इंडोनेशिया मे भारतीय शैली के बने मंदिर और जौनपुर

जौनपुर

 21-06-2017 12:00 PM
छोटे राज्य 300 ईस्वी से 1000 ईस्वी तक
भारतीय मंदिर निर्माणकला का विकास भारत में हि नही अपितु विश्व के अन्य स्थानों में भी हुआ जैसे- अंगकोर वाट, जावा, बाली, नेपाल आदि। कम्बोडिया, इंडोनेशिया व नेपाल आदि देशों मे हिन्दू मंदिर स्थापत्यकला एक वृहद रूप मे दिखाई देती है। इंडोनेशियन द्वीपसमूह मे पहला बड़ा साम्राज्य 7वीं शताब्दी मे उदित हुआ और उसी समय से यहाँ पर स्थापत्य कला का विकास होना शुरू हुआ। इंडोनेशिया के बौद्ध व हिंदू मंदिरों को चंडी कहा जाता है। चंडी शब्द का प्रयोग मंदिरों के लिये ओड़िसा मे भी किया जाता है। यहाँ के मंदिरों का निर्माण एक विशाल चौकोर चबूतरे पर किया जाता है, जो कि पल्लवों के प्रसाद व विमान की तरह प्रतीत होता हैं। मूर्तियों के अलावा मंदिर के प्रमुख अंगों में नाग (मकरमुख), मकर तोरण, कीर्तिमुख आदि दिखाई देते हैं। यहाँ पर हिन्दू वास्तुकला के साथ ही साथ बौद्ध वास्तुकला का भी विकास तीव्रता के साथ हुआ। कंबोडिया मे मंदिरवास्तुकला के परम पराकाष्ठा को देखा जा सकता है। यहाँ का अंगकोर वाट दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है जो 500 एकड़ मे फैला हुआ है। कंम्बोडिया मे मंदिरों का निर्माण एक पिरामिडाकार चबूतरे के उपर किया जाता था जो मंदिर को एक ऊंचाई प्रदान करते थे। यहाँ के मंदिरों मे भी विमान व अन्य मंदिर के विभिन्न अंगों को पाया जाता है। यहाँ कि मंदिर वास्तुकला के साथ हि साथ मूर्तीकला का भी एक अद्भुत रूप दिखाई देता है, मंदिरों के शिखरों पर बनाये गये वृहदआकार के कीर्तिमुख व मुखाकृती तथा खंबों व दीवारों पर उकेरी गयी आकृतियाँ वास्तुकला का जीवन्त उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। नेपाल जो भारत के अत्यन्त करीब है वहाँ पर भी हिन्दू मंदिर स्थापत्यकला के कई रूप देखने मिलते हैं। यहाँ पर स्थित पशुपतिनाथ का मंदिर भारत कि हिमालयी वास्तुकला से प्रेरित है। नेपाल के वास्तुकला मे काष्ठ व प्रस्तर दोनो का प्रयोग किया जाता था जो कश्मीर व हिमाचल के स्थापत्य कला मे भी दिखाई देती है। जौनपुर मे मंदिरों के प्राचीनतम साक्ष्य गुप्तकाल से हि दिखाई देने लग जाते हैं, परन्तु यहाँ पर मंदिर वास्तुकला का विकास प्रतिहार काल मे हुआ। जौनपुर के मंदिर नागर शैली मे बनाए जाते थे जो अन्य स्थान जैसे कम्बोडिया, इंडोनेशिया व नेपाल के मंदिरों से भिन्न है। परन्तु अन्य कई समानतायें इन मंदिरों में देखने को मिल जाती हैं जैसे मकर मुख, कीर्तिमुख आदि। 1. इंडिया एण्ड साउथ ईस्ट एशिया: क्रिस्टोफर टाडजेल 2. प्रागधारा, 2013

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