देश के कुछ गिने-चुने वनस्पति संग्रहालयों में से एक जौनपुर में

जौनपुर

 04-12-2018 02:59 PM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

वनस्पति संग्रहालय (Botany Museum), वनस्पति शिक्षण में सहायक एक शक्तिशाली उपकरण है। इन संग्रहालयों में पौधों के नमूनों का संग्रह होता है, जिससे आपको सारे संसार की वनस्पति का, मुख्यतया अपने देश और क्षेत्र की वनस्पति का ज्ञान प्राप्त करने में सहायता मिलती है। इसके माध्यम से हम जान सकते है कि दुनिया में किस-किस तरह के, किन किन विधियों से पौधे लगाए जाते हैं साथ ही साथ हम यह भी जान सकते है कि कौन सा पौधा किस प्रकार के वातावरण के लिये अनुकूलित है। इस प्रकार वनस्पति संग्रहालय के विभिन्न नमूनों से कृषि, वन विज्ञान तथा दूसरे सबंधित विषयों को भी लाभ पहुंचता है।

उत्तर प्रदेश में केवल 10 विज्ञान संबंधी संग्रहालय ऐसे है जहां आप ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से जा सकते है। जिनमें से एक आपके शहर में भी स्थित है। जी हां! जौनपुर शहर भारत के उन शहरों में से एक है जिसमें "वनस्पति संग्रहालय" है जो जौनपुर के तिलक धारी कॉलेज में है। प्रत्येक किसान को यह जाना चाहिए और साथ ही साथ यहां के प्रत्येक व्यक्ति को इस वनस्पति संग्रहालय का महत्व को समझना चाहिए, आपके शहर में वो है जो हर शहर में नही होता। उत्तर प्रदेश के सभी 10 विज्ञान संबंधी संग्रहालय निम्नवत् है:

1. इंदिरा गांधी प्लैनेटेरियम, लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Indira Gandhi Planetarium, Lucknow, UP)
2. शरीर-रचना-विज्ञान संग्रहालय, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (Anatomy Museum, Allahabad, UP)
3. सरकारी शैक्षिक संग्रहालय, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश (Government Educational Museum, Muzaffarnagar, UP)
4. जीवविज्ञान संग्रहालय, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश (Zoology Museum, Muzaffarnagar, UP)
5. जवाहर प्लैनेटेरियम, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (Jawahar Planetarium, Allahabad, UP)
6. बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (Botanical Survey of India, Allahabad, UP)
7. वनस्पति संग्रहालय, अयोध्या, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश (Botany Museum, Ayodhya, Faizabad, UP)
8. वनस्पति संग्रहालय, जौनपुर, उत्तर प्रदेश (Botany Museum, Jaunpur, UP)
9. भूवैज्ञानिक संग्रहालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश (Geological Museum, Varanasi, UP)
10. जीववैज्ञानिक संग्रहालय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Zoological Museum, Gorakhpur, UP)

वर्तमान में भारतीय विज्ञान संबंधी संग्रहालयों और प्लैनेटेरियम का उद्देश्य इतिहास का संरक्षण और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की सार्वजनिक समझ को बढ़ाने का प्रयास करना है। हालांकि, भारत में विज्ञान संबंधी संग्रहालयों के इतिहास का अध्ययन बहुत व्यापक नहीं है परंतु हमें विज्ञान संबंधी संग्रहालयों की जानकारी राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद-National

Council of Science Museums (एनसीएसएम) की पूर्व महानिदेशक डॉ सरोज घोष (1986-1997) तथा पूर्व डीजी एनसीएसएम श्री इंगित के मुखोपाध्याय (1997-2009) के लेखों और प्लैनेटेरियम पर आधारित जानकारी नेहरू प्लानटेरियम (मुंबई) के पूर्व निदेशक (2003-2011) श्री पियुष पांडे के लेखन से प्राप्त हो सकती है। भारत में 1950 के शुरुआती वर्षों में, पंडित जवाहरलाल नेहरू, श्री जी डी बिड़ला, प्रोफेसर के.एस. कृष्णन, डॉ बी.सी. रॉय नें देश में विज्ञान संग्रहालयों की स्थापना में काफी दिलचस्पी दिखाई थी। इन सभी के समर्थन और श्री वेद प्रकाश बेरी, श्री रामानथ सुब्रमण्यन और श्री अमलेंद्रु बोस के नेतृत्व में, तीन विज्ञान संग्रहालय: बिड़ला संग्रहालय, 1954 (Birla Museum) पिलानी में; नई दिल्ली में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, 1956 (Science Museum of National Physical Laboratory) का विज्ञान संग्रहालय और कलकत्ता में बिड़ला औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय, 1959 (Birla Industrial & Technological Museum ) क्रमशः खोले गए थे। बाद में चौथा विज्ञान संग्रहालय विश्वेश्वरैया औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकीय संग्रहालय, 1965 (Visvesvaraya Industrial and Technological Museum) बंगलुरु में खोला गया था।

