दुनिया को सफर कराने वाले पहिये का सफर

जौनपुर

 26-10-2018 10:14 AM
य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

जरा एक पल पहिये के बिना संसार की कल्पतना करने का प्रयास कीजिए, क्या होगा? ऐसा प्रतीत होगा मानो जीवन की गाड़ी थम सी गयी है, आज पहिये के बिना दुनिया का सफर अधूरा है। लेकिन पहिये का सफर कितना प्राचीन है, यह कहना थोड़ा कठिन होगा। इसके अविष्कार के प्रमाण हमें नवपाषाण काल के साक्ष्यों से प्राप्त होते हैं, जैसे गुफाओं में मिले भित्ति चित्रों में पहिये के चित्र देखे गये हैं। यह मानव जाति का अब तक का सर्वश्रेष्ठ अविष्कार कहा जा सकता है क्योंकि आप आज जितने भी मानवीय अविष्कार देखेंगे, वे सभी कहीं ना कहीं से प्रेरित हैं अर्थात प्रकृति या अन्य क्षेत्र से। किंतु पहिया एकमात्र ऐसा अविष्कार है जो पूर्णतः मानव मस्तिष्क की उपज है, जिसने संसार के स्वरूप को बदलने में गति प्रदान की।

मनुष्य के सामाजिक प्राणि बनते ही अर्थात् स्थायी जीवन व्यतीत करने, पशुपालन, कृषि आदि प्रारंभ करने के साथ ही इनके द्वारा सर्वप्रथम एक धुरी पर घूमने वाला पहिया बनाया गया। जिसके सबसे प्राचीन साक्ष्य मेसोपोटामिया (Mesopotamia) (3500 ई.पू.) से मिलते हैं, कुछ शोधकर्ताओं द्वारा तीसरी-चौथी शाताब्दी पूर्व ग्रीक के इतिहास में पहिये के प्रमाण खोजे गये हैं। भारत में भी पहिये के अनेक ऐतिहासिक प्रमाण देखने को मिलते हैं अर्थात भारत में मिली ऐतिहासिक गुफाओं में की गयी चित्रकारी में पहिये का उपयोग दर्शाया गया है जिनमें से एक गुफा जौनपुर के निकट मिर्जापुर में स्थित है। प्रारंभ में पहिये को सर्वप्रथम वाहन हेतु नहीं वरन चरखे के रूप में मिट्टी के बर्तन बनाने तथा अन्य स्थायी कार्यों के लिए किया गया। जिसे धीरे-धीरे परिवहन के उद्देश्य से परिष्कृत करके रथ, बैलगाड़ी इत्यादि में प्रयोग किया जाने लगा, इससे पूर्व ऊंट को परिवहन के लिए उपयोग किया जाता था, विशेषकर अफ्रिका वाले क्षेत्र में। रोमन साम्राज्य के दौरान पहिये का उपयोग मृत्यु दण्ड देने के लिए भी किया जाता था।

आगे चलकर अमेरिका फ्रांस जैसे देशों में पहिये का उपयोग जल चक्की, खिलौनों की गाड़ियों आदि में दिखने लगा। यूरोप में साइकिल के आविष्कार से पहिये का नया उपयोग सामने आया। 1893 में चर्खी-झूले में लगभग 250 फीट ऊंचा चक्र बनाया गया, जिसमें लगभग 2160 लोग झूल सकते थे। फिल्मी जगत भी इसके उपयोग से अछूता नहीं रहा, फिल्मों के संचालन में भी रील के रूप में चरखे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि फिल्मोंं का संचालन इसी के माध्यम से किया जाता है। वर्तमान समय में भी दुनिया की दूरी को समाप्त करने में पहिया प्रमुख भूमिका निभा रहा है। जिसने मानव जीवन को सरल बना दिया।

संदर्भ:
1.https://www.quora.com/How-did-the-invention-of-wheel-help-humans-in-early-times
2.https://www.smithsonianmag.com/science-nature/a-salute-to-the-wheel-31805121/



RECENT POST

  • विश्व भर में अपनाया गया है, भारतीय व्यंजन को
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     28-02-2020 12:00 PM


  • भारतीय सेना में भर्ती के लिए आवश्यक है कठिन परिश्रम और आवश्यक शारीरिक दक्षता
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     27-02-2020 11:40 AM


  • क्या कृत्रिम बारिश हो सकती है हमारे लिए एक वरदान?
    जलवायु व ऋतु

     26-02-2020 04:25 AM


  • क्या जौनपुर सहित सम्पूर्ण भारत में उपयोगी सिद्ध होगी फेशियल-रिकग्निशन (Facial Recognition) प्रणाली?
    संचार एवं संचार यन्त्र

     25-02-2020 03:00 PM


  • इंसान और जानवर, कौन किसके घर में सेंध लगा रहा है?
    स्तनधारी

     24-02-2020 03:00 PM


  • जीवन का सार सिखाती एक लघु फिल्म – “द एग (The Egg)”
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     23-02-2020 03:30 PM


  • त्रिशूल का अन्य संस्कृतियों में महत्व
    हथियार व खिलौने

     22-02-2020 01:30 PM


  • रहस्यमयी गाथाओं को समेटे है जौनपुर का त्रिलोचन महादेव मंदिर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     21-02-2020 11:30 AM


  • मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट (Metropolitan Museum of Art) में संरक्षित है जौनपुर की जैन कल्पसूत्र पाण्डुलिपि
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     20-02-2020 12:00 PM


  • संक्रामक रोगों के खिलाफ कैसे लड़ता है टीकाकरण
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     19-02-2020 11:00 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.