रामायण का कंबोडिया में स्वरुप

जौनपुर

 21-10-2018 10:00 AM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

भारत में रामायण 2000 वर्षों से महत्वपूर्ण महाकाव्य रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि कंपूचिया की राजधानी फ्नोम-पेन्ह (Phnom Penh) में एक बौद्ध संस्थान है जहाँ ख्मेर लिपि में दो हजार ताल पत्रों पर लिपिबद्ध पांडुलिपियाँ संकलित हैं। इस संकलन में कंपूचिया की रामायण की प्रति भी है। इसकी प्रत्येक पुस्तिका पर रामायण के किसी न किसी आख्यान का चित्र है। 'ख्मेर' कंपूचिया की भाषा का नाम है और 'रामकेर्ति' ख्मेर साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कृति है। इसकी प्रथम खंड की सुरुआत विश्वामित्र यज्ञ से होती है और इन्द्रजीत वध पर ख़तम हो जाती है, दूसरा खंड सीता त्याग से उनकी पृथ्वी प्रवेश तक कि कथा है।

'ख्मेर' में विष्णु अवतार श्री राम और माता सीता के बीच के प्रेम, उनका विवाह और वियोग को बड़े ही खूबसूरती से दर्शाया गया है। 'ख्मेर' में राम – लक्ष्मण और वानर सेना का रावन के राक्षस सेना के साथ जबरदस्त नाटकीय मुठभेड़ दिखाया गया है। आपको बता दें कि कंपूचिया में लोग राम को प्राहा रीम के नाम से जानते हैं और वहाँ उन्हें प्राणियों के रूप में व्याख्या की जाती है, न कि देवताओं की तरह ।

रेम्कर कंबोडिया में अन्य कला कृतियों के लिए एक प्रेरणा है चाहे वो वहा का शास्त्रीय नृत्य-नाटक हो या लोक संगीत और नृत्य हो ।

संदर्भ :

1. https://www.youtube.com/watch?v=qBEilHrV9kY
2. http://ignca.nic.in/coilnet/rktha009.htm
3. https://asiasociety.org/education/reamker



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