पत्थरों पर की जाने वाली नक्काशी की एक अद्भुत वास्तुकला - जालियां

जौनपुर

 28-09-2018 01:54 PM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

भारत की वास्तुकला (Architecture) अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म में निहित है। भारतीय वास्तुकला ने समय के साथ प्रगति की लेकिन आज भी कई एतिहासिक इमारतें हैं, जिसमें हमें अद्भुत वास्तुकला देखने को मिलती है। चलिए आपको बताते है सिपाह मोहल्ले में गोमती नदी के उत्‍तरी तट पर बनी एक ऐसी ही इमारत के बारे में। जहां आपको पत्थरों पर की जाने वाली नक्काशी का सुंदर दृश्य देखने को मिलेगा।

दिल्ली के सुल्तानों ने ईरान और मध्य एशिया के पैटर्न का उपयोग अपनी इमारतों के निर्माण में करने की कोशिश की थी। इसको मुस्लिम आर्किटेक्ट्स द्वारा डिजाइन भी किया गया, लेकिन हिंदू कारीगरों द्वारा इसका निर्माण करने की वजह से इन इमारतों में भारत-इस्लामी वास्तुकला का संयोजन देखने को मिलता है। ऐसे ही वास्तुकला का एक उदाहरण उत्तर प्रदेश राज्य के जौनपुर नगर में स्थित एक प्राचीन “झंझीरी मस्जिद” (Jhanjhari Masjid) है। इसका निर्माण 1430 ई. में इब्राहीम शाह शार्की द्वारा करवाया गया था। इसका उपयोग सेना द्वारा अपने हाथी, ऊंट और घोड़े रखने के लिए किया जाता था। इस मस्जिद के भीतर पुरालेखों के बेहद खूबसूरत "झांजारी" भी हैं। लेकिन अब यह मस्जिद खण्डहर अवस्था में है। क्योंकि सिकंदर लोढ़ी द्वारा इस मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था, और इसे ध्वस्त करने के बाद इसके बहुत सारे पत्थरों का उपयोग शाही पुल में किया गया। वहीं इसे बाढ़ से भी काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन इतने नुकसानों के बाद भी आज यह मस्जिद प्रारंभिक वास्तुकला का एक बहुत ही सुंदर उदाहरण है।

आपको पता है इसमें सबसे सुंदर एवं आकर्षक वास्तुकला है पत्थरों पर की जाने वाली नक्काशी। जो हमें नीचे दिए फोटो के माध्यम से झंझीरी मस्जिद के झरोखों की जालियों में देखने को मिलती है। इन जालियों को पहले पत्थरों में नक्काशी करके आमतौर पर ज्यामितीय (geometric) पैटर्न में बनाया जाता था। जबकि बाद में मुग़लों ने ताजमहल में बहुत पतले नक्काशीदार तथा पौधे पर आधारित डिजाइनों का इस्तेमाल किया था और पीट्रा ड्यूरे (pietra dura) कला का भी उपयोग किया था। वे अक्सर संगमरमर और अर्द्ध कीमती पत्थरों का उपयोग करके इसको बनाते थे। यह जाली छेदों के माध्यम से हवा को संपीड़ित (compress) करके तापमान को कम करने में मदद करती थी। आज भी गुजरात और राजस्थान के घरों की खिड़कियों में यह जाली देखने को मिलती है। गुजरात और राजस्थान के शुष्क जलवायु क्षेत्रों की तुलना में केरल और कोकण जैसे आर्द्र क्षेत्रों में इसके छेद थोड़े बड़े होते हैं।

आज की आधुनिकता में घरों में गोपनीयता और सुरक्षा की वजह से इन जालियों का निर्माण कम हो गया है, लेकिन ये आज भी राजस्थान और ओडिशा राज्यों में बनवाई जाती हैं।

संदर्भ:

1. http://www.historydiscussion.net/history-of-india/characteristics-of-the-architecture-during-the-sultanate-period/2726
2. https://www.hamarajaunpur.com/2016/02/blog-post_54.html
3. https://jaunpur.nic.in/tourist-place/jhanjhari-masjid/
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Jali


RECENT POST

  • पशुधन और मुर्गीपालन क्षेत्रों पर लॉकडाउन का प्रभाव
    स्तनधारी

     21-01-2021 01:53 AM


  • यदि भुगतान क्षमता के नजरिए से देखें तो भारत का यातायात जुर्माना विश्व में सबसे अधिक है
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     20-01-2021 12:15 PM


  • भारतीय नागरिकता से संबंधित कुछ विशेष पहलू
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-01-2021 12:36 PM


  • सदियों पुराना है सोने के प्रति भारतीयों के प्रेम का इतिहास
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:52 PM


  • जीवन का असली आनंद है, दूसरों को खुशी देना
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 11:57 AM


  • सारण में ‘छनना’ के निर्माता हुए महामारी से प्रभावित
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:34 PM


  • मन और आत्मा को शुद्ध करने का साधन हैं, इस्लामिक कला के ज्यामितीय और संग्रथित प्रतिरूप
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:58 AM


  • एक दूसरे के साथ प्रेम और आंनद के साथ रहने का प्रतीक है, मकर संक्रांति
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:31 PM


  • मानव विकास सूचकांक देश के विकास के स्तर पर नजर रखने के लिए अनिवार्य है
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-01-2021 12:26 PM


  • आखिर क्‍यों नहीं छापती सरकार असीमित पैसे?
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     12-01-2021 11:46 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id