कलम या पेन का सुहाना सफर

जौनपुर

 12-01-2019 10:00 AM
वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

कलम यानी पेन का सफर बहुत लंबा है, देखा जाए तो सदियों पुराना है। इसी कलम ने सोच, एहसास और इतिहास तक का संग्रह बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। इसी कलम की वजह से आज हमें अपने पूर्वजों के बारे में जानकारियां मिली हैं। तो चलते हैं कलम के इस सुहाने सफर पर...

माना जाता है कि पहले नुकीले पत्थरों से लिखने का काम दुनिया में आरंभ किया गया। गुफाओं में रहने वाले लोगों ने इन्हीं नुकीले पत्थरों से दीवारों पर चित्रकारियां की। इन चित्रों में उनकी जिंदगी की झलक थी। अंत में 3000 ईसा पूर्व में कलम ने वास्तविक आकार ले लिया, मिस्र् के मेसोपोटामिया के लोगों ने पेपर जैसी चीज खोजी। इसका नाम “पपाइरस” था। इसे पतले से कड़े कागज के रूप में इस्तेमाल किया गया। और इस पर लिखने के लिये मिस्र के लोगों ने रीड कलम (reed pen) का निर्माण किया, जिससे आराम से उनके द्वारा बनाए गए पटल पर बिना किसी खरोंच के शब्दों को उकेरा जा सके। रीड कलम को “जुनकस मारीटिमस” नामक पौधे से बनाया जाता था। ये कलम बांस के पौधे के तने व प्राकृतिक तत्वों से बनाये गये थे और इनका उपयोग पटल पर लिखने के लिए किया जाने लगा।

इसके बाद 1300 ईसा पूर्व रोमनों ने एक धातु का कलम विकसित किया था जिसका उपयोग मोम के टेबल पर लिखने के लिये किया गया था, यह तीखे नोक वाला धातु से निर्मित कलम था जो आगे से पेंसिल जैसा दिखता था। इसका एक छोर नुकिला तथा दूसरा सपाट था। लिखने के दूसरे उपकरण के रूप में क्विल कलम (quill pen) यानी किसी पक्षी के पंख से बना कलम भी लंबे समय तक उपयोग में लाया जाता रहा। यह 5-6वीं शताब्दी में सवेल (स्पेन) में अस्तित्व में आया। हंस के पंख उच्च कोटि के थे, जो काफी मुश्किल से मिलने के साथ ही महंगे भी हुआ करते थे। ये व्यापक रूप से इस्तेमाल किए गए थे। समय के साथ लोगों ने हर क्षेत्र में काफी उन्नति की। साथ ही लेखन क्षेत्र में भी अपनी निर्माण कुशलता दिखाते हुए उन्होंने लेखन साम्रगी को भी विकसित किया, और 19वीं शताब्दी में आधुनिक फाउंटेन कलम (fountain pen) विकसित हुआ।

