल्याण संघ के रूप में कार्य करता है।

पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में मल्लाह समुदाय का एक अन्य उप-समूह मौजूद है और उन्हें महिष के रूप में जाना जाता है। यह समुदाय मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र के पास पाया जाता है। वे बंगालवासी बोलते हैं और हिंदू हैं।

सिंध में, मल्लाह पारंपरिक रूप से नाव चलाने वाले और मछुआरे होते हैं। उनके द्वारा सिंधी बोली जाती है और वे मोहना जनजाति से जुड़े हुए हैं। मल्लाह में लगभग कोई अंतर्विवाह नहीं होते हैं। मल्लाह समुदाय में कई कुलों के नाम शामिल हैं, जिन्हें नख के नाम से जाना जाता है।

भारत में मल्लाह का विस्तार

मल्लाह समुदाय द्वारा बोली जाने वाली भाषा

संदर्भ:

1.https://en.wikipedia.org/wiki/Mallaah
2.https://peoplegroupsindia.com/profiles/mallah/
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Nishada_Kingdom#Description_in_Ramayana
4.https://joshuaproject.net/people_groups/17432/IN



RECENT POST

  • आश्चर्य की अवस्था उत्पन्न करता है जादू अभिनय
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     10-12-2019 12:38 PM


  • पारंपरिक परिधान के रूप में प्रयोग की जाती है पगड़ी
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     09-12-2019 12:46 PM


  • हैरतंगेज़ करतबों से भरा सर्कस
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     08-12-2019 12:15 PM


  • कार्बन उत्सर्जन भी है, जलवायु परिवर्तन का एक कारक
    जलवायु व ऋतु

     07-12-2019 11:17 AM


  • कृषि को काफी प्रभावित करती है मृदा अपरदन
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     06-12-2019 11:45 AM


  • क्या है, ऋण वित्तपोषण (Debt Financing) और इक्विटी वित्तपोषण (Equity Financing) )के मध्य अंतर
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     05-12-2019 01:30 PM


  • जौनपुर में पायी जाती हैं शहतूत की विभिन्न प्रजातियां
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     04-12-2019 11:16 AM


  • सदियों से उपयोग में लाया जा रहा है सोना
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     03-12-2019 12:21 PM


  • एड्स के उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है, भारत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     02-12-2019 11:52 AM


  • बीटल्स के एल्बम में भारतीय वाद्य यंत्रों का उपयोग
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     01-12-2019 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.