1970 के दशक में राष्ट्रीय योजना आयोग नें सीएसआईआर के तहत काम कर रहे विज्ञान संग्रहालयों की गतिविधियों का आकलन किया और कार्य दल गठित किया। इस कार्य दल ने देखा कि विज्ञान के संग्रहालयों के माध्यम से समाज में वैज्ञानिक जागरूकता पैदा की जा सकती है तथा हमें और ज्यादा विज्ञान संग्रहालयों को स्थापित करने की आवशयकता है। जिनकी गतिविधि को समन्वयित करने के लिए एक विशेष एजेंसी निर्माण होना चाहिए। इस प्रकार राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) का गठन 1978 में हुआ था। यह संस्थान पूरे देश के विभिन्न क्षेत्रों में फैले विज्ञान संग्रहालयों/केन्द्रों और प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं का प्रबंधन तथा विज्ञान केन्द्रों को विकसित करती है।

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से कई भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने स्नातक विज्ञान शिक्षा में प्राकृति के इतिहास के संग्रह का महत्व को समझा और उसकी आवश्यकता को महसूस किया नतीजतन, एर्नाकुलम (Ernakulam) के महाराज कॉलेज में सर्वप्रथम 1874 में एक प्राणी संग्रहालय (Zoology Museum) की स्थापना हुई। उस शताब्दी में केवल चार (सेंट जोसेफ कॉलेज (तिरुचिराप्पल्ली), मेरठ कॉलेज, क्राइस्ट चर्च कॉलेज (कानपुर), सेंट्रल कॉलेज (बैंगलोर)) कॉलेजों में संग्रहालयों की स्थापना हुई थी। 20वीं शताब्दी के आते-आते विभागीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालयों की स्थापना लगभग पूरे देश के कॉलेजों में हो गई थी, यहां तक की जौनपुर के तिलक धारी कॉलेज (टी.डी. कॉलेज) भी अब एक वनस्पति संग्रहालय था।

जौनपुर अपने ऐतिहासिक इतिहास के साथ-साथ अपने इस वनस्पति संग्रहालय के लिये भी प्रसिद्ध है। यह उन कुछ चुनिंदा संग्रहालयों में से एक है जिसमें जन सामान्य को भी जाने और अध्ययन की अनुमति होती है। इस संग्रहालय की स्थापना 1956 में जौनपुर के तिलक धारी कॉलेज (टी.डी. कॉलेज) में वनस्पति विज्ञान के छात्रों के अध्ययन में एक अतिरिक्त अंतर्दृष्टि प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। स्थापना के वर्षों बाद यह संग्रहालय जौनपुर के सभी पर्यटकों और लोगों के लिये खोल दिया गया है। तिलक धारी कॉलेज एक सरकारी निकाय है जो वनस्पति संग्रहालय की देखभाल करता है। इस कॉलेज की स्थापना 1914 में श्री तिलक धारी सिंह (सिंह जी जिले में अपने समुदाय के पहले स्नातक (Graduate) व्यक्ति थें) द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी माध्यमिक स्कूल के रूप में हुई थी। फिर इसे 1916 में क्षत्रिय हाई स्कूल के रूप में पहचान मिली और यह 1940 में एक इंटरमीडिएट स्कूल बन गया। 1947 में यह स्कूल आगरा विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करके एक डिग्री कॉलेज बन गया तथा बाद में यह संबद्धता 1956 में गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्थानांतरित हो गई थी। इसके पश्ताच 1970 में तत्कालीन प्रिंसिपल श्री एच एन सिंह के नेतृत्व में एक लंबे संघर्ष के बाद इसे स्नातकोत्तर की प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।

जौनपुर के इस वनस्पति संग्रहालय में आपको विभिन्न प्रकार के पौधे और उनके जीवाश्म देखने को मिल जाएंगे, जिनमें से कुछ पौधे दुर्लभ और अनोखी विशेषताओं वाले है। संग्रहालय में इन सभी नमूनों को अच्छी तरह से संरक्षित किया गया है और इस प्रकार से व्यवस्थित किया गया है कि यह देखने वालों को अपनी ओर आकर्षित करते है और बड़े ही रुचिकर लगते है। संग्रहालय के परिसर में आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिये विशेष गाइड मौजूद हैं। यह परिसर सुबह 10.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक खुला रहता है और सभी सार्वजनिक अवकाश तथा टी.डी. कॉलेज की छुट्टियों के दौरान बंद रहता है। संग्रहालय के भीतर पर्यटकों को किसी भी वस्तुओं की तस्वीरें लेने की अनुमति नहीं है। यहाँ से आप बस अपने मन में बहुमूल्य ज्ञान और यादों को संजो कर ले जा सकते है।

संदर्भ:
1.https://www.indianholiday.com/tourist-attraction/jaunpur/museums-in-jaunpur/botany-museum.html
2.https://www.insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/IJHS/Vol52_3_2017__Art12.pdf
3.http://sciencemuseums-ncstc.in/index.php?page=museum-list&pgn=&query=state&key=33
4.http://tdcollege.org/about.html



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