रोमन के आविष्कारक पेट्राचे पोयनारू (Petrache Poenaru) ने पहला फाउंटेन कलम विकसित किया। इसके खोखले हिस्से में स्याही भरकर लिखने का काम करते थे। इस दौरान क्विल पेनों का भी व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता था। 1787 में संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान को लिखने और हस्ताक्षर करने के लिए उपयोग किया गया था। परंतु क्विल कलम को 19वीं शताब्दी में धातु की निब वाले फाउंटेन कलम से बदल दिया गया। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में, क्विल कलम का उपयोग फीका पड़ने लगा और धातु की निब वाले फाउंटेन कलम की गुणवत्ता बढ़ गई। इसके एक सिरे को नुकीला बना कर निब या प्वाइंट का रूप देते थे। 19वीं शताब्दी के अंत में बॉल पॉइंट पेन (ball point pen) ने कलम के इतिहास में अपनी पहचान बनाई। इस कलम को सर्वप्रथम सार्वजनिक जोसेफ और जॉर्ज बिरो ने 1940 के दशक में किया, जो नाज़ी जर्मनी से अर्जेंटीना भाग गए थे। जोसेफ और जॉर्ज बिरो ने सही श्यानता वाली स्याही का उपयोग करके इस कलम को बनाया था। इस जोड़ी ने 1943 को इस कलम को “बिरोम”(Birome) नाम से पेटेंट करवाया था, और इनके पेटेंट को अर्जेंटीना में स्वीकार और बेचा गया।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कई कंपनियां चाहती थी की वे अपना खुद का बॉलपॉइंट पेन को व्यवसायिक रूप देना चाहा। इस मिशन का प्रयास 1940 के दशक में किया गया था, जब एबरहार्ड फैबर पेंसिल फैक्ट्री (Eberhard Faber pencil factory) ने एवरशार्प कंपनी (Eversharp Company) के साथ मिलकर अमेरिका में बिरोम से पेनों की बिक्री के लिए लाइसेंस दिया था। लेकिन अमेरिकी उद्यमी मिल्टन रेनॉल्ड्स ने एबरहार्ड फेबर और एवरशार्प कंपनी को हराकर अमेरिका को अपना बॉलपॉइंट पेन देने के लिए अर्जेंटीना की व्यापारिक यात्रा की। उन्होंने वहां से जो पेन लिया, उससे उन्होंने रेनॉल्ड्स इंटरनेशनल पेन कंपनी (Reynolds International Pen Company) बनाई। उन्हें एक अमेरिकी पेटेंट मिला और इस प्रकार रेनॉल्ड्स रॉकेट पहली व्यावसायिक रूप से सफल बॉलपॉइंट पेन बन गया। हालांकि रेनॉल्ड्स और एवरशार्प काफी समय तक सफल रहे, फिर भी दोनों अमेरिकी जनता की उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाये ।1950 के दशक तक, दोनों दिवालिया हो गए।

फिर उसके बाद 1953 में माइकल बिच नामक एक और निर्माता, “बिक पेन” (Bic Pens) के साथ मार्केटिंग की गहराई से उभरे और 1950 के दशक में उन्होंने अमेरिकन बाजार में नए बॉल पेन पेश किए और 1960 के दशक में अपने बिक पेन बेचने में सफल हो गए। 1940 से 1960 की अवधि, पेन के प्रत्येक निर्माण विनिर्माण के लिए प्रतिस्पर्धी युग था। फिर उसके बाद वर्ष 1962, वह समय था जब “मार्कर पेन”(Marker pen) का आधुनिक विकास हुआ। आधुनिक मार्कर पेन का आविष्कार टोक्यो स्टेशनरी कंपनी (जिसे अब पेंटेल के रूप में जाना जाता है) के जापानी युकियो हॉरी ने किया था। कुछ समय बाद 1963 में, जापानी कंपनी, ओट्टो द्वारा रोलरबॉल पेन को आम लोगो के लिए पेश किया गया था। 1990 में कंपनी द्वारा कलम के ऊपर रबड़ का कवर लगाया गया क्योंकि जब भी पेन को इस्तेमाल किया जाता था तो उसे पकड़ने में दिक्कत होती थी, इसको देखते हुए कंपनी द्वारा बाद में पेन के ऊपर रबड़ का कवर लगाया गया।

अब आपको पता चल गया होगा कि हमारे पन का इतिहास कितना पुराना है, और किस-किस बदलाव के साथ गुजरा है। हालाँकि आज कंप्यूटर, फोन और एंड्रॉइड का उपयोग लेखन के अन्य स्रोतों के रूप में किया जाता है परंतु फिर भी कलम हमारी दुनिया में बना हुआ है और पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं हुआ है। आज भी कलम रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल किए जाते हैं।

संदर्भ:
1.https://en.wikipedia.org/wiki/Pen
2.https://en.wikiversity.org/wiki/History_of_the_Pen
3.https://www.qualitylogoproducts.com/promo-university/history-of-pens.htm



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