कौन निर्धारित करता है बाज़ार में बिक रही दवाईयाँ का मूल्य

जौनपुर

 29-11-2018 02:00 PM
स्तनधारी

आप सभी ने कभी ना कभी जीवन में एक बार तो बाज़ार से दवाईयां ज़रूर खरीदी होंगी। वर्तमान में रोगों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि आज मनुष्य खाने से ज्यादा दवाईयां खाते हैं। परंतु क्या इन्हें खरीदते समय आपने सोचा है कि इनका मूल्य निर्धारण कौन और किस प्रकार करता है? भिन्न-भिन्न कंपनियों की दवाईयों के मूल्यों में अंतर क्यों होता है? यदि नहीं सोचा तो हम आपको बता दें कि ‘राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एन.पी.पी.ए.)’ एक संस्थान है जो भारत में ज़रूरी दवाओं की कीमतों को निर्धारित तथा नियंत्रित करता है।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एन.पी.पी.ए.) एक सरकारी नियामक एजेंसी है जो 29 अगस्त 1997 को स्थापित की गयी थी। इसकी स्थापना से पहले दवाईयों की बढ़ती कीमतों के चलते सरकार ने विचार किया कि दवाईयों के मूल्य निर्धारण में कंपनियों को स्वचालन की अनुमति नहीं मिल सकती। मूल्य निर्धारण का कार्य करने के लिये सरकार ने विशेषज्ञों का एक स्वतंत्र निकाय स्थापित किया, जिसे राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण कहा गया। यह निकाय अनियंत्रित औषधियों के मूल्यों की मॉनीटरिंग भी करता है और औषध (मूल्य-नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों के क्रियान्वयन की देख-रेख करता है।

एन.पी.पी.ए. नियमित रूप से दवाइयों और उनकी अधिकतम कीमतों की सूची प्रकाशित करता है। नवीनतम डी.पी.सी.ओ. (औषध मूल्य-नियंत्रण आदेश- Drug Price Control Order) 2013 में जारी किया गया था जिसमें 384 दवाओं की सूची है। 4 दिसंबर 2017 को, औषध मूल्य नियंत्रण आदेश (डी.पी.सी.ओ.) के कार्यान्वयन से संबंधित मामलों पर परामर्श के लिए विशेषज्ञों की एक बहु-अनुशासनात्मक समिति की घोषणा की गई जो मूल्य निर्धारण और नए प्रमोचन में शामिल तकनीकी पर अपने विचार देगी। इसके संयोजक के रूप में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण के सदस्य इसके सचिव होंगे।

राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, भारत सरकार के रसायन तथा उर्वरक मंत्रालय के रसायन और पैट्रोरसायन विभाग के अधीन विशेषज्ञों का एक स्वतंत्र निकाय है। इस निकाय के कार्य निम्नलिखित हैं:

1. सरकार द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसार औषध मूल्य नियंत्रण आदेश के उपबंधों को लागू करना;
2. प्राधिकरण के निर्णयों से उत्पन्न सभी कानूनी मामलों पर कार्यवाही करना;
3. औषधियों की उपलब्धता पर ध्यान रखना तथा यदि कोई कमी हो तो उसकी पहचान करना तथा निवारणात्मक कदम उठाना;
4. थोक दवाओं और सूत्रयोगों के लिये उत्पादन, निर्यात और आयात, व्यक्तिगत कंपनियों के बाज़ार हिस्सेदारी, कंपनियों की लाभप्रदता आदि पर संबंधी आंकड़ो को एकत्र करना/रखाव करना;
5. दवाओं के मूल्य निर्धारण के संबंध में अध्ययन करना और/या प्रायोजित करना;
6. सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार प्राधिकरण के अधिकारियों और स्टाफ के अन्य सदस्यों की भर्ती/नियुक्ति करना;
7. औषध नीति में परिवर्तन/संशोधन से संबंधित उपायों के संबंध में केंद्र सरकार को सलाह देना;
8. औषध मूल्य निर्धारण से संबंधित संसदीय मामलों में केंद्र सरकार को सहायता प्रदान करना।

हाल में ही एन.पी.पी.ए. काफी सुर्खियों में रहा था। बताया जा रहा था कि नीती आयोग और रसायन और उर्वरक मंत्रालय, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (National Pharmaceutical Pricing Authority) की भूमिका में असहमति प्रकट कर रहे हैं। नियामक के पास औषधियों की समीक्षा करने तथा उनके मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता है। किंतु विगत कुछ समय में देखा गया है कि कुछ अस्पतालों द्वारा कुछ विशेष प्रकार की औषधियों को निर्धारित मूल्य से 650% अतिरिक्त मूल्य पर बेचा जा रहा है। जिसने मंत्री मंडल को नियामक की नीतियों पर प्रश्‍न उठाने के लिए विवश कर दिया है।

संदर्भ:
1.https://en.wikipedia.org/wiki/National_Pharmaceutical_Pricing_Authority
2.https://economictimes.indiatimes.com/industry/healthcare/biotech/pharmaceuticals/nppa-will-maintain-its-mandate-minister/articleshow/56651544.cms
3.http://www.nppaindia.nic.in/
4.http://www.nppaindia.nic.in/function.htm



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