जानियें नवरात्री के पहले दिन जौ उगाने की मान्यता क्यों है

जौनपुर

 08-11-2018 10:00 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

हमारे देश में साल भर अनेकों त्यौहार मनाये जाते हैं और शायद ही कोई ऐसा महीना होगा जो त्यौहारों के बैगर गुजरता होगा। इन त्यौहारों को कई रीति-रिवाज़ और पारंपरिक तरीकों से मनाया जाता है जिनके मनाने के पीछे कोई न कोई खास वजह ज़रूर होती है। आज हम ऐसी ही एक परम्परा के बारे में बता रहे हैं जिसे नवरात्री के दौरान किया जाता है। एक साल में नवरात्री का पर्व 4 बार मनाया जाता है। सामान्य तौर पर नवरात्री के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों की नौ दिन पूजा की जाती है।

साल के पहले महीने यानि जनवरी और फरवरी में माघ नवरात्री मनायी जाती है। उसके बाद मार्च और अप्रैल के महीने में चैत्र नवरात्री को मनाया जाता है। जून और जुलाई के महीने में आषाढ़ नवरात्री और अंत में शरद नवरात्री को मनाया जाता है। इन सब में सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध चैत्र और शरद की नवरात्री है। हर नवरात्री को मानाने के पीछे कई धार्मिक कारण हैं। मार्च और अप्रैल के महीने में जब चैत्र की नवरात्री को मनाया जाता है तो हम सभी देखते हैं कि कलश में जौ को उगाया गया होता है। ऐसा माना जाता है कि जौ का सम्बन्ध सृष्टि रचना से है।

चैत्र की नवरात्री हिन्दू धर्म के नववर्ष प्रारम्भ होते ही शुरू हो जाती है। माता की पूजा आराधना के लिये जौ या जवार का प्रयोग किया जाता है। इस दौरान हमारे घर में जौ बोई जाती है। ऐसा माना जाता है जब सृष्टि की शुरुआत हुई थी तब जौ सबसे पहली फसल के तौर पर मौजूद थी। इस फसल को पूर्ण फसल माना जाता है। जौ को हवन और देवी देवताओं को चढ़ाने के पीछे यही कारण है। बसंत की पहली फसल को हिन्दू धर्म के लोग माता रानी को अर्पित करते हैं। जौ उगाने के पीछे एक और मान्यता यह है कि जब जौ को उगाया जाता है तो इससे भविष्य सम्बंधित जानकारी और संकेत मिलते हैं। यह माना जाता है यदि जौ उगाने के बाद तेजी से बढ़ती है तो घर में सुख-समृद्धि आती है लेकिन यदि जौ उगाने के बाद मुर्झा जाती है या बहुत धीरे-धीरे बढ़ती है तो भविष्य के लिये अशुभ माना जाता है।

संदर्भ:
1.https://khabar.ndtv.com/news/faith/navratri-2018-importance-of-jau-or-jwara-pujan-1930872
2.https://www.patrika.com/lucknow-news/navratri-vrat-and-jau-pujan-vidhi-1264907/
3.https://www.quora.com/How-many-Navratri-comes-in-a-year



RECENT POST

  • क्या रहा समयसीमा के अनुसार, अब तक प्रारंग और जौनपुर का सफर
    शुरुआतः 4 अरब ईसापूर्व से 0.2 करोड ईसापूर्व तक

     14-07-2020 07:15 PM


  • जौनपुर के सोने के सिक्के
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     14-07-2020 05:00 PM


  • जौनपुर के शाही किले का इतिहास और वास्तुकला का विवरण
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-07-2020 04:45 PM


  • चीनी बेर परियों का नृत्य
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     12-07-2020 02:42 AM


  • खरोष्ठी भाषा का उद्भव
    ध्वनि 2- भाषायें

     10-07-2020 05:29 PM


  • अत्यधिक रंजित मोम का स्राव करते हैं लाख या लाह कीट
    तितलियाँ व कीड़े

     10-07-2020 05:34 PM


  • भारत के हितों में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पुनरुद्धार और प्रभावशीलता
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     08-07-2020 06:48 PM


  • भारत में नवपाषाण स्वास्थ्य बदलाव
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     08-07-2020 07:44 PM


  • सूफीवाद पर सबसे प्राचीन फारसी ग्रंथ : कासफ़-उल-महज़ोब
    ध्वनि 2- भाषायें

     07-07-2020 04:55 PM


  • जौनपुर की अद्भुत मृदा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     06-07-2020 03:37 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.